26 अगस्त 2026
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अमित शाह के घुसपैठ विरोधी बयान पर एनडीए एकजुट, नेताओं ने कहा— 'राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं'

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अमित शाह के घुसपैठ विरोधी बयान पर एनडीए एकजुट, नेताओं ने कहा— 'राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं'

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह का 'भारत धर्मशाला नहीं' वाला बयान महज एक भाषण नहीं — यह 2047 के विकसित भारत को आंतरिक सुरक्षा से जोड़ने की स्पष्ट राजनीतिक घोषणा है। एनडीए के एकजुट समर्थन ने इसे सरकार की आधिकारिक नीति की आवाज़ बना दिया है।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 26 अगस्त 2026 को इंटेलिजेंस ब्यूरो के राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में कहा— 'यह देश कोई धर्मशाला नहीं है।' एनडीए के नेताओं ने एकजुट होकर शाह के घुसपैठ विरोधी रुख का समर्थन किया।
महाराष्ट्र BJP विधायक राम कदम ने कांग्रेस पर घुसपैठियों को 'वोट बैंक' की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा— घुसपैठियों की पहचान, सूची से निष्कासन और देश से बाहर भेजने की कार्रवाई होगी।
RLD नेता केसी त्यागी ने बयान को मौजूदा परिस्थितियों में अहम बताया।
शाह ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था से सीधे जोड़ा।

गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 26 अगस्त 2026 को अवैध घुसपैठ के विरुद्ध दिए गए कड़े बयान को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने एकस्वर में समर्थन दिया और इसे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा तथा संप्रभुता की रक्षा के लिए अपरिहार्य बताया। शाह ने नई दिल्ली में इंटेलिजेंस ब्यूरो की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन के समापन सत्र में स्पष्ट कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य एक सुदृढ़ आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के बिना अधूरा रहेगा।

गृह मंत्री का स्पष्ट संदेश

सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए गृह मंत्री शाह ने घुसपैठ, आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए सक्रिय एवं समन्वित रणनीति की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, 'यह देश कोई धर्मशाला नहीं है और इस देश में रहने का अधिकार केवल इसके नागरिकों को है।' उन्होंने आगाह किया कि अवैध घुसपैठियों की उपस्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और जनसंख्या संतुलन के लिए गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकती है।

एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया

महाराष्ट्र के भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक राम कदम ने कहा, 'गृह मंत्री ने राष्ट्रहित में यह बात कही है। यह देश एक परिवार है और इस देश के लोगों का इस पर पहला अधिकार है। यदि घुसपैठिए यहाँ आकर देश की सुरक्षा से समझौता करें, स्थानीय लोगों के अधिकार छीनें और आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दें, उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है।' कदम ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान ऐसे अवैध घुसपैठियों को 'जानबूझकर प्रोत्साहित' किया गया और वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया।

बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, 'गृह मंत्री का स्पष्ट रुख ही केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी का भी रुख है। भाजपा इस घुसपैठ विरोधी रुख का पूरी तरह समर्थन करती है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि घुसपैठियों की पहचान की जाएगी, उन्हें सूची से हटाया जाएगा और देश से बाहर भेजा जाएगा।'

राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के नेता केसी त्यागी ने भी शाह के बयान को मौजूदा परिस्थितियों में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, 'किसी भी विदेशी नागरिक को भारतीय नागरिकता प्राप्त किए बिना देश में रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए।'

सम्मेलन का व्यापक संदर्भ

यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने, अवैध घुसपैठ रोकने और संगठित अपराध नेटवर्क से जुड़े खतरों से निपटने पर विशेष ध्यान दे रही है। इंटेलिजेंस ब्यूरो का यह सम्मेलन देश के सुरक्षा तंत्र के लिए अगले दो दशकों की रणनीति निर्धारित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। गौरतलब है कि सरकार ने 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को आंतरिक सुरक्षा सुदृढ़ीकरण से सीधे जोड़ा है।

आगे क्या

एनडीए नेताओं के इस एकजुट समर्थन के बाद घुसपैठ विरोधी नीति पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन कांग्रेस पर लगाए गए आरोपों को लेकर पलटवार अपेक्षित है। केंद्र सरकार की घुसपैठ-रोधी कार्रवाइयों की दिशा और उनका क्रियान्वयन आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि घुसपैठियों की 'पहचान और निष्कासन' की प्रक्रिया में संवैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन कैसे होगा। एनडीए का एकमत समर्थन इसे सरकार की नीतिगत प्रतिबद्धता बनाता है, लेकिन क्रियान्वयन का ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीमावर्ती राज्यों में जनसंख्या संबंधी चिंताएँ राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं — विपक्ष का पलटवार और न्यायिक समीक्षा की माँग लगभग तय है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने 'भारत धर्मशाला नहीं' वाला बयान कहाँ और क्यों दिया?
गृह मंत्री अमित शाह ने यह बयान 26 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में इंटेलिजेंस ब्यूरो के राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन के समापन सत्र में दिया। उन्होंने अवैध घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और जनसंख्या संतुलन के लिए गंभीर खतरा बताते हुए यह स्पष्ट किया कि देश में रहने का अधिकार केवल नागरिकों को है।
एनडीए के कौन-से नेताओं ने शाह के बयान का समर्थन किया?
महाराष्ट्र BJP विधायक राम कदम, बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी और राष्ट्रीय लोक दल के नेता केसी त्यागी ने शाह के बयान का समर्थन किया। तीनों ने घुसपैठ विरोधी रुख को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया।
सरकार अवैध घुसपैठियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करेगी?
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी के अनुसार, गृह मंत्री शाह ने कहा है कि घुसपैठियों की पहचान की जाएगी, उन्हें सूची से हटाया जाएगा और देश से बाहर भेजा जाएगा। हालाँकि, इस प्रक्रिया का विस्तृत क्रियान्वयन ढाँचा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इंटेलिजेंस ब्यूरो का राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन किस उद्देश्य से आयोजित हुआ?
यह सम्मेलन अगले दो दशकों के लिए भारत की आंतरिक सुरक्षा रणनीति निर्धारित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इसमें घुसपैठ, आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने पर विचार-विमर्श हुआ।
2047 के विकसित भारत लक्ष्य का आंतरिक सुरक्षा से क्या संबंध है?
गृह मंत्री शाह ने स्पष्ट किया कि 2047 तक विकसित भारत बनने का लक्ष्य काफी हद तक एक मजबूत और प्रभावी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर करेगा। उनके अनुसार, अवैध घुसपैठ और संगठित अपराध इस लक्ष्य की राह में प्रमुख बाधाएँ हैं।
राष्ट्र प्रेस
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