मेघालय में जनगणना 2027 की स्व-गणना शुरू, 9,000 गणनाकार करेंगे डिजिटल डाटा संग्रह
सारांश
Key Takeaways
मेघालय में 1 मई 2026 को जनगणना 2027 के लिए स्व-गणना प्रक्रिया शुरू हो गई — जो भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना की दिशा में एक निर्णायक कदम है। पूरे राज्य में 9,000 गणनाकारों और पर्यवेक्षकों को तैनात किया जाएगा, जो मोबाइल ऐप और एक केंद्रीय निगरानी पोर्टल के ज़रिए डाटा जुटाएंगे। मेघालय के जनगणना संचालन निदेशक बिस्वजीत पेगु ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह स्वतंत्र भारत की 8वीं और कुल मिलाकर 16वीं जनगणना होगी।
स्व-गणना प्रक्रिया कैसे काम करेगी
नागरिक 1 मई से 15 मई 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं भर सकते हैं। इसके बाद गणनाकार घर-घर जाकर उस जानकारी की पुष्टि करेंगे। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से पारदर्शिता, सटीकता और जनभागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
स्व-गणना अवधि समाप्त होने के बाद 16 मई से 14 जून तक मकान सूचीकरण (एचएलओ) का कार्य किया जाएगा। इस दौरान गणनाकार 33 प्रश्नों वाली एक निर्धारित प्रश्नावली के ज़रिए आवास की स्थिति, संपत्ति और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा डाटा एकत्र करेंगे।
डिजिटल तकनीक और निगरानी प्रणाली
पेगु ने बताया कि पहली बार पूरी प्रक्रिया — गिनती से लेकर डाटा विश्लेषण तक — मोबाइल ऐप और जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (CMMS) पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप से पूरी की जाएगी। गणनाकार और पर्यवेक्षक स्मार्टफोन पर समर्पित ऐप चलाएंगे, जिनमें प्रश्नावली पहले से लोड होगी।
CMMS पोर्टल प्रशिक्षण, निगरानी और एचएलबी क्रिएटर (HLBC) के माध्यम से जियो-कोडेड हाउस लिस्टिंग ब्लॉक बनाने सहित सभी गतिविधियों की देखरेख करेगा। यह डिजिटल बदलाव डाटा की गुणवत्ता बेहतर करने और परिणामों को समय पर जारी करने में सहायक होगा।
प्रशासनिक ढाँचा और कानूनी आधार
मेघालय की प्रशासनिक सीमाओं को जनगणना के लिए 31 दिसंबर 2025 तक स्थिर कर दिया गया है। यह कार्य डिप्टी कमिश्नरों की देखरेख में होगा, जो मुख्य जनगणना अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। पेगु ने यह भी स्पष्ट किया कि यह जनगणना जनगणना अधिनियम 1948 और जनगणना नियम 1990 के प्रावधानों के तहत संचालित होगी।
गौरतलब है कि जनगणना में सभी सामान्य और संस्थागत परिवारों को शामिल किया जाएगा, जबकि विदेशी नागरिकों और राजनयिक कर्मियों को मकान सूचीकरण चरण से बाहर रखा जाएगा।
डाटा सुरक्षा और नागरिक सहभागिता
पेगु ने आश्वासन दिया कि व्यक्तिगत और घरेलू स्तर का डाटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा और केवल समेकित डाटा ही नीति निर्माण के लिए जारी किया जाएगा। एकत्र किए गए मोबाइल नंबरों का उपयोग केवल संचार और सत्यापन के लिए होगा।
मेघालय जनगणना संचालन निदेशालय के संयुक्त निदेशक सुभाशीष चटर्जी ने बताया कि नागरिकों की सहायता के लिए राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 शुरू की गई है, जो जनगणना प्रक्रिया से जुड़े सवालों के जवाब देगी और समस्याओं का समाधान करेगी।
आगे क्या होगा
जनगणना 2027 दो चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में स्व-गणना और मकान सूचीकरण शामिल है, जबकि चरण 2 यानी जनसंख्या गणना फरवरी 2027 के लिए निर्धारित है और इसकी संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 तय की गई है। अधिकारियों ने मीडिया से भी आग्रह किया कि वे सही जानकारी फैलाने और गलतफहमियाँ दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाएँ, ताकि जनगणना 2027 में अधिकतम और सटीक जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके।