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JPSC परीक्षाओं में दर्जनों गलतियाँ: झारखंड राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मांगी जवाबदेही, सख्त कार्रवाई के आदेश

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JPSC परीक्षाओं में दर्जनों गलतियाँ: झारखंड राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मांगी जवाबदेही, सख्त कार्रवाई के आदेश

सारांश

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने JPSC की ACF मुख्य परीक्षा और सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में दर्जनों गलतियाँ मिलने पर राजभवन से सख्त पत्र भेजा है। जांच और दोषियों पर कार्रवाई के आदेश के साथ राजभवन ने साफ कहा — भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

मुख्य बातें

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने 1 मई को JPSC अध्यक्ष को पत्र भेजकर परीक्षा गड़बड़ियों पर जांच के आदेश दिए।
ACF मुख्य परीक्षा और सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न-पत्रों में दर्जनों त्रुटियाँ पाई गईं; प्रारंभिक उत्तर-कुंजी में भी कई उत्तर गलत निकले।
झारखंड पात्रता परीक्षा में कई केंद्रों पर प्रश्न-पत्र समय पर नहीं पहुँचे और छपाई इतनी अस्पष्ट थी कि पढ़ना मुश्किल था।
राजभवन ने दोषी अधिकारियों और व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई का आदेश दिया।
भविष्य में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए परीक्षा संचालन प्रक्रिया में सुधारात्मक उपाय अपनाने पर बल दिया गया।

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में सामने आई गंभीर त्रुटियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए आयोग के अध्यक्ष को पत्र भेजकर जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। राजभवन, रांची की ओर से 1 मई को भेजे गए इस पत्र में सहायक वन संरक्षक (ACF) की मुख्य परीक्षा और सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न-पत्रों में दर्जनों गलतियाँ पाए जाने पर गहरी नाराजगी जताई गई है।

क्या हैं आरोप और क्या मिलीं गड़बड़ियाँ

राजभवन के पत्र के अनुसार, JPSC द्वारा आयोजित ACF मुख्य परीक्षा और सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न-पत्रों में दर्जनों गलतियाँ पाई गई हैं। इसके अलावा, आयोग द्वारा जारी की गई प्रारंभिक उत्तर-कुंजी में भी कई उत्तर गलत पाए गए हैं। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि इस प्रकार की त्रुटियाँ न केवल अभ्यर्थियों के बीच भ्रम उत्पन्न करती हैं, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

गौरतलब है कि अप्रैल महीने में आयोजित JPSC सिविल सेवा परीक्षा और सहायक वन संरक्षक परीक्षा के प्रश्न-पत्रों में भारी त्रुटियाँ उजागर हुई थीं। इसके अतिरिक्त, पिछले सप्ताह आयोजित झारखंड पात्रता परीक्षा में भी कुप्रबंधन की चरम स्थिति सामने आई, जहाँ कई परीक्षा केंद्रों पर प्रश्न-पत्र समय पर नहीं पहुँचे और कई जगह प्रश्न-पत्रों की छपाई इतनी अस्पष्ट थी कि अभ्यर्थियों के लिए उन्हें पढ़ पाना भी कठिन था।

राज्यपाल के निर्देश और राजभवन का सख्त संदेश

राज्यपाल गंगवार ने इन गड़बड़ियों को JPSC की साख के लिए अत्यंत चिंताजनक करार दिया है। उन्होंने आयोग को निर्देश दिया है कि सभी प्रकरणों की बारीकी से जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि इन त्रुटियों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और अधिकारियों की पहचान हो। राजभवन ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

राजभवन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। इसके लिए परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया में आवश्यक सुधारात्मक और सतर्कतापूर्ण उपाय अपनाने पर विशेष बल दिया गया है।

अभ्यर्थियों पर असर और उठते सवाल

इन गड़बड़ियों का सीधा असर उन हजारों अभ्यर्थियों पर पड़ा है जिन्होंने महीनों की कड़ी मेहनत के बाद ये परीक्षाएँ दी थीं। गलत प्रश्न-पत्र और त्रुटिपूर्ण उत्तर-कुंजी के कारण उनके परिणाम प्रभावित होने की आशंका है। आलोचकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब JPSC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों — आयोग पहले भी परीक्षा प्रबंधन को लेकर विवादों में रह चुका है।

आगे क्या होगा

राज्यपाल के निर्देश के बाद अब JPSC पर जांच प्रक्रिया शुरू करने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का दबाव है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग किस समय-सीमा में जांच पूरी करता है और प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। राजभवन के इस सख्त रुख से झारखंड में सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करने की माँग और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या इससे परीक्षा प्रबंधन में संरचनात्मक बदलाव आएगा। झारखंड जैसे राज्य में जहाँ सरकारी नौकरी लाखों युवाओं के लिए एकमात्र सहारा है, वहाँ प्रश्न-पत्रों में दर्जनों गलतियाँ और उत्तर-कुंजी में त्रुटियाँ महज प्रशासनिक चूक नहीं — यह लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। बिना स्वतंत्र जांच तंत्र और समयबद्ध जवाबदेही के, यह निर्देश भी पिछले वादों की लंबी सूची में जुड़ने का जोखिम रखता है।
RashtraPress
9 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

JPSC परीक्षाओं में क्या गड़बड़ियाँ पाई गईं?
JPSC की ACF मुख्य परीक्षा और सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न-पत्रों में दर्जनों गलतियाँ पाई गईं और प्रारंभिक उत्तर-कुंजी में भी कई उत्तर गलत निकले। इसके अलावा झारखंड पात्रता परीक्षा में कई केंद्रों पर प्रश्न-पत्र समय पर नहीं पहुँचे और छपाई इतनी खराब थी कि अभ्यर्थी उन्हें पढ़ नहीं पाए।
झारखंड राज्यपाल ने JPSC को क्या निर्देश दिए हैं?
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने JPSC अध्यक्ष को पत्र भेजकर सभी प्रकरणों की बारीकी से जांच कराने, दोषी अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी गलतियाँ न हों इसके लिए परीक्षा संचालन में सुधारात्मक उपाय अपनाने के निर्देश दिए हैं।
इन गड़बड़ियों का अभ्यर्थियों पर क्या असर पड़ेगा?
गलत प्रश्न-पत्र और त्रुटिपूर्ण उत्तर-कुंजी के कारण हजारों अभ्यर्थियों के परिणाम प्रभावित होने की आशंका है। जिन केंद्रों पर प्रश्न-पत्र समय पर नहीं पहुँचे या अस्पष्ट थे, वहाँ के अभ्यर्थियों को परीक्षा में अतिरिक्त कठिनाई का सामना करना पड़ा।
क्या JPSC पहले भी विवादों में रहा है?
हाँ, JPSC पहले भी परीक्षा रद्द करने, नतीजों में देरी और परीक्षा प्रबंधन को लेकर विवादों में रह चुका है। राज्यपाल ने इन ताज़ा गड़बड़ियों को आयोग की साख के लिए अत्यंत चिंताजनक करार दिया है।
आगे JPSC जांच में क्या होगा?
राज्यपाल के निर्देश के बाद JPSC पर जांच शुरू करने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का दबाव है। अभी तक कोई समय-सीमा सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन राजभवन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
राष्ट्र प्रेस
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