ढाका में हजारों हिंदुओं का मशाल मार्च, गाइबांधा में भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान के विरोध में उठी आवाज़
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 20 जून को हजारों हिंदू समुदाय के लोग मशालें लेकर सड़कों पर उतरे और रंगपुर विभाग के गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला में भगवान राम की तस्वीर के कथित अपमान के विरोध में 'जय श्री राम' के नारे लगाए। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह प्रदर्शन उस घटना के बाद और तेज हो गया जब श्रीश्री राधागोविंद और काली मंदिर परिसर में प्रस्तावित भगवान राम की विशाल प्रतिमा के निर्माण पर प्रशासन ने रोक लगा दी।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय मीडिया के अनुसार, पलाशबाड़ी में श्रीश्री राधागोविंद और काली मंदिर परिसर में भगवान राम की दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा बनाने की योजना थी। कथित तौर पर इस निर्माण के विरोध में एक सांप्रदायिक समूह ने जुलूस निकाला, जिसके दौरान भगवान राम की तस्वीर का अपमान किया गया। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने मंदिर परिसर में प्रतिमा-निर्माण कार्य को रोकने का आदेश दिया। मंदिर के सलाहकार श्यामल कुमार महंत ने मंदिर सभागार में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी पुष्टि की।
आलोचकों का आरोप है कि यह निर्णय इस्लामी कट्टरपंथी समूहों के दबाव में लिया गया — हालाँकि प्रशासन ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
हिंदू समुदाय का प्रतिरोध
प्रतिमा-निर्माण पर रोक और कथित अपमान की घटना के विरोध में शुक्रवार, 20 जून की रात हजारों हिंदुओं ने ढाका में मशाल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने 'जय श्री राम' के नारे लगाते हुए घटना के लिए कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने घोषणा की कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे बांग्लादेश में इसी तरह के विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे।
अल्पसंख्यक संगठन की कड़ी निंदा
बांग्लादेश के प्रमुख अल्पसंख्यक अधिकार संगठन बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन एकता परिषद ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाने वाला बताया। परिषद के अनुसार, 'पिछले कई दिनों से कुछ कट्टरपंथी तत्व पलाशबाड़ी में भगवान श्रीराम की प्रतिमा और मंदिर परिसर को नुकसान पहुँचाने की धमकियाँ दे रहे हैं।'
परिषद ने यह भी आरोप लगाया कि इन समूहों द्वारा सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अल्पसंख्यक समुदायों के विरुद्ध नफरत फैलाने का अभियान चलाया जा रहा है। संगठन ने चेतावनी दी कि ऐसी गतिविधियाँ किसी भी समय व्यापक सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले सकती हैं।
परिषद ने बांग्लादेश सरकार से माँग की कि सांप्रदायिक शक्तियों पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए। संगठन ने भगवान राम की तस्वीर के अपमान और धार्मिक भावनाएँ भड़काने में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी सजा की भी माँग की है।
मीडिया और विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बांग्लादेशी अखबार ब्लिट्ज के संपादक सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए लिखा कि स्थानीय जिहादी और इस्लामवादी संगठनों के विरोध के बाद मंदिर परियोजना की गतिविधियाँ रोक दी गई हैं। उन्होंने लिखा, 'बांग्लादेश में हिंदू जय श्री राम का नारा लगाकर इस्लामिस्टों के खिलाफ विरोध जता रहे हैं!'
गौरतलब है कि यह मामला बांग्लादेश में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर नई बहस का विषय बन गया है। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों की रिपोर्टें पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बनी हुई हैं।
आगे क्या होगा
परिषद ने सभी धर्मनिरपेक्ष नागरिकों, सामाजिक संगठनों और लोकतांत्रिक राजनीतिक दलों से इन गतिविधियों के विरुद्ध एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और प्रतिमा-निर्माण पर लगी रोक नहीं हटती, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। बांग्लादेश सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।