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प्रतापगढ़ में 100 साल पुराना मकान ढहा, एक परिवार के 6 लोगों की मौत — दो मासूम बच्चे भी शामिल

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प्रतापगढ़ में 100 साल पुराना मकान ढहा, एक परिवार के 6 लोगों की मौत — दो मासूम बच्चे भी शामिल

सारांश

प्रतापगढ़ के महुली मोहल्ले में रात 2 बजे 100 साल पुराना मकान ढहा — एक ही कमरे में सो रहे परिवार के 7 में से 6 लोगों की मौत, जिनमें 1 वर्ष और 10 महीने के दो शिशु भी शामिल। अकेले बचे अमन श्रीवास्तव ने मलबे से खुद निकलकर मदद की गुहार लगाई।

मुख्य बातें

प्रतापगढ़ के महुली मोहल्ले में 6 अगस्त की रात करीब 2 बजे लगभग 100 साल पुराना जर्जर मकान ढह गया।
एक ही परिवार के 6 सदस्यों की मौत — मृतकों में प्रमोद श्रीवास्तव (60) , पत्नी रीता (55) , बेटा नितिन (25) , बहू माधुरी (23) , पोता माधव (1 वर्ष) और पोता अद्विक (10 महीने) शामिल।
एकमात्र बचे अमन श्रीवास्तव गंभीर रूप से घायल, जिला अस्पताल में उपचाराधीन।
एसी के कारण सातों सदस्य एक ही कमरे में सो रहे थे, जिससे सभी मलबे में दब गए।
सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस, फायर ब्रिगेड और राहत दल ने मलबा हटाकर पीड़ितों को बाहर निकाला।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में 6 अगस्त की देर रात लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच महुली मोहल्ले में एक लगभग 100 साल पुराना जर्जर मकान भरभराकर ढह गया, जिससे एक ही परिवार के 6 सदस्यों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। मृतकों में दो मासूम शिशु भी शामिल हैं। परिवार का एकमात्र बचा सदस्य अमन श्रीवास्तव गंभीर रूप से घायल हैं और फिलहाल जिला अस्पताल में उपचाराधीन हैं।

हादसे का घटनाक्रम

नगर कोतवाली क्षेत्र के महुली मोहल्ले में रात करीब 2 बजे यह दर्दनाक हादसा हुआ। एसी चलने के कारण परिवार के सातों सदस्य एक ही कमरे में सो रहे थे। लगातार बारिश से कमज़ोर हो चुकी पुरानी इमारत की ऊपरी मंजिल का मलबा अचानक नीचे आ गिरा, जिससे सभी सदस्य मलबे में दब गए। सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा के अनुसार, कोतवाली पुलिस स्टेशन को सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें तत्काल मौके पर पहुँचीं, मलबा हटाया और सभी पीड़ितों को जिला अस्पताल पहुँचाया, जहाँ चिकित्सकों ने 6 लोगों को मृत घोषित कर दिया।

मृतकों की पहचान

हादसे में जान गँवाने वालों की पहचान इस प्रकार हुई — प्रमोद श्रीवास्तव (60 वर्ष), उनकी पत्नी रीता श्रीवास्तव (55 वर्ष), बेटा नितिन श्रीवास्तव (25 वर्ष), बहू माधुरी (23 वर्ष), पोता माधव (1 वर्ष) और पोता अद्विक (10 महीने)। एकमात्र जीवित बचे अमन श्रीवास्तव गंभीर रूप से घायल हैं।

बचे युवक की आपबीती

घायल अमन श्रीवास्तव ने बताया, 'जब मेरी नींद खुली, तो मुझे एहसास हुआ कि मैं मलबे के नीचे दबा हुआ हूँ। किसी तरह मैं बाहर निकला और देखा कि परिवार के सभी सदस्य फंसे हुए थे। मैंने पहले खुद उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो पाया, इसलिए मदद के लिए चिल्लाने लगा। हम सभी सात लोग एक ही कमरे में सो रहे थे — मेरे माता-पिता, मेरा छोटा भाई, मेरी पत्नी और हमारे दो छोटे बच्चे। मुझे तो बचा लिया गया, लेकिन वे सभी मारे गए।'

प्रत्यक्षदर्शियों का बयान

पड़ोसन पूनम श्रीवास्तव ने बताया, 'पूरा परिवार सो रहा था, तभी अचानक छत गिर गई। ऊपर की मंजिल का मलबा नीचे की मंजिल पर आ गिरा, जिससे सोते हुए सभी लोग अंदर ही फंस गए। घर के अंदर परिवार के सात सदस्य थे — एक व्यक्ति को जिंदा बचा लिया गया, जबकि दो बच्चों समेत छह अन्य लोगों की मौत हो गई।'

राहत-बचाव और आगे की स्थिति

घटना की सूचना मिलते ही सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा के नेतृत्व में भारी पुलिस बल, फायर ब्रिगेड और राहत-बचाव दल मौके पर पहुँचे। मलबा हटाकर सभी को निकाला गया। हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश में मानसून की बारिश के कारण जर्जर इमारतों के ढहने की घटनाएँ बढ़ रही हैं। प्रशासन से पुरानी और असुरक्षित इमारतों की पहचान कर उचित कार्रवाई की माँग उठ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे हादसे हर मानसून में दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रतापगढ़ में मकान ढहने की घटना कब और कहाँ हुई?
यह हादसा 6 अगस्त की रात करीब 2 बजे प्रतापगढ़ के नगर कोतवाली क्षेत्र के महुली मोहल्ले में हुआ। लगातार बारिश के कारण लगभग 100 साल पुराना जर्जर मकान अचानक ढह गया।
इस हादसे में कितने लोगों की मौत हुई और कौन बचा?
हादसे में एक ही परिवार के 6 सदस्यों की मौत हो गई, जिनमें दो मासूम शिशु — 1 वर्षीय माधव और 10 महीने के अद्विक — भी शामिल हैं। परिवार का एकमात्र सदस्य अमन श्रीवास्तव गंभीर रूप से घायल हैं और जिला अस्पताल में भर्ती हैं।
मृतकों की पहचान क्या है?
मृतकों की पहचान प्रमोद श्रीवास्तव (60 वर्ष), उनकी पत्नी रीता (55 वर्ष), बेटा नितिन (25 वर्ष), बहू माधुरी (23 वर्ष), पोता माधव (1 वर्ष) और पोता अद्विक (10 महीने) के रूप में हुई है।
सभी सदस्य एक ही कमरे में क्यों सो रहे थे?
बताया गया है कि रात को एसी चलने के कारण परिवार के सातों सदस्य एक ही कमरे में एकत्र होकर सो रहे थे। इसी वजह से मकान ढहने पर पूरा परिवार एक साथ मलबे में दब गया।
घटना के बाद राहत-बचाव कार्य कैसे हुआ?
सूचना मिलते ही सीओ सिटी आशुतोष मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस बल, फायर ब्रिगेड और राहत-बचाव टीमें तत्काल मौके पर पहुँचीं। मलबा हटाकर सभी पीड़ितों को जिला अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ 6 लोगों को मृत घोषित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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