गुजरात स्थापना दिवस: PM मोदी ने CM पटेल को लिखा पत्र, बोले — एंटी-इनकंबेंसी अब प्रो-इनकंबेंसी में बदल चुकी है

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गुजरात स्थापना दिवस: PM मोदी ने CM पटेल को लिखा पत्र, बोले — एंटी-इनकंबेंसी अब प्रो-इनकंबेंसी में बदल चुकी है

सारांश

PM मोदी का गुजरात स्थापना दिवस पर CM पटेल को लिखा पत्र महज औपचारिकता नहीं था — यह एक राजनीतिक संदेश था। 1995 से लगातार सत्ता में बने रहने को 'विकास की जीत' बताते हुए मोदी ने एंटी-इनकंबेंसी की धारणा को ही चुनौती दे दी। सवाल यह है कि क्या यह गुजरात मॉडल बाकी राज्यों के लिए वाकई अनुकरणीय है।

Key Takeaways

PM नरेंद्र मोदी ने 1 मई 2026 को गुजरात के 66वें स्थापना दिवस पर CM भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखा। मोदी ने कहा कि 1995 से गुजरात में BJP को लगातार जनसमर्थन मिला है, जो एंटी-इनकंबेंसी को प्रो-इनकंबेंसी में बदलने का उदाहरण है। हाल के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों को उन्होंने राज्य सरकार के विकास कार्यों पर जनता की मुहर बताया। 2019 में सरदार सरोवर बाँध पूरी ऊँचाई पर पहुँचा; वडोदरा में सी-295 विमान और दाहोद में रेल कोच निर्माण का उल्लेख। PM मोदी सोमनाथ मंदिर के पुनः प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने पर गुजरात आएंगे। CM पटेल ने पत्र के लिए आभार जताते हुए कहा कि मोदी का मार्गदर्शन राज्य को 'विकसित भारत' की दिशा में ले जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 मई 2026 को गुजरात के 66वें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को एक विशेष पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि गुजरात ने पूरे देश को यह दिखा दिया है कि राजनीति में एंटी-इनकंबेंसी का रुझान अब प्रो-इनकंबेंसी में बदल सकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विकास को प्राथमिकता देने वाली सरकारों को गुजरात में 1995 से लगातार जनता का समर्थन मिलता रहा है।

स्थापना दिवस और स्थानीय निकाय चुनाव

प्रधानमंत्री ने राज्य के लोगों को गुजरात स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हाल ही में संपन्न स्थानीय निकाय चुनावों के कारण इस बार का स्थापना दिवस विशेष महत्व रखता है। उन्होंने लिखा, ''गुजरात में आए चुनावी नतीजे इस बात का साफ संकेत हैं कि आपकी सरकार ने जनता के हित में राज्य के विकास के लिए जो काम किया है, उसे लोगों ने मंजूरी दी है।''

उन्होंने कहा कि 1995 से उनकी पार्टी को लगातार जनता का समर्थन मिलता रहा है, जिसका मूल कारण जनता की उम्मीदों के अनुसार निरंतर कार्य करना है। इसी राजनीतिक स्थिरता ने, उनके अनुसार, विकास की गति को संभव बनाया।

महा गुजरात आंदोलन और ऐतिहासिक विरासत

प्रधानमंत्री ने गुजरात राज्य के गठन और महा गुजरात आंदोलन में योगदान देने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, ''उनके प्रयास आज भी प्रेरणा देते हैं और यह दिन उनके योगदान को याद करते हुए नए संकल्प लेने का अवसर है।'' उन्होंने गुजरात को 'विविधताओं की धरती' बताया, जहाँ परंपरा, आधुनिकता और उद्यमिता का अनूठा संगम है।

मोदी ने सोमनाथ मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि बार-बार टूटने के बावजूद यह मंदिर हर बार फिर खड़ा हुआ और आज आस्था व संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने यह भी बताया कि वह सोमनाथ मंदिर के पुनः प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गुजरात आएंगे।

बुनियादी ढाँचा और विकास परियोजनाएँ

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद जल और सिंचाई परियोजनाओं में बड़े निर्णय लिए गए और 2019 में सरदार सरोवर बाँध अपनी पूरी ऊँचाई तक पहुँचा। कच्छ और सौराष्ट्र तक नर्मदा का पानी पहुँचाने के प्रयासों के परिणाम हाल के वर्षों में उत्साहजनक रहे हैं।

केंद्र सरकार द्वारा समर्थित प्रमुख परियोजनाओं में उन्होंने वंदे भारत ट्रेन, बुलेट ट्रेन परियोजना, अहमदाबाद मेट्रो, राजकोट एयरपोर्ट और तरंगा हिल-अंबाजी-अबू रोड रेल लाइन का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन परियोजनाओं ने व्यापार और कनेक्टिविटी दोनों को मजबूत किया है।

मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा और समुद्री विकास

मोदी ने कहा कि देश में सबसे अधिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता गुजरात में है और 'मेक इन इंडिया' में राज्य का योगदान अग्रणी है। वडोदरा में सी-295 विमान निर्माण सुविधा और दाहोद में रेल कोच निर्माण परियोजना इसके प्रमुख उदाहरण हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हाल के महीनों में वह स्वयं दो बार सेमीकंडक्टर प्लांट के उद्घाटन के लिए गुजरात आए।

नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उन्होंने कहा कि रिन्यूएबल और सोलर एनर्जी में गुजरात ने बहुत पहले ही दूरदर्शी सोच अपनाई थी। भारत की सबसे लंबी समुद्री तटरेखा गुजरात के पास है और भावनगर को कंटेनर टर्मिनल के रूप में विकसित करने की योजना है। सूरत को हीरा और आभूषण पॉलिशिंग का वैश्विक केंद्र और जामनगर में ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन को वेलनेस क्षेत्र में नई पहचान देने वाला बताया।

मुख्यमंत्री पटेल की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री के पत्र के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा, ''गुजरात राज्य स्थापना दिवस पर आपके प्रेरणादायक संदेश के लिए मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।'' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का गुजरात से गहरा जुड़ाव और 'विकसित भारत' का विजन राज्य को लगातार नई दिशा और ऊर्जा दे रहा है। पटेल ने यह भी कहा कि मोदी के मार्गदर्शन में गुजरात ने बुनियादी ढाँचे, उद्योग, कृषि, शिक्षा और जनकल्याण में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। आने वाले वर्षों में गुजरात के विकास की यह गति और तेज होने की उम्मीद है।

Point of View

प्रति व्यक्ति आय और कृषि संकट जैसे ठोस आँकड़े भी पेश किए जाते। गुजरात का विकास मॉडल निर्विवाद नहीं है — राज्य में आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में असमानता की चिंताएँ लगातार उठती रही हैं। स्थापना दिवस का यह पत्र उत्सव से अधिक एक राजनीतिक घोषणापत्र जैसा प्रतीत होता है।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

गुजरात का 66वाँ स्थापना दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
गुजरात का स्थापना दिवस प्रत्येक वर्ष 1 मई को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1960 में महा गुजरात आंदोलन के बाद गुजरात राज्य का गठन हुआ था। 2026 में यह 66वाँ स्थापना दिवस था।
PM मोदी ने CM पटेल को पत्र में एंटी-इनकंबेंसी के बारे में क्या कहा?
PM मोदी ने कहा कि राजनीति में अक्सर एंटी-इनकंबेंसी की बात होती है, लेकिन गुजरात ने दिखाया है कि विकास पर काम करने वाली सरकारों को लगातार जनसमर्थन मिलता है और यह रुझान प्रो-इनकंबेंसी में बदल जाता है। उन्होंने 1995 से BJP की निरंतर जीत को इसका प्रमाण बताया।
गुजरात में केंद्र सरकार की कौन-सी प्रमुख परियोजनाएँ हैं?
केंद्र सरकार ने गुजरात में वंदे भारत ट्रेन, बुलेट ट्रेन परियोजना, अहमदाबाद मेट्रो, राजकोट एयरपोर्ट और तरंगा हिल-अंबाजी-अबू रोड रेल लाइन जैसी परियोजनाओं को समर्थन दिया है। इसके अलावा वडोदरा में सी-295 विमान निर्माण और दाहोद में रेल कोच निर्माण परियोजना भी शामिल हैं।
सरदार सरोवर बाँध कब अपनी पूरी ऊँचाई तक पहुँचा?
सरदार सरोवर बाँध 2019 में अपनी पूरी ऊँचाई तक पहुँचा। PM मोदी ने अपने पत्र में कहा कि 2014 के बाद जल और सिंचाई परियोजनाओं में बड़े निर्णय लिए गए और कच्छ व सौराष्ट्र तक नर्मदा का पानी पहुँचाने के प्रयासों के अच्छे परिणाम मिले हैं।
PM मोदी सोमनाथ मंदिर के किस अवसर पर गुजरात आएंगे?
PM मोदी ने पत्र में बताया कि वह सोमनाथ मंदिर के पुनः प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गुजरात आएंगे। सोमनाथ मंदिर को उन्होंने गुजरात की अदम्य भावना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया।
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