स्वामी प्रसाद मौर्य के राम-विरोधी बयान पर साधु-संतों का आक्रोश, राम मंदिर चंदा मामले में FIR की मांग को मिला समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा भगवान राम को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान के विरोध में देशभर के साधु-संतों ने 25 जून 2026 को तीखी प्रतिक्रिया जताई। साथ ही धर्मगुरुओं ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा राम मंदिर चंदा विवाद में एफआईआर दर्ज कराने की मांग का खुलकर समर्थन किया।
साधु-संतों की तीखी प्रतिक्रिया
श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी ने कहा, 'स्वामी प्रसाद मौर्य ने पहले भी हमारे पवित्र ग्रंथ रामायण का अपमान किया था। उन्होंने हमारे देवी-देवताओं का अपमान किया था। अब उन्होंने हमारे मर्यादा पुरुषोत्तम राम का अपमान किया है। ऐसी अभद्र बातें पहले कभी किसी ने नहीं कहीं।' फलाहारी ने आगे कहा कि स्वामी प्रसाद ने आज तक इस्लाम के विरुद्ध कभी कुछ नहीं कहा, और ऐसे व्यक्ति के खिलाफ रासुका (NSA) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब स्वामी प्रसाद मौर्य के किसी बयान ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने का विवाद खड़ा किया हो। इससे पहले भी उनके रामायण संबंधी बयानों पर तीव्र विरोध हो चुका है।
राम मंदिर चंदा विवाद पर महंतों का रुख
महंत देवेशाचार्य जी महाराज ने विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक की एफआईआर की मांग को 'सराहनीय' बताया। उन्होंने कहा, 'यह अच्छी बात है कि आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं, लेकिन सच साफ-साफ सामने आना चाहिए। जब एफआईआर दर्ज होगी और ठीक से जांच होगी, तभी सच पता चल पाएगा कि असल में कौन जिम्मेदार है।'
स्वामी दिलीप दास त्यागी ने भी विश्व हिंदू परिषद की मांग का स्वागत करते हुए कहा, 'एफआईआर के बिना जांच कैसे हो सकती है? एक बार एफआईआर दर्ज हो जाएगी तो जांच होगी और सभी दोषी पकड़े जाएंगे।' उन्होंने पुलिस से आग्रह किया कि इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की जाए।
नासिक से भी उठी आवाज़
नासिक में महंत भक्त चरण दास महाराज ने राम मंदिर चंदा विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए और सरकार को कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'राम मंदिर चंदा चोरी मामले में दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। भगवान राम मंदिर हिंदुओं के आस्था के केंद्र हैं। इस मामले में सरकार द्वारा कानूनी कार्रवाई बहुत जरूरी है, तभी सच्चाई का पता चलेगा।'
स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर महंत भक्त चरण दास ने कहा, 'भगवान राम के बारे में गलत बोलना पूरे हिंदू समाज का अपमान है। स्वामी प्रसाद को सोच-समझकर कोई भी बयान देना चाहिए। स्वामी प्रसाद के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।'
दो विवाद, एक मंच
यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े चंदे के कथित दुरुपयोग को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष की एफआईआर की मांग और स्वामी प्रसाद के बयान — दोनों मुद्दे एक साथ सामने आने से धार्मिक-राजनीतिक तनाव और गहरा हो गया है।
आगे क्या होगा
साधु-संतों की मांग के बाद अब यह देखना होगा कि उत्तर प्रदेश पुलिस स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान के संदर्भ में कोई कानूनी कदम उठाती है या नहीं। राम मंदिर चंदा मामले में भी एफआईआर दर्ज होने पर जांच की दिशा स्पष्ट होगी। धर्मगुरुओं ने स्पष्ट किया है कि वे इन दोनों मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक अपना दबाव बनाए रखेंगे।