पहलाज निहलानी के निधन पर बोले अनीस बज्मी: 'इंडस्ट्री ने एक बेहतरीन निर्माता खो दिया'
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म निर्माता और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी के 76 वर्ष की आयु में निधन के बाद 4 जून को पूरे हिंदी फिल्म जगत में शोक की गहरी लहर दौड़ गई। उनके जाने से दशकों पुराने साथियों, निर्देशकों और अभिनेताओं ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके साथ बिताए यादगार पलों को साझा किया।
अनीस बज्मी का भावुक संदेश
फिल्ममेकर अनीस बज्मी ने पहलाज निहलानी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, 'यह मेरे लिए बेहद दुखद दिन है। हमारा रिश्ता तीन से चार दशक पुराना था। मैंने उनके साथ कई फिल्मों में काम किया था, जिनमें 'आग ही आग' और 'शोला और शबनम' जैसी चर्चित फिल्में शामिल हैं।' बज्मी ने आगे कहा, 'वह बेहद दिलदार और मददगार इंसान थे। इंडस्ट्री ने एक बेहतरीन निर्माता और एक अच्छे इंसान को खो दिया है।'
यह ऐसे समय में आया है जब फिल्म उद्योग पहले ही कई दिग्गज हस्तियों के जाने का दर्द झेल चुका है। निहलानी के साथ काम कर चुके उनके सभी सहयोगी आज सदमे में हैं।
गोविंद नामदेव की श्रद्धांजलि
अभिनेता गोविंद नामदेव ने कहा, 'मुझे उनके जाने का गहरा दुख है। मेरे फिल्मी करियर की शुरुआत में पहलाज जी का बड़ा योगदान रहा। मुझे पहली फिल्म 'शोला और शबनम' उन्होंने ही दी थी। उसी फिल्म की बदौलत मैं हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रख पाया।' नामदेव ने यह भी जोड़ा कि निहलानी केवल एक निर्माता नहीं, बल्कि उनके करियर के अहम मार्गदर्शक भी थे।
सुनील दर्शन का संस्मरण
निर्देशक और निर्माता सुनील दर्शन ने निहलानी को याद करते हुए कहा, 'वह फिल्म इंडस्ट्री का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे। लगभग 50 वर्षों के अपने लंबे करियर में उन्होंने कई अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया — एक सफल फिल्म निर्माता, फिल्म वितरक और बाद में CBFC अध्यक्ष के रूप में।' दर्शन ने कहा कि वह शांत और सौम्य स्वभाव के थे और लोग उन्हें हमेशा सम्मान व प्यार के साथ याद करेंगे।
पहलाज निहलानी का फिल्मी सफर
पहलाज निहलानी का फिल्म जगत में सफर 1982 में फिल्म 'हथकड़ी' से आरंभ हुआ था। इसके बाद उन्होंने 'आंधी-तूफान', 'इल्जाम', 'आग ही आग', 'शोला और शबनम', 'आंखें', 'अंदाज', 'तलाश', 'जूली 2' और 'रंगीला राजा' सहित अनेक फिल्मों का निर्माण किया। उनकी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता अर्जित की और दर्शकों के दिलों में भी विशेष स्थान बनाया। गौरतलब है कि CBFC अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल भी चर्चा में रहा था।
फिल्म जगत को अपूरणीय क्षति
पाँच दशकों के सफर में निर्माण, वितरण और नियामक भूमिका — तीनों मोर्चों पर अपनी छाप छोड़ने वाले निहलानी का जाना हिंदी सिनेमा के एक युग के अवसान जैसा है। उनके निकट सहयोगियों का कहना है कि उनकी सहृदयता और मार्गदर्शन की कमी लंबे समय तक महसूस की जाती रहेगी।