राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिमला में सेना प्रशिक्षण कमान मुख्यालय का दौरा किया, ड्रोन व डिजिटलीकरण पर जोर
सारांश
Key Takeaways
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 1 मई 2026 को शिमला स्थित सेना प्रशिक्षण कमान मुख्यालय का दौरा किया — यह वह केंद्र है जहाँ भारतीय सेना के जवानों को आधुनिक और पेशेवर प्रशिक्षण देने की रणनीतियाँ तैयार की जाती हैं। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय सेना तकनीकी आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है।
स्वागत और ब्रीफिंग
राष्ट्रपति के आगमन पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता और सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने उनका औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद राष्ट्रपति को विस्तार से बताया गया कि यह कमान किस प्रकार कार्य करती है और भारतीय सेना को सशक्त बनाने में इसकी क्या भूमिका है।
आधुनिक प्रशिक्षण की दिशा में नए कदम
अधिकारियों ने राष्ट्रपति को अवगत कराया कि आज की ज़रूरतों को देखते हुए पारंपरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ नई तकनीकों को भी सेना में शामिल किया जा रहा है। इसके तहत ड्रोन और मानवरहित विमान संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही 'रेड टीमिंग' जैसी अवधारणा भी अपनाई जा रही है, जिसमें दुश्मन की मानसिकता से सोचकर अपनी कमज़ोरियों को पहचाना और दूर किया जाता है।
इसके अलावा सेना के कामकाज को तेज़ और प्रभावी बनाने के लिए डिजिटलीकरण और ऑटोमेशन पर भी ज़ोर दिया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सैन्य संचालन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर क्षमताओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
कमान की व्यापक भूमिका
राष्ट्रपति को बताया गया कि यह कमान केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है — बल्कि यह युद्ध रणनीतियों के निर्माण, संसाधनों की तैयारी और अन्य देशों की सेनाओं के साथ सहयोग बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस कमान के अंतर्गत देशभर में 32 प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान कार्यरत हैं, जो सेना के जवानों को युद्धकला के कला और विज्ञान दोनों पहलुओं में दक्ष बनाते हैं।
राष्ट्रपति की सराहना और संदेश
कमान की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु ने सेना के अधिकारियों से सीधी बातचीत की और प्रशिक्षण को और उन्नत बनाने के उपायों पर चर्चा की। उन्होंने कमान के सभी अधिकारियों, जवानों और कर्मचारियों की मेहनत और समर्पण की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि सभी को इसी लगन और निष्ठा के साथ कार्य करते रहना चाहिए, ताकि भारतीय सेना हर परिस्थिति में तैयार और सशक्त बनी रहे।
आगे की राह
यह दौरा सैन्य गौरव, आत्मनिर्भरता और विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। गौरतलब है कि सेना प्रशिक्षण कमान अपने 32 प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से भारतीय सेना की पेशेवर क्षमता को लगातार सुदृढ़ कर रही है, और आने वाले समय में इस क्षमता को और विस्तार देने की योजना है।