10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

स्वामी प्रसाद मौर्य के राम-विरोधी बयान पर साधु-संतों का आक्रोश, राम मंदिर चंदा मामले में FIR की मांग को मिला समर्थन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
स्वामी प्रसाद मौर्य के राम-विरोधी बयान पर साधु-संतों का आक्रोश, राम मंदिर चंदा मामले में FIR की मांग को मिला समर्थन

सारांश

स्वामी प्रसाद मौर्य के भगवान राम पर कथित अपमानजनक बयान ने साधु-संतों को एकजुट कर दिया है। ऊपर से राम मंदिर चंदा विवाद में VHP की FIR मांग — दोनों मुद्दे एक साथ उभरकर धार्मिक-राजनीतिक माहौल को गर्म कर रहे हैं।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के भगवान राम पर कथित विवादित बयान पर साधु-संतों ने 25 जून 2026 को तीखा विरोध जताया।
श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी ने स्वामी प्रसाद के खिलाफ रासुका (NSA) के तहत कार्रवाई की मांग की।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक द्वारा राम मंदिर चंदा मामले में एफआईआर की मांग को महंत देवेशाचार्य जी महाराज और स्वामी दिलीप दास त्यागी ने समर्थन दिया।
नासिक के महंत भक्त चरण दास महाराज ने राम मंदिर चंदा दोषियों को सजा और सरकार से कानूनी कार्रवाई की मांग की।
राम मंदिर चंदा विवाद और स्वामी प्रसाद के बयान — दोनों मुद्दे एक साथ उभरने से धार्मिक-राजनीतिक तनाव गहराया।

उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा भगवान राम को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान के विरोध में देशभर के साधु-संतों ने 25 जून 2026 को तीखी प्रतिक्रिया जताई। साथ ही धर्मगुरुओं ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा राम मंदिर चंदा विवाद में एफआईआर दर्ज कराने की मांग का खुलकर समर्थन किया।

साधु-संतों की तीखी प्रतिक्रिया

श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी ने कहा, 'स्वामी प्रसाद मौर्य ने पहले भी हमारे पवित्र ग्रंथ रामायण का अपमान किया था। उन्होंने हमारे देवी-देवताओं का अपमान किया था। अब उन्होंने हमारे मर्यादा पुरुषोत्तम राम का अपमान किया है। ऐसी अभद्र बातें पहले कभी किसी ने नहीं कहीं।' फलाहारी ने आगे कहा कि स्वामी प्रसाद ने आज तक इस्लाम के विरुद्ध कभी कुछ नहीं कहा, और ऐसे व्यक्ति के खिलाफ रासुका (NSA) के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब स्वामी प्रसाद मौर्य के किसी बयान ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने का विवाद खड़ा किया हो। इससे पहले भी उनके रामायण संबंधी बयानों पर तीव्र विरोध हो चुका है।

राम मंदिर चंदा विवाद पर महंतों का रुख

महंत देवेशाचार्य जी महाराज ने विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक की एफआईआर की मांग को 'सराहनीय' बताया। उन्होंने कहा, 'यह अच्छी बात है कि आरोप-प्रत्यारोप लग रहे हैं, लेकिन सच साफ-साफ सामने आना चाहिए। जब एफआईआर दर्ज होगी और ठीक से जांच होगी, तभी सच पता चल पाएगा कि असल में कौन जिम्मेदार है।'

स्वामी दिलीप दास त्यागी ने भी विश्व हिंदू परिषद की मांग का स्वागत करते हुए कहा, 'एफआईआर के बिना जांच कैसे हो सकती है? एक बार एफआईआर दर्ज हो जाएगी तो जांच होगी और सभी दोषी पकड़े जाएंगे।' उन्होंने पुलिस से आग्रह किया कि इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की जाए।

नासिक से भी उठी आवाज़

नासिक में महंत भक्त चरण दास महाराज ने राम मंदिर चंदा विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए और सरकार को कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'राम मंदिर चंदा चोरी मामले में दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। भगवान राम मंदिर हिंदुओं के आस्था के केंद्र हैं। इस मामले में सरकार द्वारा कानूनी कार्रवाई बहुत जरूरी है, तभी सच्चाई का पता चलेगा।'

स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान पर महंत भक्त चरण दास ने कहा, 'भगवान राम के बारे में गलत बोलना पूरे हिंदू समाज का अपमान है। स्वामी प्रसाद को सोच-समझकर कोई भी बयान देना चाहिए। स्वामी प्रसाद के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।'

दो विवाद, एक मंच

यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े चंदे के कथित दुरुपयोग को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष की एफआईआर की मांग और स्वामी प्रसाद के बयान — दोनों मुद्दे एक साथ सामने आने से धार्मिक-राजनीतिक तनाव और गहरा हो गया है।

आगे क्या होगा

साधु-संतों की मांग के बाद अब यह देखना होगा कि उत्तर प्रदेश पुलिस स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान के संदर्भ में कोई कानूनी कदम उठाती है या नहीं। राम मंदिर चंदा मामले में भी एफआईआर दर्ज होने पर जांच की दिशा स्पष्ट होगी। धर्मगुरुओं ने स्पष्ट किया है कि वे इन दोनों मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक अपना दबाव बनाए रखेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

धार्मिक आक्रोश और कानूनी मांगें एक चक्र में चलती हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई अक्सर अधर में लटकी रहती है। असली सवाल यह है कि राम मंदिर चंदा विवाद में एफआईआर की मांग क्या वास्तव में पारदर्शी जांच की ओर ले जाएगी, या यह भी राजनीतिक दबाव का एक और उपकरण बनकर रह जाएगी। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि दोनों विवाद — बयान और चंदा — एक-दूसरे से अलग हैं, लेकिन इन्हें एक ही मंच पर मिलाने से असली जवाबदेही का सवाल धुंधला हो जाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वामी प्रसाद मौर्य ने भगवान राम के बारे में क्या विवादित बयान दिया?
स्रोत के अनुसार स्वामी प्रसाद मौर्य ने भगवान राम को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की, जिसे साधु-संतों ने 'मर्यादा पुरुषोत्तम राम का अपमान' बताया। बयान के सटीक शब्द सार्वजनिक रूप से उद्धृत नहीं किए गए हैं, लेकिन धर्मगुरुओं ने इसे हिंदू आस्था के विरुद्ध बताया है।
राम मंदिर चंदा विवाद क्या है और FIR की मांग क्यों हो रही है?
राम मंदिर के लिए एकत्र किए गए चंदे के कथित दुरुपयोग को लेकर विवाद उठा है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है ताकि जांच के जरिए दोषियों की पहचान हो सके।
साधु-संतों ने स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ क्या कार्रवाई की मांग की है?
श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी ने स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ रासुका (NSA) के तहत कार्रवाई की मांग की है। महंत भक्त चरण दास महाराज ने भी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की अपील की है।
विश्व हिंदू परिषद की FIR मांग को किन-किन धर्मगुरुओं ने समर्थन दिया?
महंत देवेशाचार्य जी महाराज, स्वामी दिलीप दास त्यागी और नासिक के महंत भक्त चरण दास महाराज ने VHP की एफआईआर मांग का समर्थन किया है। सभी का कहना है कि एफआईआर के बिना जांच संभव नहीं और दोषियों की पहचान तभी होगी।
क्या स्वामी प्रसाद मौर्य पहले भी ऐसे विवादों में रहे हैं?
हाँ, धर्मगुरुओं के अनुसार स्वामी प्रसाद मौर्य पहले भी रामायण को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं और उस पर भी हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध जताया था। यह उनका इस तरह का पहला विवाद नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 6 दिन पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 10 महीने पहले