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अयोध्या के संतों का स्वामी प्रसाद मौर्य और इमरान मसूद पर कड़ा विरोध, राम मंदिर टिप्पणी पर भड़के

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अयोध्या के संतों का स्वामी प्रसाद मौर्य और इमरान मसूद पर कड़ा विरोध, राम मंदिर टिप्पणी पर भड़के

सारांश

अयोध्या के तीन प्रमुख संतों ने स्वामी प्रसाद मौर्य के सनातन धर्म पर बयानों और कांग्रेस नेता इमरान मसूद की राम मंदिर टिप्पणी को एकस्वर में खारिज किया। संतों ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का बचाव करते हुए राजनेताओं को धार्मिक मामलों से दूर रहने की चेतावनी दी।

मुख्य बातें

हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेश आचार्य , महंत सीता राम दास और संत वरुण दास ने 3 सितंबर को दोनों नेताओं के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई।
स्वामी प्रसाद मौर्य पर आरोप — सनातन धर्म के प्रति अपमानजनक बयानों से मीडिया चर्चा में बने रहने का प्रयास।
इमरान मसूद की राम मंदिर और पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा से संबंधित टिप्पणी को संतों ने निंदनीय बताया।
जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट में सीईओ नियुक्त किया गया है; संतों ने उनका बचाव किया।
संत वरुण दास ने मौर्य के रामचरितमानस पर पूर्व विवादों का उल्लेख करते हुए जनता से ऐसे बयानों को तवज्जो न देने की अपील की।

अयोध्या के प्रमुख संतों ने 3 सितंबर को स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयानों और कांग्रेस नेता इमरान मसूद की राम मंदिर से जुड़ी टिप्पणियों पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई। हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेश आचार्य, साकेत भवन के महंत सीता राम दास और संत वरुण दास ने एकस्वर में दोनों नेताओं को धार्मिक विषयों पर बयानबाजी से परहेज करने की नसीहत दी। संतों ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को लेकर मसूद की कथित टिप्पणी को भी अनुचित और निंदनीय करार दिया।

स्वामी प्रसाद मौर्य पर संतों का आरोप

हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेश आचार्य ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य जानबूझकर विवादित बयान देकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा में बने रहने का प्रयास करते हैं। उन्होंने मौर्य के बयानों को सनातन धर्म के प्रति आपत्तिजनक बताया और अपने समर्थकों से उनका विरोध करने की अपील की।

साकेत भवन के महंत सीता राम दास ने मौर्य पर सनातन धर्म के प्रति अपमानजनक दृष्टिकोण रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति स्वयं सनातन धर्म को नहीं मानता, उसे इसके धार्मिक विषयों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

संत वरुण दास ने स्पष्ट किया कि संत समाज मौर्य के बयानों को कोई महत्व नहीं देता। उन्होंने रामचरितमानस और धार्मिक आयोजनों से जुड़े मौर्य के पूर्व विवादों का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि जो व्यक्ति स्वयं को हिंदू नहीं मानता, उसे राम जन्मभूमि जैसे विषयों पर बोलने का अधिकार क्यों होना चाहिए।

इमरान मसूद की टिप्पणी पर नाराजगी

देवेश आचार्य ने इमरान मसूद पर हिंदू धर्म और मठ-मंदिरों की परंपराओं की पर्याप्त जानकारी न होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मसूद को धार्मिक विषयों पर टिप्पणी करने से पहले उनकी पर्याप्त जानकारी हासिल करनी चाहिए।

महंत सीता राम दास ने मसूद के बयान को निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कांग्रेस की राम मंदिर को लेकर पुरानी राजनीतिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों ने अयोध्या और राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए, उन्हें अब इन विषयों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का बचाव

देवेश आचार्य ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का बचाव करते हुए कहा कि सैन्य सेवा में देश की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट में जितेंद्र मिश्रा की सीईओ के रूप में नियुक्ति का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि वह मंदिर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाएंगे।

संत वरुण दास ने कहा कि किसी पूर्व सैन्य अधिकारी के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग देश के सैनिकों और उनके योगदान के प्रति असम्मान के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म के धार्मिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप उचित नहीं है।

आगे क्या

अयोध्या के संत समाज की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब राम मंदिर से जुड़े विषय राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं। गौरतलब है कि स्वामी प्रसाद मौर्य पहले भी रामचरितमानस और धार्मिक परंपराओं पर विवादास्पद बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं। संतों की यह एकजुट प्रतिक्रिया संकेत देती है कि धार्मिक नेतृत्व राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर सतर्क और मुखर रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इससे बयानबाजी का चक्र थमता नहीं। असली सवाल यह है कि क्या धार्मिक संस्थाओं के नेतृत्व में नियुक्तियाँ — जैसे पूर्व एयर मार्शल का सीईओ पद — अब धार्मिक-राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन रही हैं, जो मंदिर की प्रशासनिक स्वायत्तता पर सवाल खड़े करती हैं।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या के संतों ने स्वामी प्रसाद मौर्य का विरोध क्यों किया?
संतों ने मौर्य पर सनातन धर्म के प्रति अपमानजनक बयान देने का आरोप लगाया। हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेश आचार्य और महंत सीता राम दास ने कहा कि मौर्य विवादित बयानों से मीडिया चर्चा में बने रहने का प्रयास करते हैं और जो व्यक्ति स्वयं सनातन धर्म को नहीं मानता, उसे इसके विषयों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
इमरान मसूद ने राम मंदिर को लेकर क्या कहा था जिस पर संत भड़के?
स्रोत के अनुसार कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने राम मंदिर और पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को लेकर टिप्पणी की थी, जिसे संतों ने अनुचित और निंदनीय बताया। संतों का कहना था कि मसूद को हिंदू धर्म और मठ-मंदिरों की परंपराओं की पर्याप्त जानकारी नहीं है।
जितेंद्र मिश्रा कौन हैं और राम मंदिर ट्रस्ट से उनका क्या संबंध है?
जितेंद्र मिश्रा पूर्व एयर मार्शल हैं जिन्हें राम मंदिर ट्रस्ट में सीईओ के रूप में नियुक्त किया गया है। अयोध्या के संतों ने उनका बचाव करते हुए कहा कि सैन्य सेवा में देश की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
स्वामी प्रसाद मौर्य के पूर्व विवाद क्या रहे हैं?
संत वरुण दास ने मौर्य के रामचरितमानस और धार्मिक आयोजनों से जुड़े पूर्व बयानों का उल्लेख किया, जिनके कारण पहले भी विवाद खड़े हुए थे। मौर्य की धार्मिक टिप्पणियाँ बार-बार संत समाज और हिंदू संगठनों की आपत्ति का विषय बनती रही हैं।
अयोध्या के संतों ने जनता से क्या अपील की?
संत वरुण दास ने लोगों से मौर्य जैसे बयानों को अधिक तवज्जो न देने की अपील की। देवेश आचार्य ने अपने समर्थकों से मौर्य का विरोध करने को कहा, जबकि महंत सीता राम दास ने सभी राजनीतिक नेताओं से दूसरे धर्म की मान्यताओं के प्रति सम्मानजनक भाषा इस्तेमाल करने का आग्रह किया।
राष्ट्र प्रेस
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