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झारखंड में जनगणना-2027: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने पोर्टल पर दर्ज की जानकारी, 1 मई से शुरू हुई स्व-गणना प्रक्रिया

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झारखंड में जनगणना-2027: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने पोर्टल पर दर्ज की जानकारी, 1 मई से शुरू हुई स्व-गणना प्रक्रिया

सारांश

झारखंड में जनगणना-2027 महाअभियान की शुरुआत हो गई है — और इस बार यह डिजिटल है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने खुद पोर्टल पर जानकारी दर्ज कर नागरिकों को संदेश दिया कि सही आंकड़े ही भविष्य की योजनाओं की नींव हैं। 1 से 15 मई तक चलेगी स्व-गणना प्रक्रिया।

मुख्य बातें

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने 1 मई 2026 को रांची के लोक भवन में जनगणना-2027 की स्व-गणना प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ किया।
स्व-गणना प्रक्रिया 1 मई से 15 मई 2026 तक चलेगी; नागरिक मोबाइल ओटीपी से ऑनलाइन विवरण दर्ज कर सकेंगे।
पहले चरण में 'मकान सूचीकरण' और 'मकानों की गणना' का कार्य होगा; इसके बाद प्रगणक घर-घर जाकर आंकड़ों की पुष्टि करेंगे।
राज्यपाल ने चेताया कि गलत जानकारी नागरिकों को भविष्य की सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित कर सकती है।
कार्यक्रम में उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री , नगर आयुक्त सुशांत गौरव और मुख्य जनगणना पदाधिकारी प्रभात कुमार उपस्थित रहे।

झारखंड में जनगणना-2027 के महाअभियान का शुभारंभ हो गया है। 1 मई 2026 को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रांची स्थित लोक भवन में 'स्व-गणना' प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत करते हुए स्वयं अपनी व्यक्तिगत और आवासीय जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज की। यह राष्ट्रीय महत्व का पहला डिजिटल जनगणना अभियान है, जिसमें नागरिक मोबाइल ओटीपी के माध्यम से खुद अपना विवरण दर्ज कर सकते हैं।

अभियान का पहला चरण: क्या होगा और कब तक

अधिकारियों के अनुसार, जनगणना-2027 के पहले चरण में मुख्य रूप से 'मकान सूचीकरण' और 'मकानों की गणना' का कार्य किया जाएगा। झारखंड में यह स्व-गणना प्रक्रिया 1 मई से 15 मई 2026 तक चलेगी। इस दौरान नागरिक मोबाइल ओटीपी के आधार पर ऑनलाइन अपना विवरण दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद जनगणना प्रगणक घर-घर पहुँचकर दर्ज आंकड़ों की पुष्टि करेंगे।

राज्यपाल का संदेश: आंकड़ों की ताकत

कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों और मीडिया को संबोधित करते हुए राज्यपाल गंगवार ने कहा कि किसी भी राज्य या राष्ट्र की तरक्की केवल हवा-हवाई दावों से नहीं, बल्कि ठोस और सटीक आंकड़ों के आधार पर तय होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना केवल व्यक्तियों की गिनती नहीं, बल्कि परिवारों की संरचना, रहन-सहन के स्तर, आर्थिक स्थिति और समाज के वास्तविक स्वरूप का व्यापक डेटाबेस है।

राज्यपाल ने आगे कहा कि इन्हीं आंकड़ों को बुनियाद बनाकर सरकारें शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे जैसी महत्वपूर्ण नीतियों और योजनाओं का खाका तैयार करती हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि जब भी जनगणना कर्मी या प्रगणक घर दस्तक दें, तो उन्हें सही और पूरी जानकारी उपलब्ध कराएँ।

गलत जानकारी का खतरा: राज्यपाल की चेतावनी

राज्यपाल गंगवार ने जोर देकर कहा कि नागरिकों द्वारा दी गई एक गलत जानकारी भविष्य की सरकारी योजनाओं के लाभ से उन्हें या उनके क्षेत्र को वंचित कर सकती है। उन्होंने इस अभियान को एक 'राष्ट्रीय यज्ञ' की संज्ञा देते हुए नागरिकों से सही आंकड़ों के रूप में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल शासन को लेकर केंद्र और राज्य सरकारें दोनों गंभीर प्रयास कर रही हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

कार्यक्रम के दौरान रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री, नगर आयुक्त सुशांत गौरव और झारखंड के मुख्य जनगणना पदाधिकारी प्रभात कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इन अधिकारियों ने राज्यपाल को डिजिटल जनगणना प्रक्रिया की तकनीकी बारीकियों से विस्तार से अवगत कराया।

डिजिटल जनगणना: सटीकता और गति का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य इस बार डिजिटल माध्यमों का अधिकतम उपयोग करना है ताकि आंकड़ों में त्रुटि की गुंजाइश न्यूनतम हो और रिपोर्ट शीघ्र तैयार की जा सके। गौरतलब है कि भारत में 2021 में होने वाली जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हो गई थी, और अब 2027 में इसे डिजिटल स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है। यह अभियान झारखंड की जनता के लिए अपने भविष्य को आकार देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कल्याण योजनाओं और परिसीमन प्रक्रिया पर गहरा असर डाल चुकी है। झारखंड का यह डिजिटल शुभारंभ प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन असली चुनौती ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इंटरनेट पहुँच और डिजिटल साक्षरता की है, जहाँ झारखंड की बड़ी आबादी निवास करती है। राज्यपाल का संदेश सही है, पर बिना मज़बूत जमीनी तंत्र के डिजिटल जनगणना का लाभ सीमित रह सकता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में जनगणना-2027 की स्व-गणना प्रक्रिया क्या है?
जनगणना-2027 की स्व-गणना प्रक्रिया में नागरिक मोबाइल ओटीपी के आधार पर ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी व्यक्तिगत और आवासीय जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। झारखंड में यह प्रक्रिया 1 मई से 15 मई 2026 तक चलेगी।
जनगणना-2027 का पहला चरण झारखंड में कब से कब तक चलेगा?
झारखंड में जनगणना-2027 के पहले चरण की स्व-गणना प्रक्रिया 1 मई 2026 से 15 मई 2026 तक चलेगी। इसके बाद जनगणना प्रगणक घर-घर जाकर दर्ज आंकड़ों की पुष्टि करेंगे।
जनगणना में गलत जानकारी देने से क्या नुकसान हो सकता है?
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के अनुसार, गलत जानकारी देने से नागरिक या उनका क्षेत्र भविष्य की सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकता है। जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे की नीतियाँ बनाई जाती हैं।
जनगणना-2027 के पहले चरण में क्या-क्या दर्ज किया जाएगा?
पहले चरण में मुख्य रूप से 'मकान सूचीकरण' और 'मकानों की गणना' का कार्य किया जाएगा। इसमें परिवारों की संरचना, रहन-सहन का स्तर और आर्थिक स्थिति से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी।
भारत की जनगणना 2021 में क्यों नहीं हुई?
भारत में 2021 में होने वाली जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी। अब इसे 2027 में डिजिटल स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें ऑनलाइन स्व-गणना को प्राथमिकता दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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