पहलाज निहलानी के निधन पर अनीस बज्मी बोले — 'इंडस्ट्री ने एक बेहतरीन निर्माता खो दिया'
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म जगत के जाने-माने निर्माता और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी के 76 वर्ष की आयु में निधन के बाद बॉलीवुड में शोक की गहरी लहर है। 4 जून 2026 को उनके जाने की खबर फैलते ही फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों, निर्देशकों और निर्माताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके साथ बिताए यादगार पलों को साझा किया।
अनीस बज्मी की भावभीनी श्रद्धांजलि
फिल्म निर्माता अनीस बज्मी ने पहलाज निहलानी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'यह मेरे लिए बेहद दुखद दिन है। हमारा रिश्ता तीन से चार दशक पुराना था। मैंने उनके साथ कई फिल्मों में काम किया था, जिनमें 'आग ही आग' और 'शोला और शबनम' जैसी चर्चित फिल्में शामिल हैं।' बज्मी ने आगे कहा, 'वह बेहद दिलदार और मददगार इंसान थे। इंडस्ट्री ने एक बेहतरीन निर्माता और एक अच्छे इंसान को खो दिया है।'
गोविंद नामदेव ने याद किया पहला मौका
अभिनेता गोविंद नामदेव ने कहा कि उनके फिल्मी करियर की नींव रखने में पहलाज निहलानी का अहम योगदान रहा। उन्होंने कहा, 'मुझे पहली फिल्म 'शोला और शबनम' उन्होंने ही दी थी। उसी फिल्म की बदौलत मैं हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रख पाया।' नामदेव ने कहा कि निहलानी सिर्फ एक निर्माता नहीं, बल्कि उनके करियर के अहम मार्गदर्शक भी थे।
सुनील दर्शन ने बताया — पाँच दशक का अमिट सफर
निर्देशक-निर्माता सुनील दर्शन ने कहा, 'लगभग 50 सालों के अपने लंबे करियर में उन्होंने कई अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया — सफल फिल्म निर्माता, वितरण क्षेत्र में सक्रिय व्यक्तित्व और बाद में CBFC के अध्यक्ष।' दर्शन ने कहा, 'वह शांत और सौम्य स्वभाव के थे। इतना लंबा और प्रभावशाली सफर तय करने वाले व्यक्ति का जाना पूरे फिल्म जगत के लिए बड़ी क्षति है।'
पाँच दशकों की फिल्मी विरासत
पहलाज निहलानी का फिल्मी सफर 1982 में फिल्म 'हथकड़ी' से शुरू हुआ था। इसके बाद उन्होंने 'आंधी-तूफान', 'इल्जाम', 'आग ही आग', 'शोला और शबनम', 'आंखें', 'अंदाज', 'तलाश', 'जूली 2' और 'रंगीला राजा' जैसी कई फिल्मों का निर्माण किया। उनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की और दर्शकों के दिलों में भी खास जगह बनाई। यह ऐसे समय में आया है जब इंडस्ट्री के कई दिग्गज एक के बाद एक बिदा हो रहे हैं, और उनका जाना हिंदी सिनेमा के एक पूरे युग के अवसान का प्रतीक बन गया है।