JPSC परीक्षाओं में दर्जनों गलतियाँ: झारखंड राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मांगी जवाबदेही, सख्त कार्रवाई के आदेश
सारांश
Key Takeaways
झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में सामने आई गंभीर त्रुटियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए आयोग के अध्यक्ष को पत्र भेजकर जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। राजभवन, रांची की ओर से 1 मई को भेजे गए इस पत्र में सहायक वन संरक्षक (ACF) की मुख्य परीक्षा और सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न-पत्रों में दर्जनों गलतियाँ पाए जाने पर गहरी नाराजगी जताई गई है।
क्या हैं आरोप और क्या मिलीं गड़बड़ियाँ
राजभवन के पत्र के अनुसार, JPSC द्वारा आयोजित ACF मुख्य परीक्षा और सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न-पत्रों में दर्जनों गलतियाँ पाई गई हैं। इसके अलावा, आयोग द्वारा जारी की गई प्रारंभिक उत्तर-कुंजी में भी कई उत्तर गलत पाए गए हैं। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि इस प्रकार की त्रुटियाँ न केवल अभ्यर्थियों के बीच भ्रम उत्पन्न करती हैं, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
गौरतलब है कि अप्रैल महीने में आयोजित JPSC सिविल सेवा परीक्षा और सहायक वन संरक्षक परीक्षा के प्रश्न-पत्रों में भारी त्रुटियाँ उजागर हुई थीं। इसके अतिरिक्त, पिछले सप्ताह आयोजित झारखंड पात्रता परीक्षा में भी कुप्रबंधन की चरम स्थिति सामने आई, जहाँ कई परीक्षा केंद्रों पर प्रश्न-पत्र समय पर नहीं पहुँचे और कई जगह प्रश्न-पत्रों की छपाई इतनी अस्पष्ट थी कि अभ्यर्थियों के लिए उन्हें पढ़ पाना भी कठिन था।
राज्यपाल के निर्देश और राजभवन का सख्त संदेश
राज्यपाल गंगवार ने इन गड़बड़ियों को JPSC की साख के लिए अत्यंत चिंताजनक करार दिया है। उन्होंने आयोग को निर्देश दिया है कि सभी प्रकरणों की बारीकी से जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि इन त्रुटियों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और अधिकारियों की पहचान हो। राजभवन ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
राजभवन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगी। इसके लिए परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया में आवश्यक सुधारात्मक और सतर्कतापूर्ण उपाय अपनाने पर विशेष बल दिया गया है।
अभ्यर्थियों पर असर और उठते सवाल
इन गड़बड़ियों का सीधा असर उन हजारों अभ्यर्थियों पर पड़ा है जिन्होंने महीनों की कड़ी मेहनत के बाद ये परीक्षाएँ दी थीं। गलत प्रश्न-पत्र और त्रुटिपूर्ण उत्तर-कुंजी के कारण उनके परिणाम प्रभावित होने की आशंका है। आलोचकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब JPSC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों — आयोग पहले भी परीक्षा प्रबंधन को लेकर विवादों में रह चुका है।
आगे क्या होगा
राज्यपाल के निर्देश के बाद अब JPSC पर जांच प्रक्रिया शुरू करने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई का दबाव है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग किस समय-सीमा में जांच पूरी करता है और प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। राजभवन के इस सख्त रुख से झारखंड में सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करने की माँग और तेज होने की संभावना है।