अशोक गहलोत ने मजदूर दिवस पर श्रमिकों की दुर्दशा उठाई, पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल को बताया बेमानी

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अशोक गहलोत ने मजदूर दिवस पर श्रमिकों की दुर्दशा उठाई, पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल को बताया बेमानी

सारांश

मजदूर दिवस पर अशोक गहलोत का दोहरा प्रहार — एक तरफ राजस्थान में न्यूनतम मजदूरी न मिलने और सिलिकोसिस की त्रासदी पर सरकार को घेरा, दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल्स को 'बेमानी' करार दे कांग्रेस की चुनावी उम्मीदें जीवित रखीं।

Key Takeaways

अशोक गहलोत ने 1 मई 2026 को जयपुर में श्रमिकों की स्थिति को 'बेहद गंभीर' बताया। राजस्थान को मजदूरी दरों में देश का सबसे निचला राज्य बताया; मुख्यमंत्री को मजदूरी बढ़ाने का पत्र लिखा। पिछली सरकार का गिग वर्कर कानून मौजूदा प्रशासन द्वारा ठंडे बस्ते में डाला गया — आवश्यक नियम अब तक नहीं बने। सिलिकोसिस को 'बेहद नाजुक' स्थिति बताया; खनन क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों की सख्त पालना की माँग। पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल्स को अविश्वसनीय करार दिया — "उनका कोई महत्व नहीं होता।" जाति जनगणना पर 4 मई के बाद आधिकारिक स्पष्टता का इंतजार करने की सलाह।

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 1 मई 2026 को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर जयपुर स्थित अपने सिविल लाइंस आवास पर मीडिया को संबोधित करते हुए देशभर में — और विशेष रूप से राजस्थान में — श्रमिकों की स्थिति को 'बेहद गंभीर' बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मजदूरों को अब भी वैधानिक न्यूनतम मजदूरी तक नसीब नहीं होती। साथ ही उन्होंने पश्चिम बंगाल से जुड़े एग्जिट पोल्स की विश्वसनीयता को सिरे से नकार दिया।

राजस्थान में मजदूरी की स्थिति

गहलोत ने दावा किया कि मजदूरी दरों के मामले में राजस्थान देश के सबसे निचले पायदान पर है। उन्होंने कहा, "यह खेदजनक है। मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर श्रमिकों के बीच सौहार्द और गरिमा को बढ़ावा देने के लिए मजदूरी बढ़ाने का आग्रह किया है।" कांग्रेस नेता ने नोएडा (उत्तर प्रदेश) में हाल ही में हुई श्रमिक अशांति का उल्लेख करते हुए इसे सरकारों और नियोक्ताओं, दोनों के लिए एक 'चेतावनी' करार दिया। उनके अनुसार श्रमिकों का कल्याण सुनिश्चित करना कानूनी और नैतिक, दोनों स्तरों पर अनिवार्य दायित्व है।

गिग वर्कर कानून और मौजूदा सरकार पर आरोप

गहलोत ने अपनी पिछली सरकार द्वारा बनाए गए गिग वर्कर्स (अस्थायी श्रमिक) कानून की चर्चा की और इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया अग्रणी कदम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रशासन इस कानून को लागू करने में विफल रहा है — आवश्यक नियम अब तक नहीं बनाए गए और यह कानून प्रभावी रूप से ठंडे बस्ते में पड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है।

सिलिकोसिस: खनन क्षेत्र में बड़ा संकट

पूर्व मुख्यमंत्री ने सिलिकोसिस की स्थिति को 'बेहद नाजुक' बताते हुए खनन क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि खदान मालिकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि श्रमिक सुरक्षा उपकरण का उपयोग करें और दिशानिर्देशों का पालन हो। गहलोत ने प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में विधवा महिलाओं के उदाहरण देते हुए इस बीमारी के सामाजिक प्रभाव को भी रेखांकित किया। उन्होंने घोषणा की कि वह व्यक्तिगत रूप से ऐसे इलाकों का दौरा करेंगे ताकि जागरूकता फैलाई जा सके और सरकार पर कार्रवाई का दबाव बनाया जा सके।

जाति जनगणना और एग्जिट पोल पर रुख

जाति जनगणना की रिपोर्टों के बारे में पूछे जाने पर गहलोत ने कहा कि 4 मई के बाद आधिकारिक स्पष्टता आने तक इंतजार करना ही उचित होगा, उसके बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचना चाहिए। पश्चिम बंगाल से जुड़े एग्जिट पोल्स पर उन्होंने कहा, "असल में कोई भी एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं करता। कभी-कभी वे सही साबित होते हैं, तो कभी गलत। उनका कोई महत्व नहीं होता।" गौरतलब है कि एग्जिट पोल की विश्वसनीयता पर यह सवाल ऐसे समय उठा है जब कई राज्यों में इनके अनुमान वास्तविक परिणामों से काफी भिन्न रहे हैं।

आगे क्या

गहलोत के अनुसार वे प्रभावित खनन क्षेत्रों का दौरा करेंगे और राज्य सरकार पर मजदूरी वृद्धि तथा गिग वर्कर कानून के क्रियान्वयन के लिए दबाव बनाते रहेंगे। श्रमिक अधिकारों पर यह बहस आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति में केंद्रीय मुद्दा बन सकती है।

Point of View

लेकिन यह भी उतना ही सच है कि उनके अपने कार्यकाल में सिलिकोसिस पीड़ितों की संख्या में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई थी। एग्जिट पोल को 'बेमानी' बताना कांग्रेस की उस परंपरागत रणनीति का हिस्सा है जो प्रतिकूल सर्वेक्षणों को नकारती है — असली परीक्षा मतगणना के दिन होगी।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

अशोक गहलोत ने मजदूर दिवस पर क्या कहा?
गहलोत ने 1 मई 2026 को जयपुर में कहा कि देशभर में और विशेष रूप से राजस्थान में श्रमिकों की स्थिति 'बेहद गंभीर' है और कई मजदूरों को न्यूनतम वैधानिक मजदूरी भी नहीं मिल रही। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री को मजदूरी बढ़ाने के लिए पत्र लिखने की भी जानकारी दी।
राजस्थान का गिग वर्कर कानून क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
गहलोत सरकार ने अपने कार्यकाल में अस्थायी (गिग) श्रमिकों के लिए एक कानून बनाया था जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया था। गहलोत का आरोप है कि मौजूदा सरकार ने इसके लिए आवश्यक नियम नहीं बनाए, जिससे यह कानून प्रभावी रूप से निष्क्रिय पड़ा है।
सिलिकोसिस क्या है और राजस्थान में यह इतनी बड़ी समस्या क्यों है?
सिलिकोसिस एक गंभीर फेफड़ों की बीमारी है जो खनन कार्य के दौरान सिलिका धूल के साँस में जाने से होती है। राजस्थान में बड़े पैमाने पर खनन उद्योग होने के कारण यहाँ के श्रमिक इस बीमारी के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील हैं, और गहलोत के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएँ विधवा हो चुकी हैं।
गहलोत ने पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल को क्यों खारिज किया?
गहलोत ने कहा कि एग्जिट पोल पर कोई भरोसा नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि ये कभी सही होते हैं, कभी गलत। उनके अनुसार इनका कोई महत्व नहीं होता। यह बयान ऐसे समय आया जब पश्चिम बंगाल के एग्जिट पोल में कांग्रेस के लिए प्रतिकूल संकेत बताए जा रहे थे।
जाति जनगणना पर गहलोत का क्या रुख है?
गहलोत ने जाति जनगणना के मुद्दे पर 4 मई के बाद आधिकारिक स्पष्टता आने तक प्रतीक्षा करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उससे पहले किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं होगा।
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