नगर निकाय भर्ती घोटाला: पूर्व मंत्री सुजीत बोस को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत नहीं, ईडी हिरासत जारी
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 29 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के नगर निकाय भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। अवकाशकालीन एकल पीठ की न्यायाधीश न्यायमूर्ति शम्पा दत्ता पॉल ने स्पष्ट किया कि यह मामला ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद नियमित पीठ के समक्ष सुना जाएगा। फिलहाल सुजीत बोस ईडी की हिरासत में बने हुए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बोस के वकील ने गुरुवार को अवकाशकालीन पीठ के समक्ष याचिका दायर कर तर्क दिया कि उनके मुवक्किल नगर निकाय भर्ती घोटाले में आरोपी नहीं हैं, इसलिए ईडी की गिरफ्तारी विधिसम्मत नहीं है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति शम्पा दत्ता पॉल ने यह तर्क सुनने के बावजूद तत्काल राहत देने से मना कर दिया।
अदालत ने ईडी को सुजीत बोस की गिरफ्तारी से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही बोस के वकील को भी अपने पक्ष के तर्कों का विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा गया है।
ईडी के आरोप और जाँच के निष्कर्ष
ईडी के अनुसार, सुजीत बोस ने दक्षिण दमदम नगर पालिका में विभिन्न पदों पर लगभग 150 अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की सिफारिश करने के बदले भारी रकम वसूली। गिरफ्तारी से पहले एजेंसी ने उनके आवास और कार्यालयों पर छापेमारी भी की थी।
जाँच के दौरान बोस और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में कथित फर्जी वित्तीय लेन-देन का भी पता लगाया गया है। ईडी का दावा है कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, जब उनके स्वामित्व वाला एक रेस्तरां पूरी तरह बंद था, तब भी उसके खाते में ₹1.1 करोड़ और उनके निजी खाते में ₹2.2 करोड़ ट्रांसफर किए गए। ये तथ्य कोलकाता स्थित धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत के समक्ष भी प्रस्तुत किए गए हैं।
सुजीत बोस की राजनीतिक पृष्ठभूमि
उत्तर 24 परगना जिले की बिधाननगर विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रहे सुजीत बोस हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार गए थे। चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित हुए और उसके कुछ ही दिन बाद 11 मई की रात करीब 10 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया।
गौरतलब है कि यह मामला पश्चिम बंगाल में नगर निकाय भर्ती अनियमितताओं की उस व्यापक जाँच का हिस्सा है जिसमें सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े कई नेता पहले से ही ईडी और सीबीआई के निशाने पर हैं।
आगे क्या होगा
ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय की नियमित पीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी। तब तक सुजीत बोस ईडी की हिरासत में रहेंगे और एजेंसी अपनी जाँच जारी रखेगी। यह मामला पश्चिम बंगाल में सत्ता-भ्रष्टाचार के आरोपों की बड़ी कानूनी लड़ाई का नया अध्याय बन सकता है।