क्या राजा इकबाल सिंह का बयान अशोभनीय है, महिला पार्षदों की मांग इस्तीफा?
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नई दिल्ली, 10 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। महिला पार्षदों ने मेयर राजा इकबाल सिंह के उस विवादास्पद बयान के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने महिलाओं की तुलना भेड़-बकरी से की। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने पोस्टर-बैनर लेकर इकबाल सिंह से इस्तीफे की मांग की और कहा कि हम भेड़-बकरी नहीं हैं।
प्रदर्शनकारी पार्षद उर्मिला देवी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए मेयर के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि मेयर ने महिलाओं को भेड़-बकरी की तरह दिखाया, जिसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्हें अपने पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए।
उर्मिला ने कहा कि यदि आज इन लोगों को नगर निगम में 48 सीटें मिली हैं, तो इसमें महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण है। यदि ये लोग विधायक और सांसद बने हैं, तो महिलाओं का योगदान नकारा नहीं जा सकता। महिलाओं की गरिमा पर कुठाराघात करना अनुचित है।
महिला पार्षद ने यह भी कहा कि हम चाहते हैं कि मेयर साहब अपने पद के लिए माफी मांगें। ये लोग दावा करते हैं कि वे महिलाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन उनके द्वारा प्रयोग की गई भाषा स्पष्ट करती है कि महिलाओं के प्रति उनका कोई सम्मान नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता ऐसी भाषा का उपयोग करेगा, तो उस राजनीतिक पार्टी पर धिक्कार है। इस प्रदर्शन के माध्यम से हम यह संदेश देना चाहते हैं कि भेड़-बकरी और हममें अंतर है। हम महिलाएं हैं, हम जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी की प्रभारी प्रीति डोगरा ने कहा कि यह भाजपा की मानसिकता है कि वे महिलाओं को भेड़-बकरी मानती हैं। उन्हें सभी भेड़-बकरियों को भाजपा में शामिल करके पार्षद बनाना चाहिए।
अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा महिलाओं को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ती है। उन्होंने कहा कि सभी महिला पार्षद भेड़-बकरियां लेकर आई हैं, ताकि यह बताया जा सके कि महिलाओं और भेड़-बकरियों में अंतर होता है।
उन्होंने मांग की कि मेयर राजा इकबाल सिंह को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो हम व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
एक अन्य महिला ने मेयर के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं, और उन्हें भी उतने ही सम्मान का अधिकार है जितना पुरुषों को।
एलओपी अनुराग नारंग ने भी कहा कि मेयर राजा इकबाल सिंह को ऐसी अपमानजनक भाषा का उपयोग करने के लिए बर्खास्त किया जाना चाहिए।