14 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नगर निकाय भर्ती घोटाला: पूर्व मंत्री सुजीत बोस को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत नहीं, ईडी हिरासत जारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नगर निकाय भर्ती घोटाला: पूर्व मंत्री सुजीत बोस को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत नहीं, ईडी हिरासत जारी

सारांश

पश्चिम बंगाल नगर निकाय भर्ती घोटाले में ईडी की गिरफ्त में आए पूर्व मंत्री सुजीत बोस को कलकत्ता हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली — अवकाशकालीन पीठ ने मामला नियमित पीठ को सौंपा। ईडी का दावा है कि 150 अयोग्य नियुक्तियों और लॉकडाउन में करोड़ों के संदिग्ध लेन-देन से यह मामला गंभीर मनी लॉन्ड्रिंग का है।

मुख्य बातें

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 29 मई 2026 को पूर्व मंत्री सुजीत बोस की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया।
न्यायमूर्ति शम्पा दत्ता पॉल ने मामला ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद नियमित पीठ को भेजा।
ईडी ने 11 मई को करीब 10 घंटे की पूछताछ के बाद बोस को गिरफ्तार किया था।
ईडी के अनुसार बोस ने दक्षिण दमदम नगर पालिका में 150 अयोग्य उम्मीदवारों की सिफारिश कर रकम वसूली।
लॉकडाउन के दौरान बंद रेस्तरां के खाते में ₹1.1 करोड़ और बोस के निजी खाते में ₹2.2 करोड़ ट्रांसफर का दावा।
अदालत ने ईडी को गिरफ्तारी की विस्तृत रिपोर्ट और बोस के वकील को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 29 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के नगर निकाय भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तार पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। अवकाशकालीन एकल पीठ की न्यायाधीश न्यायमूर्ति शम्पा दत्ता पॉल ने स्पष्ट किया कि यह मामला ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद नियमित पीठ के समक्ष सुना जाएगा। फिलहाल सुजीत बोस ईडी की हिरासत में बने हुए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बोस के वकील ने गुरुवार को अवकाशकालीन पीठ के समक्ष याचिका दायर कर तर्क दिया कि उनके मुवक्किल नगर निकाय भर्ती घोटाले में आरोपी नहीं हैं, इसलिए ईडी की गिरफ्तारी विधिसम्मत नहीं है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति शम्पा दत्ता पॉल ने यह तर्क सुनने के बावजूद तत्काल राहत देने से मना कर दिया।

अदालत ने ईडी को सुजीत बोस की गिरफ्तारी से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही बोस के वकील को भी अपने पक्ष के तर्कों का विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा गया है।

ईडी के आरोप और जाँच के निष्कर्ष

ईडी के अनुसार, सुजीत बोस ने दक्षिण दमदम नगर पालिका में विभिन्न पदों पर लगभग 150 अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की सिफारिश करने के बदले भारी रकम वसूली। गिरफ्तारी से पहले एजेंसी ने उनके आवास और कार्यालयों पर छापेमारी भी की थी।

जाँच के दौरान बोस और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में कथित फर्जी वित्तीय लेन-देन का भी पता लगाया गया है। ईडी का दावा है कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, जब उनके स्वामित्व वाला एक रेस्तरां पूरी तरह बंद था, तब भी उसके खाते में ₹1.1 करोड़ और उनके निजी खाते में ₹2.2 करोड़ ट्रांसफर किए गए। ये तथ्य कोलकाता स्थित धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत के समक्ष भी प्रस्तुत किए गए हैं।

सुजीत बोस की राजनीतिक पृष्ठभूमि

उत्तर 24 परगना जिले की बिधाननगर विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रहे सुजीत बोस हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार गए थे। चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित हुए और उसके कुछ ही दिन बाद 11 मई की रात करीब 10 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया।

गौरतलब है कि यह मामला पश्चिम बंगाल में नगर निकाय भर्ती अनियमितताओं की उस व्यापक जाँच का हिस्सा है जिसमें सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े कई नेता पहले से ही ईडी और सीबीआई के निशाने पर हैं।

आगे क्या होगा

ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय की नियमित पीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी। तब तक सुजीत बोस ईडी की हिरासत में रहेंगे और एजेंसी अपनी जाँच जारी रखेगी। यह मामला पश्चिम बंगाल में सत्ता-भ्रष्टाचार के आरोपों की बड़ी कानूनी लड़ाई का नया अध्याय बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर ईडी और सीबीआई की कार्रवाई चुनाव परिणामों के ठीक बाद तेज़ हो जाती है — यह संयोग राजनीतिक बहस का केंद्र बनता रहा है। असली सवाल यह है कि क्या ईडी की चार्जशीट में वे ठोस वित्तीय सबूत हैं जो अदालत में टिक सकें, या यह मामला भी प्रक्रियागत देरी में उलझकर रह जाएगा। लॉकडाउन के दौरान बंद रेस्तरां में करोड़ों के लेन-देन का दावा, यदि सिद्ध हुआ, तो यह मनी लॉन्ड्रिंग के सबसे स्पष्ट उदाहरणों में से एक होगा।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुजीत बोस को ईडी ने क्यों गिरफ्तार किया?
ईडी ने सुजीत बोस को नगर निकाय भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने दक्षिण दमदम नगर पालिका में लगभग 150 अयोग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की सिफारिश करने के बदले भारी रकम वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग की।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुजीत बोस को राहत क्यों नहीं दी?
कलकत्ता उच्च न्यायालय में फिलहाल ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है। अवकाशकालीन पीठ ने माना कि यह मामला नियमित पीठ के समक्ष सुना जाना चाहिए, इसलिए तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया।
सुजीत बोस के खिलाफ ईडी के मुख्य आरोप क्या हैं?
ईडी के अनुसार बोस ने 150 से अधिक अयोग्य उम्मीदवारों की सिफारिश कर रकम वसूली, उनके और परिवार के खातों में फर्जी लेन-देन हुए, और कोविड लॉकडाउन में बंद रेस्तरां के खाते में ₹1.1 करोड़ व निजी खाते में ₹2.2 करोड़ ट्रांसफर किए गए।
सुजीत बोस कौन हैं और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है?
सुजीत बोस पश्चिम बंगाल के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री और उत्तर 24 परगना जिले की बिधाननगर विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रहे हैं। वे हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में हार गए थे।
इस मामले में आगे क्या होगा?
ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय की नियमित पीठ याचिका पर सुनवाई करेगी। तब तक ईडी को विस्तृत रिपोर्ट और बोस के वकील को हलफनामा दाखिल करना होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले