बांग्लादेश: भगवान राम की 81 फुट प्रतिमा प्रस्तावक हरिदास दास की गिरफ्तारी पर मानवाधिकार संगठनों का कड़ा विरोध
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला स्थित श्री श्री राधा गोविंदा एवं काली मंदिर परिसर में भगवान राम की 81 फुट ऊँची प्रतिमा के प्रस्तावित निर्माण को लेकर गहराया विवाद अब गिरफ्तारी तक पहुँच गया है। स्थानीय प्रशासन ने प्रतिमा निर्माण पर रोक लगाने के बाद 12 जुलाई को इस प्रस्ताव के सूत्रधार हरिदास चंद्र तरणी दास को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई की कई प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी निंदा करते हुए इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य' करार दिया है।
गिरफ्तारी का आधिकारिक कारण
अधिकारियों के अनुसार, हरिदास चंद्र तरणी दास को 12 जुलाई को पलाशबाड़ी मंदिर क्षेत्र से हिरासत में लिया गया। उनकी गिरफ्तारी ढाका के उत्तरा वेस्ट पुलिस थाने में उसी रात दर्ज धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के एक मामले से संबंधित बताई जा रही है। सीआईडी के विशेष पुलिस अधीक्षक (मीडिया) जसीम उद्दीन खान ने सोमवार को गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में साझा की जाएगी।
मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया
धार्मिक भेदभाव के विरुद्ध सक्रिय संगठन बांग्लादेश हिंदू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल ने एक प्रेस बयान में आरोप लगाया कि कट्टरपंथी सांप्रदायिक समूह लंबे समय से प्रस्तावित प्रतिमा का विरोध करते आ रहे हैं। काउंसिल का कहना है कि इन समूहों ने हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है और देशभर में अनावश्यक सांप्रदायिक तनाव फैलाने का प्रयास किया है।
काउंसिल ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बांग्लादेशी अधिकारी धार्मिक घृणा और असहिष्णुता फैलाने के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई करने में विफल रहे हैं। संगठन ने अपने बयान में कहा, 'हरिदास चंद्र तरणी दास, जो स्वयं लंबे समय से सांप्रदायिक धमकियों और भय का सामना कर रहे हैं, उनकी गिरफ्तारी दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है।'
एचआरसीबीएम का आरोप — 'प्रिजनर ऑफ कॉन्शियंस'
मानवाधिकार कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (एचआरसीबीएम) ने भी गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा कि दास को कई सप्ताह से जारी धार्मिक तनाव, कट्टरपंथी धमकियों और प्रस्तावित प्रतिमा निर्माण के विरोध के बीच हिरासत में लिया गया। संगठन के अनुसार, उसने पहले ही बांग्लादेशी अधिकारियों को आगाह किया था कि पलाशबाड़ी मंदिर, प्रस्तावित प्रतिमा, श्रद्धालुओं और आसपास के हिंदू समुदाय पर संगठित दबाव बनाया जा रहा है।
एचआरसीबीएम ने सवाल उठाया कि यदि कथित वित्तीय मामले का इस्तेमाल दास की शांतिपूर्ण धार्मिक गतिविधियों या हिंदू धार्मिक स्मारक के निर्माण के कारण उन्हें निशाना बनाने के बहाने के रूप में किया जा रहा है, तो उनकी हिरासत को 'प्रिजनर ऑफ कॉन्शियंस' — अर्थात विचारों के कारण कैद किए गए व्यक्ति — का स्पष्ट मामला माना जा सकता है।
संगठनों की माँगें
दोनों मानवाधिकार संगठनों ने बांग्लादेशी अधिकारियों से हरिदास चंद्र तरणी दास की तत्काल रिहाई, धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा और सांप्रदायिक घृणा फैलाने के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की माँग की है। काउंसिल ने यह भी कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई लोकतंत्र, कानून के शासन और सभी नागरिकों को समान संरक्षण प्रदान करने के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
आगे क्या
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएँ बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि पलाशबाड़ी मंदिर परिसर में प्रस्तावित 81 फुट प्रतिमा का मामला अब केवल स्थानीय प्रशासनिक विवाद नहीं रहा — यह बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और धार्मिक सहिष्णुता की व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है। दास की रिहाई और मामले की आगे की कार्रवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं।