4 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कलकत्ता हाईकोर्ट: जज सुव्रा घोष ने पूर्व मंत्री सुजीत बोस की जमानत याचिका से खुद को किया अलग, वकील के चैंबर-विजिट पर उठे सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कलकत्ता हाईकोर्ट: जज सुव्रा घोष ने पूर्व मंत्री सुजीत बोस की जमानत याचिका से खुद को किया अलग, वकील के चैंबर-विजिट पर उठे सवाल

सारांश

सुनवाई पूरी होने के बाद भी फैसला नहीं — कलकत्ता हाईकोर्ट की जज ने पूर्व मंत्री सुजीत बोस के वकील द्वारा उनके चैंबर में फाइल माँगने की घटना को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए खुद को मामले से अलग कर लिया। अब यह संवेदनशील जमानत याचिका नई बेंच के इंतजार में है।

मुख्य बातें

जस्टिस सुव्रा घोष ने 19 अगस्त 2026 को पूर्व मंत्री सुजीत बोस की जमानत याचिका से खुद को अलग किया।
सुनवाई 17 अगस्त को पूरी हो चुकी थी और फैसला सुरक्षित रखा गया था, फिर भी रिक्यूज़ल हुआ।
पूर्व मंत्री के एक वकील ने जज की अनुपस्थिति में उनके पर्सनल सेक्रेटरी से केस की फाइल माँगी — घटना को जज ने 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया।
ईडी ने सुजीत बोस को 11 मई 2026 को साउथ दमदम नगर पालिका नौकरी घोटाले में गिरफ्तार किया था; करीब 150 नामों की अवैध सिफारिश का आरोप।
मामला अब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती के पास, जो नई बेंच तय करेंगे।

कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल बेंच की जज जस्टिस सुव्रा घोष ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस की जमानत याचिका पर फैसला सुनाने से खुद को अलग कर लिया। यह याचिका प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा नगर पालिका नौकरी घोटाले में दर्ज मामले से जुड़ी है। इस कदम की वजह एक ऐसी घटना बनी जिसे जस्टिस घोष ने स्वयं 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया।

चैंबर-विजिट की घटना और अलगाव का फैसला

जस्टिस सुव्रा घोष ने अदालत में स्पष्ट किया कि मंगलवार, 18 अगस्त को पूर्व मंत्री के एक वकील उनके चैंबर में तब पहुँचे जब वह वहाँ मौजूद नहीं थीं। उस वकील ने उनके पर्सनल सेक्रेटरी से कहा कि चैंबर से इस केस से संबंधित एक फाइल उन्हें सौंप दी जाए। इस असाधारण घटना की जानकारी जस्टिस घोष ने तत्काल कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती को दी और इसके बाद खुद को मामले से अलग करने का निर्णय लिया।

सुनवाई की स्थिति और अगला कदम

गौरतलब है कि इस जमानत याचिका पर सुनवाई 17 अगस्त को ही पूरी हो चुकी थी और जस्टिस घोष ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। लेकिन चैंबर-विजिट की घटना के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। अब यह मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती के पास लंबित है, जो यह तय करेंगे कि याचिका किस नई बेंच को भेजी जाएगी।

सुजीत बोस और नगर पालिका नौकरी घोटाला

सुजीत बोस पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक और ममता बनर्जी सरकार में अग्निशमन सेवा मंत्री रह चुके हैं। ईडी का आरोप है कि उन्होंने साउथ दमदम नगर पालिका में नौकरी के इच्छुक लोगों के नामों की अवैध सिफारिश की। ट्रायल कोर्ट में ईडी ने दावा किया था कि इस सूची में करीब 150 नौकरी चाहने वालों के नाम शामिल थे।

ईडी के अनुसार भ्रष्टाचार से अर्जित राशि सुजीत बोस और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में जमा की गई थी। गिरफ्तारी से पहले एजेंसी ने उनसे कई दौर में पूछताछ की थी।

गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत

ईडी ने सुजीत बोस को 11 मई 2026 को गिरफ्तार किया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं। उन्होंने जमानत के लिए जस्टिस सुव्रा घोष की सिंगल बेंच में याचिका दायर की थी, जो अब नई बेंच को स्थानांतरित होगी।

न्यायिक प्रक्रिया पर असर

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में ईडी की जाँच से जुड़े कई राजनीतिक मामले अदालतों में विचाराधीन हैं। किसी जज का सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखने और फिर खुद को अलग करने का यह असामान्य कदम न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के उस फैसले पर हैं जो यह तय करेगा कि इस संवेदनशील याचिका की अगली सुनवाई किस बेंच में होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसकी वजह और भी चिंताजनक है। यदि यह घटना वैसी ही है जैसी जस्टिस घोष ने बताई, तो यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है — चाहे इरादा कुछ भी रहा हो। पश्चिम बंगाल में ईडी के राजनीतिक मामलों की पृष्ठभूमि में यह घटना और अधिक संवेदनशील हो जाती है। असली सवाल यह है कि क्या इस वकील के आचरण की जाँच होगी, या यह मामला महज एक बेंच-बदलाव बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जस्टिस सुव्रा घोष ने सुजीत बोस की जमानत याचिका से खुद को क्यों अलग किया?
जस्टिस सुव्रा घोष ने बताया कि 18 अगस्त को उनकी अनुपस्थिति में पूर्व मंत्री के एक वकील उनके चैंबर में आए और पर्सनल सेक्रेटरी से केस की फाइल माँगी। इस घटना को उन्होंने 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को सूचित किया और मामले से अलग होने का फैसला लिया।
सुजीत बोस पर ईडी ने क्या आरोप लगाए हैं?
ईडी का आरोप है कि सुजीत बोस ने साउथ दमदम नगर पालिका में नौकरी के लिए करीब 150 लोगों की अवैध सिफारिश की और भ्रष्टाचार से अर्जित राशि उनके व उनके परिवार के बैंक खातों में जमा की गई। उन्हें 11 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया था।
अब सुजीत बोस की जमानत याचिका का क्या होगा?
यह मामला अब कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपोब्रत चक्रवर्ती के पास लंबित है। वही यह तय करेंगे कि इस याचिका को किस नई बेंच को सौंपा जाएगा।
सुजीत बोस कौन हैं और उनका राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है?
सुजीत बोस तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधायक और ममता बनर्जी सरकार में अग्निशमन सेवा मंत्री रह चुके हैं। ईडी द्वारा गिरफ्तारी के बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं।
क्या सुनवाई पूरी होने के बाद जज का रिक्यूज़ होना असामान्य है?
हाँ, यह न्यायिक प्रक्रिया में एक असाधारण कदम है। सामान्यतः सुनवाई पूरी होने और फैसला सुरक्षित रखने के बाद जज उसी मामले में निर्णय सुनाते हैं। इस मामले में चैंबर-विजिट की घटना के चलते जस्टिस घोष ने यह असामान्य निर्णय लिया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 1 साल पहले