राम मंदिर चंदा विवाद: सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने केंद्र व यूपी सरकार से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद वीरेंद्र सिंह ने 8 जुलाई को नई दिल्ली में केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार पर कई मोर्चों पर निशाना साधा — जिनमें राम मंदिर चंदे से जुड़े कथित विवाद, बद्रीनाथ मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की कार्रवाई, मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्य की नियुक्ति और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के लव मैरिज संबंधी बयान शामिल हैं। उन्होंने माँग की कि कथित अनियमितताओं की जाँच केवल निचले स्तर तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे प्रकरण के लिए जिम्मेदार लोगों तक पहुँचे।
राम मंदिर चंदा विवाद: जाँच की माँग
वीरेंद्र सिंह ने कहा कि भगवान राम के नाम पर एकत्र चढ़ावे और दान की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन लोगों को सौंपी गई थी, आज उन्हीं पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार, समय के साथ लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं और देश की जनता को तय करना होगा कि वह कथित 'चंदा चोरों' के साथ खड़ी होगी या उन लोगों के साथ जो इन मामलों को उजागर कर रहे हैं।
सपा सांसद ने यह भी कहा कि इस विवाद का असर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। उनके अनुसार, यदि जाँच एजेंसियाँ वास्तव में पूरे मामले की तह तक पहुँचना चाहती हैं तो केवल छोटे स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है — जिन लोगों पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनसे भी पूछताछ होनी चाहिए।
बद्रीनाथ चढ़ावा मामला और धार्मिक स्थलों की समीक्षा
बद्रीनाथ मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित मामले और बीकेटीसी की कार्रवाई पर वीरेंद्र सिंह ने कहा कि धार्मिक स्थलों पर इस तरह के विवादों का लगातार सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह केवल धन का नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और विश्वास का मामला है। उन्होंने माँग की कि देश के सभी प्रमुख देवस्थानों की प्रबंधन व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाए ताकि यदि कहीं कोई अनियमितता हो तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके।
वक्फ बोर्ड और राजनीतिक तर्क
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस टिप्पणी पर, जिसमें विपक्ष पर वक्फ बोर्ड के मुद्दे पर चुप रहने और चंदे के मामले पर बोलने का आरोप लगाया गया था, वीरेंद्र सिंह ने कहा कि वक्फ बोर्ड एक वैधानिक संस्था है जिसका गठन और नियम-कानून सरकार ही तय करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर चंदा विवाद से ध्यान हटाने के लिए वक्फ का मुद्दा उठाया जा रहा है।
मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्य की नियुक्ति पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पहले ही वक्फ कानून में कई संशोधन कर चुकी है, जिनका संसद में विपक्षी दलों ने विरोध किया था। उनके अनुसार, जब सरकार ने कानून में बदलाव किया है तो उसी के अनुरूप बोर्ड की संरचना और सदस्यों की नियुक्ति होना स्वाभाविक है।
राज्यपाल के बयान पर असहमति
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के लव मैरिज संबंधी बयान पर वीरेंद्र सिंह ने स्पष्ट असहमति जताई। उन्होंने कहा कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को समाज के सामने ऐसे उदाहरण रखने चाहिए जो युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणादायक हों। उन्होंने कहा कि किसी भी टिप्पणी में महिलाओं या लड़कियों के प्रति अपमानजनक भाषा उचित नहीं है और उनकी पार्टी इस टिप्पणी का समर्थन नहीं करती।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय विवाद राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा में केंद्र में हैं। गौरतलब है कि विपक्षी दल इन मुद्दों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जनता की आस्था से जोड़कर भाजपा को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वीरेंद्र सिंह ने संकेत दिया कि इस मामले से जुड़े अन्य पहलू भविष्य में भी सामने आ सकते हैं।