नगर निगम भर्ती घोटाला: तीन बार टालने के बाद पश्चिम बंगाल के मंत्री सुजीत बोस ईडी के सामने पेश
सारांश
Key Takeaways
पश्चिम बंगाल के फायर सर्विसेज मंत्री सुजीत बोस शुक्रवार, 1 मई 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के साल्ट लेक स्थित कार्यालय में पूछताछ के लिए पेश हुए। यह मामला राज्य की नगर पालिकाओं में कथित भर्ती अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप लगाए गए हैं। इससे पहले वे तीन बार ईडी के समन की अनदेखी कर चुके थे।
मुख्य घटनाक्रम
सुजीत बोस को ईडी ने पहले कई बार पूछताछ के लिए समन भेजा था, लेकिन वे तीन बार एजेंसी के सामने उपस्थित नहीं हुए। उस दौरान उन्होंने विधानसभा चुनाव प्रचार में व्यस्तता का हवाला दिया था। इसके बाद उन्होंने राहत के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहाँ से उन्हें चुनाव तक अस्थायी संरक्षण मिला था।
हालाँकि, अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि चुनाव संपन्न होने के पश्चात उन्हें ईडी के समक्ष अनिवार्य रूप से पेश होना होगा। उसी न्यायिक आदेश का पालन करते हुए वे शुक्रवार सुबह अपने वकील के साथ ईडी कार्यालय पहुँचे। मीडिया के सवालों से बचते हुए वे बिना कोई बयान दिए चुपचाप अंदर चले गए।
छापेमारी और पूर्व जाँच
ईडी की जाँच केवल सुजीत बोस तक सीमित नहीं है। राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रथिन घोष का नाम भी इसी भर्ती घोटाले में सामने आया है। अक्टूबर 2023 में ईडी ने रथिन घोष से पूछताछ की थी और उनके आवास पर छापेमारी भी की गई थी।
वहीं, जनवरी 2024 और अक्टूबर 2025 में भी ईडी की टीम ने सुजीत बोस के घर और कार्यालय पर छापे मारे थे। इसके अलावा उनके कुछ करीबी सहयोगियों के ठिकानों की भी तलाशी ली गई थी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
सुजीत बोस तृणमूल कांग्रेस (TMC) से तीन बार विधायक रह चुके हैं। इस बार वे उत्तर 24 परगना जिले की बिधाननगर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं। वहीं रथिन घोष उसी जिले की मध्यमग्राम सीट से प्रत्याशी हैं। दोनों सीटों पर 29 अप्रैल को दूसरे चरण में मतदान हो चुका है।
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सुर्खियों में आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया जारी है और TMC के कई नेता केंद्रीय जाँच एजेंसियों की रडार पर हैं।
आगे क्या होगा
ईडी की पूछताछ के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जाँच एजेंसी किस दिशा में आगे बढ़ती है। यदि साक्ष्य पर्याप्त पाए गए तो गिरफ्तारी या चार्जशीट दाखिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। नगर पालिका भर्ती घोटाले की यह जाँच राज्य की राजनीति पर दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।