राम मंदिर विवाद पर भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना बोले: आस्था पर सियासत बंद हो
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद गुलाम अली खटाना ने 4 जुलाई को राम मंदिर चंदा चढ़ावा विवाद पर विपक्षी दलों की आलोचना करते हुए कहा कि आस्था से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम मंदिर से करोड़ों भारतीयों की आस्था जुड़ी है और इसे चुनावी हथियार बनाना उचित नहीं।
राम मंदिर विवाद और सरकार की कार्रवाई
खटाना ने कहा कि मंदिर में चंदा चोरी की घटना से सभी को दुख हुआ है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को दबाने की बजाय तत्काल कदम उठाए। उन्होंने बताया कि एसआईटी गठित की गई, गिरफ्तारियाँ हुईं और दोषियों को कठोर सजा दिलाई जाएगी। उनके अनुसार, समाजवादी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) इस संवेदनशील मुद्दे पर अनावश्यक राजनीति कर रही हैं।
संसद सत्र से जनता की उम्मीदें
संसद सत्र का उल्लेख करते हुए खटाना ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को लोकसभा और राज्यसभा में जनहित के मुद्दे उठाने चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि संसद का बहुमूल्य समय हंगामे और व्यवधान में बर्बाद नहीं होना चाहिए, क्योंकि देश की जनता हर सत्र से ठोस परिणामों की अपेक्षा रखती है।
चुनाव आयोग और मतदाता सूची शुद्धि
भाजपा सांसद ने चुनाव आयोग (ECI) को एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था बताते हुए कहा कि इसका मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक नागरिक ही मतदाता सूची में शामिल हों। उन्होंने मृत व्यक्तियों के नाम और दोहरे पंजीकरण जैसी अनियमितताओं को हटाने की वकालत करते हुए कहा कि इससे लोकतंत्र में जनता का विश्वास मजबूत होगा।
पीएम मोदी की नेतृत्व क्षमता पर टिप्पणी
खटाना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कोरोना महामारी के दौरान भारत के संयमित प्रबंधन का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जब बड़े-बड़े देशों में अफरातफरी का माहौल था, तब भारत ने स्थिरता बनाए रखी। इसी क्रम में उन्होंने ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान भी मोदी की कूटनीतिक सूझबूझ की तारीफ की।
सिंधु जल संधि और पाकिस्तान पर कड़ा रुख
सिंधु जल संधि पर बोलते हुए खटाना ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का पानी वहाँ की जनता का अधिकार है, लेकिन इस संधि के कारण वह पाकिस्तान को दिया जाता रहा है। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले, सीमा पर गोलीबारी और जम्मू-कश्मीर के युवाओं को नशे की लत में धकेलने जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे हालात में यह संधि अस्वीकार्य है। उन्होंने दो टूक कहा कि 'खून और पानी साथ नहीं बह सकते।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से तनावपूर्ण हैं।