कोलकाता स्ट्रॉन्ग रूम विवाद: BJP नेताओं का ममता बनर्जी पर निशाना, कहा — यह उनका आखिरी कार्यकाल

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कोलकाता स्ट्रॉन्ग रूम विवाद: BJP नेताओं का ममता बनर्जी पर निशाना, कहा — यह उनका आखिरी कार्यकाल

सारांश

कोलकाता ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम विवाद ने राष्ट्रीय राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। BJP के दो केंद्रीय मंत्रियों ने एक साथ ममता बनर्जी पर निशाना साधा — यह संकेत है कि 2026 के बंगाल चुनाव में BJP ने ममता को सीधी चुनौती देने की रणनीति बना ली है।

Key Takeaways

केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा और नित्यानंद राय ने 1 मई 2026 को ममता बनर्जी के स्ट्रॉन्ग रूम धरने की कड़ी आलोचना की। तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं ने कोलकाता ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम के पास ईवीएम छेड़छाड़ की आशंका को लेकर धरना दिया था। BJP नेताओं ने कहा कि यह ममता बनर्जी का बतौर मुख्यमंत्री अंतिम कार्यकाल हो सकता है। उमर अब्दुल्ला ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची में बदलाव की आशंका जताई। नित्यानंद राय ने राज्य में सीमा सुरक्षा पर TMC सरकार के असहयोग को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया।

केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा और नित्यानंद राय ने 1 मई 2026 को कोलकाता ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम विवाद पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया। दोनों नेताओं ने कहा कि बतौर मुख्यमंत्री यह ममता बनर्जी का अंतिम कार्यकाल हो सकता है और इसी बौखलाहट में उन्होंने स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरना दिया।

विवाद की पृष्ठभूमि

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं ने ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम के निकट धरना शुरू किया था। उनका आरोप था कि मतपेटियों के साथ छेड़छाड़ की आशंका है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं इस धरने में शामिल हुईं, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।

नित्यानंद राय के आरोप

केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम पर भरोसा जताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के शासन में आम जनता को हिंसा, गुंडागर्दी और अपराध का सामना करना पड़ा है। राय ने यह भी कहा कि राज्य में दुष्कर्म और हिंसा की घटनाएं सरकार की पहचान बन गई हैं और सीमा सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर राज्य सरकार का असहयोग देश की सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है।

बीएल वर्मा का बयान

नई दिल्ली में केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि चुनावों के दौरान नामांकन प्रक्रिया में एजेंटों की भूमिका अहम होती है और चुनाव आयोग (ECI) द्वारा सभी जानकारियाँ सार्वजनिक की जाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमज़ोर करने और चुनाव आयोग के कामकाज में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही हैं। वर्मा ने कहा,

Point of View

उमर अब्दुल्ला की SIR पर चिंता यह संकेत देती है कि ईवीएम निगरानी का सवाल केवल TMC तक सीमित नहीं — यह विपक्ष की व्यापक बेचैनी है। मुख्यधारा की कवरेज BJP बनाम TMC की बाइनरी में उलझी है, जबकि असली सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता पर्याप्त है।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

कोलकाता ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम विवाद क्या है?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले TMC नेताओं ने कोलकाता में ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम के पास धरना दिया, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हुईं। उनका आरोप था कि मतपेटियों के साथ छेड़छाड़ की आशंका है।
BJP नेताओं ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?
केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा और नित्यानंद राय ने कहा कि ममता बनर्जी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमज़ोर करने और चुनाव आयोग के कामकाज में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह ममता का बतौर मुख्यमंत्री अंतिम कार्यकाल हो सकता है।
उमर अब्दुल्ला ने SIR प्रक्रिया पर क्या कहा?
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पंपोर में कहा कि चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के ज़रिए मतदाता सूची में बदलाव किए जाने की आशंका है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है।
क्या ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी का अधिकार उम्मीदवारों को है?
बीएल वर्मा के अनुसार, चुनाव आयोग कैमरों के माध्यम से पूरी प्रक्रिया की निगरानी सुनिश्चित करता है और सभी जानकारियाँ सार्वजनिक की जाती हैं। उमर अब्दुल्ला ने भी माना कि ममता बनर्जी को निगरानी का अधिकार है, लेकिन SIR प्रक्रिया पर उन्होंने अलग सवाल उठाए।
पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा का मुद्दा क्यों उठाया गया?
केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की TMC सरकार सीमा सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर केंद्र के साथ सहयोग नहीं कर रही है, जिससे देश की सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
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