आक्रांताओं का महिमामंडन अब बर्दाश्त नहीं, मेयर जनप्रतिनिधि होता है — कल्कि राम
सारांश
मुख्य बातें
राम दल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने बुधवार, 26 अगस्त को नई दिल्ली में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मेयर किसी धर्म का प्रतिनिधि नहीं बल्कि जनप्रतिनिधि होता है, और भारत में लुटेरों व आक्रांताओं के महिमामंडन का दौर समाप्त हो चुका है।
मेयर और आक्रांताओं के महिमामंडन पर कड़ा रुख
कल्कि राम ने कहा कि देश में एक नई प्रवृत्ति देखी जा रही है, जहाँ बच्चों के नाम औरंगजेब, तैमूर और बाबर जैसे ऐतिहासिक आक्रांताओं के नाम पर रखे जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'अगर आप मेयर हैं, तो आप किसी धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं करते — आप जनता के प्रतिनिधि हैं।'
उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से माँग की कि जो मेयर अपने कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाता है, उसे बर्खास्त कर कठोर कार्रवाई की जाए। उनके अनुसार, 'जनता ने उन्हें देश के खिलाफ कृत्य करने वालों का गुणगान करने के लिए नहीं चुना।' उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपने कार्यालय में देश के प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री या राष्ट्रीय प्रतीकों की तस्वीरें लगानी चाहिए।
हिजाब और स्कूल नियमों पर कल्कि राम का पक्ष
कल्कि राम ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ओवैसी भारत के निर्माता नहीं, बल्कि एक सांसद मात्र हैं। उनके अनुसार, जब स्कूलों में माला, कलावा या तिलक की अनुमति नहीं है, तो हिजाब को भी उसी नियम के दायरे में आना चाहिए। उन्होंने कहा, 'भारत के स्कूलों में सबके लिए एक ही नियम है — हिजाब को घर तक सीमित रखा जाए।'
उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हालिया फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए।
न्यूयॉर्क के मेयर मामदानी पर तीखी प्रतिक्रिया
कल्कि राम ने न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान मामदानी के हिंदुओं से जुड़े बयानों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मामदानी हिंदुओं के खिलाफ बयानबाजी करते हैं और भारत के बारे में भी ओछी टिप्पणियाँ करते हैं। कल्कि राम ने कहा, 'न्यूयॉर्क भारत के लिए एक मोहल्ले से ज्यादा कुछ नहीं है, इसलिए उनकी बातों को अनावश्यक तूल देने की जरूरत नहीं।' उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को एक वैश्विक संगठन बताते हुए कहा कि वह हिंदुओं की जनभावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
आचार्य विक्रमादित्य का पक्ष
आचार्य विक्रमादित्य ने भी मामदानी विवाद पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत टाइम स्क्वायर में जाकर अपनी बात रख सकते हैं। उन्होंने आरएसएस को एक सामाजिक संगठन बताया — धार्मिक नहीं — और कहा कि इसका एकमात्र उद्देश्य विश्वभर में शांति स्थापित करना है। उनके अनुसार, आरएसएस का किसी भी धर्म से कोई सीधा संबंध नहीं है।
आगे क्या
कल्कि राम की यह टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब महाराष्ट्र में मेयर द्वारा टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने का विवाद गरमाया हुआ है और देशभर में स्कूलों में धार्मिक प्रतीकों को लेकर बहस जारी है। राम दल ट्रस्ट ने महाराष्ट्र सरकार से शीघ्र कार्रवाई की माँग दोहराई है।