कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुजीत बोस की ईसीआईआर रद्द करने की याचिका खारिज की, जमानत अर्जी दाखिल करने की सलाह
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार, 8 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के पूर्व अग्निशमन सेवा मंत्री सुजीत बोस की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने नगर पालिकाओं में भर्ती से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज 'एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट' (ईसीआईआर) को रद्द करने की मांग की थी। न्यायालय ने उन्हें इस मामले में जमानत अर्जी दाखिल करने की सलाह दी है।
न्यायालय का रुख और सुनवाई का ब्यौरा
जस्टिस कृष्णा राव की सिंगल जज वेकेशन बेंच ने बोस के वकील के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि मामला दिन की सुनवाई सूची में शामिल होना था। वकील ने तत्काल सुनवाई का विशेष अनुरोध किया था, लेकिन न्यायालय इससे संतुष्ट नहीं हुआ।
जस्टिस राव ने ईसीआईआर को रद्द करने की याचिका पर त्वरित सुनवाई की आवश्यकता पर सवाल उठाया और बोस के वकील को सलाह दी कि यदि आवश्यक समझें तो जमानत अर्जी दाखिल करें। इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में निर्धारित की गई है।
गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
बोस को 11 मई की रात नगर पालिका में नौकरी के बदले धन लेने के मामले में लंबी पूछताछ के बाद ईडी अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था। तब से वे न्यायिक हिरासत में हैं। गिरफ्तारी से पूर्व ईडी ने उनके घर और कार्यालय पर छापेमारी की थी। केंद्रीय जांच अधिकारियों ने उस ढाबे की भी तलाशी ली थी, जिसे पूर्व मंत्री संचालित करते थे।
आरोप और जांच का दायरा
ईडी के अनुसार, सुजीत बोस पर साउथ दमदम नगर पालिका में नौकरी पाने वाले कथित तौर पर लगभग 150 उम्मीदवारों के नामों की गैरकानूनी सिफारिश करने का आरोप है। जांच एजेंसी का कहना है कि भ्रष्टाचार से अर्जित धन कई बैंक खातों में स्थानांतरित किया गया, जिनकी अब जांच की जा रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में नगर पालिका और शिक्षक भर्ती घोटालों की जांच तेज हो गई है और ईडी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े कई नेताओं पर शिकंजा कसा है।
सुजीत बोस का राजनीतिक परिचय
बोस उत्तर 24 परगना जिले के बिधाननगर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बार विधायक रहे हैं। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में वे अपनी सीट गँवा चुके हैं। गौरतलब है कि यह मामला पश्चिम बंगाल में नगर निकाय भर्ती घोटाले की व्यापक जांच का हिस्सा है, जिसमें ईडी और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) दोनों सक्रिय हैं।
आगे क्या होगा
न्यायालय के निर्देश के बाद अब बोस के पास जमानत अर्जी दाखिल करने का विकल्प है। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होनी है। ईडी की जांच जारी है और बैंक खातों से जुड़े वित्तीय साक्ष्य इकट्ठे किए जा रहे हैं, जो आगे की कार्यवाही की दिशा तय करेंगे।