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ऋषिकेश मुखर्जी पुण्यतिथि: 'आनंद' से 'गोलमाल' तक, हिंदी सिनेमा के सबसे सहज निर्देशक को याद करते हुए

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ऋषिकेश मुखर्जी पुण्यतिथि: 'आनंद' से 'गोलमाल' तक, हिंदी सिनेमा के सबसे सहज निर्देशक को याद करते हुए

सारांश

27 अगस्त को ऋषिकेश मुखर्जी की पुण्यतिथि पर याद आता है वह सिनेमा जो न बड़े सेट माँगता था, न चमक-दमक — बस एक आम इंसान की कहानी, जो पर्दे पर देखते हुए अपनी ही लगती थी। 42 फिल्में, चार दशक, और एक ऐसी विरासत जो आज भी जीवित है।

मुख्य बातें

ऋषिकेश मुखर्जी की पुण्यतिथि 27 अगस्त को मनाई जाती है; उनका निधन 27 अगस्त 2006 को हुआ था।
उनका जन्म 30 सितंबर 1922 को कोलकाता में हुआ था; उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री पढ़ी।
चार दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने 42 फिल्मों का निर्देशन किया।
प्रमुख फिल्मों में 'आनंद' , 'गोलमाल' , 'चुपके-चुपके' , 'बावर्ची' , 'गुड्डी' और 'अभिमान' शामिल हैं।
उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
बतौर निर्देशक पहली फिल्म 'मुसाफिर' (1957) ; पहली बड़ी सफलता 'अनाड़ी' (1959) ।

हिंदी सिनेमा के कालजयी निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी की 27 अगस्त को पुण्यतिथि है। 27 अगस्त 2006 को उन्होंने अंतिम सांस ली थी, लेकिन उनकी फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों में उतनी ही ताज़ी हैं जितनी पहले दिन थीं। चार दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने 42 फिल्मों का निर्देशन किया और हिंदी सिनेमा को एक ऐसा आईना दिया जिसमें आम भारतीय परिवार अपना चेहरा पहचान सके।

मध्यमवर्गीय जीवन के कवि

ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों की पहचान कभी भव्य सेट या चकाचौंध नहीं रही। उनका सिनेमा मध्यमवर्गीय परिवारों की छोटी-छोटी खुशियों, रिश्तों की उलझनों, दोस्ती और जीवन के उतार-चढ़ाव को इतनी सहजता से पर्दे पर उतारता था कि दर्शक किरदारों में खुद को खोजने लगते थे। यह ऐसे समय में आया जब हिंदी सिनेमा अक्सर अतिरंजित नाटकीयता की ओर झुका रहता था — ऋषि दा ने उस धारा के विपरीत एक शांत, मानवीय सिनेमा की परंपरा खड़ी की।

शुरुआत से सफलता तक का सफर

30 सितंबर 1922 को कोलकाता में जन्मे ऋषिकेश मुखर्जी ने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री की पढ़ाई की और कुछ समय तक अध्यापन भी किया। लेकिन फिल्मों का आकर्षण उन्हें मुंबई खींच लाया। उन्होंने अपना करियर फिल्म एडिटर के रूप में शुरू किया और न्यू थिएटर्स में काम करने के बाद प्रख्यात निर्देशक बिमल रॉय के साथ जुड़े।

1957 में बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म 'मुसाफिर' अपेक्षित सफलता नहीं पा सकी। किंतु 1959 में 'अनाड़ी' ने उन्हें पहचान दिलाई। इसके बाद 'बावर्ची', 'चुपके-चुपके', 'गुड्डी', 'अभिमान' और 'आनंद' जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा का एक अपरिहार्य स्तंभ बना दिया।

शतरंज की चाल जैसा निर्देशन

ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन की एक रोचक विशेषता उनका शतरंज-प्रेम था। कहा जाता है कि शूटिंग के दौरान वह प्रायः सेट पर शतरंज की बिसात बिछाए नजर आते थे। बाहर से देखने वालों को लगता कि निर्देशक खेल में डूबे हैं, लेकिन ऋषि दा की दृष्टि फिल्म के हर दृश्य और हर किरदार पर एकाग्र रहती थी। शतरंज की तरह ही वह प्रत्येक सीन की चाल पहले से सोचकर चलते थे — यही उनकी फिल्मों की बुनावट में दिखता है।

सम्मान और विरासत

अपने असाधारण योगदान के लिए ऋषिकेश मुखर्जी को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया — भारतीय सिनेमा और सरकार दोनों की ओर से उनकी महानता की स्वीकृति। 'गोलमाल' आज भी हिंदी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ कॉमेडी फिल्मों में गिनी जाती है, जबकि 'आनंद' की भावुकता पीढ़ी-दर-पीढ़ी दर्शकों को छूती रही है।

क्यों आज भी प्रासंगिक हैं ऋषि दा

गौरतलब है कि जब OTT प्लेटफॉर्म पर ऋषिकेश मुखर्जी की क्लासिक फिल्में उपलब्ध हुईं, तो नई पीढ़ी ने भी उन्हें उतनी ही गर्मजोशी से अपनाया। यह इस बात का प्रमाण है कि उनका सिनेमा किसी एक दौर की उपज नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना की स्थायी अभिव्यक्ति है। 'आनंद' की संवेदना हो या 'गोलमाल' की शरारत, 'चुपके-चुपके' की हँसी हो या 'अभिमान' के रिश्तों की कसक — ऋषि दा का हर रंग अपने आप में मुकम्मल था।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि शक्ति बनाया — एक ऐसे उद्योग में जहाँ भव्यता को प्रतिभा का पैमाना माना जाता था। आज जब हिंदी सिनेमा फिर से 'slice-of-life' कहानियों की ओर लौट रहा है, तो यह स्वीकारना ज़रूरी है कि ऋषि दा ने यह रास्ता दशकों पहले बना दिया था। उनकी फिल्मों का OTT पर पुनर्जन्म यह भी बताता है कि मानवीय संवेदना का सिनेमा कभी पुराना नहीं पड़ता — पर यह भी सोचने वाली बात है कि उनके बाद इस परंपरा को आगे ले जाने वाले निर्देशक कितने कम रहे।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऋषिकेश मुखर्जी कौन थे और उन्हें क्यों याद किया जाता है?
ऋषिकेश मुखर्जी हिंदी सिनेमा के प्रख्यात निर्देशक थे, जिन्होंने 'आनंद', 'गोलमाल', 'चुपके-चुपके' और 'बावर्ची' जैसी कालजयी फिल्में बनाईं। उन्हें मध्यमवर्गीय जीवन को सहज और मानवीय अंदाज़ में पर्दे पर उतारने के लिए जाना जाता है।
ऋषिकेश मुखर्जी का निधन कब हुआ था?
ऋषिकेश मुखर्जी का निधन 27 अगस्त 2006 को हुआ था। उनकी पुण्यतिथि हर वर्ष 27 अगस्त को मनाई जाती है।
ऋषिकेश मुखर्जी को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?
ऋषिकेश मुखर्जी को भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण और भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से नवाज़ा गया। ये पुरस्कार उनके चार दशकों से अधिक लंबे सिनेमाई योगदान की मान्यता में दिए गए।
ऋषिकेश मुखर्जी ने अपने करियर में कितनी फिल्में बनाईं?
ऋषिकेश मुखर्जी ने अपने निर्देशकीय करियर में 42 फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी पहली फिल्म 'मुसाफिर' (1957) थी और 'अनाड़ी' (1959) ने उन्हें पहली बड़ी पहचान दिलाई।
ऋषिकेश मुखर्जी की सबसे लोकप्रिय फिल्में कौन-सी हैं?
'गोलमाल', 'आनंद', 'चुपके-चुपके', 'बावर्ची', 'गुड्डी' और 'अभिमान' उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हैं। 'गोलमाल' को आज भी हिंदी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ कॉमेडी फिल्मों में गिना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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