चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने FCC के दूरसंचार प्रतिबंध पर अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी
सारांश
Key Takeaways
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने शुक्रवार, 1 मई को अमेरिकी संघीय संचार आयोग (FCC) द्वारा परीक्षण, प्रमाणन और दूरसंचार से जुड़े प्रतिबंधात्मक उपायों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका अपनी नीति पर अड़ा रहा, तो बीजिंग अपने उद्यमों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने से नहीं हिचकेगा।
मुख्य घटनाक्रम
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा कि FCC ने प्रौद्योगिकी तटस्थता के स्थापित सिद्धांत को दरकिनार कर राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए बार-बार प्रतिबंध लगाए हैं। प्रवक्ता के अनुसार, ये कदम किसी ठोस तथ्यात्मक आधार पर नहीं टिके हैं और चीन सहित अन्य देशों की कंपनियों व उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार को दर्शाते हैं।
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि इन प्रतिबंधात्मक उपायों से चीन-अमेरिका आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों की मुश्किल से हासिल की गई स्थिरता को गंभीर नुकसान पहुँचता है और दोनों देशों के नेताओं के बीच पहले हुई सहमति का उल्लंघन होता है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर खतरा
मंत्रालय ने आगाह किया कि यदि FCC इन प्रतिबंधों को औपचारिक रूप दे देता है, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे। संचार इलेक्ट्रॉनिक्स और संबंधित क्षेत्रों में वैश्विक औद्योगिक एवं आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता बाधित होगी। साथ ही, वैश्विक औद्योगिक सहयोग और तकनीकी नवाचार पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा।
गौरतलब है कि प्रवक्ता ने यह भी रेखांकित किया कि इन उपायों से स्वयं अमेरिकी उद्योग और उपभोक्ताओं के हित भी प्रभावित होंगे और अमेरिका की अपनी आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा पर भी सवाल उठेंगे।
चीन की माँग और चेतावनी
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका से आग्रह किया कि वह बाजार के नियमों का सम्मान करे और संबंधित प्रतिबंधात्मक उपायों को रद्द करे। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका अपनी जिद पर कायम रहा, तो चीन अपने उद्यमों के कानूनी हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब चीन-अमेरिका व्यापार तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर बना हुआ है।
आगे क्या होगा
फिलहाल FCC इस प्रतिबंधात्मक उपाय पर जनमत संग्रह की प्रक्रिया में है। अंतिम निर्णय से पहले सार्वजनिक टिप्पणियाँ आमंत्रित की जाएंगी। विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद दोनों देशों के बीच तकनीकी और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के व्यापक संघर्ष का हिस्सा है, जो आने वाले महीनों में और तीखा हो सकता है।
(साभार: चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)