ग्वालियर के डबरा में बारिश से कच्चे मकान की छत धंसी, मां-बेटे की मौत; पति व दो बेटियां घायल
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा स्थित जंगीपुरा इलाके में बुधवार रात साढ़े 11 बजे तेज बारिश के दौरान एक दोमंजिला कच्चे मकान की छत अचानक ढह गई, जिससे उसमें सो रहे परिवार के पाँच सदस्य मलबे में दब गए। राहत-बचाव के बाद सभी को डबरा सिविल अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ 2 वर्षीय आदित्य रजक उर्फ गुन्नू और उसकी माँ सीमा रजक (33) की मृत्यु हो गई।
हादसे का घटनाक्रम
बुधवार की देर रात जैसे ही मकान का हिस्सा गिरा, तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुँचे। मलबे में दबे परिवार को देखते ही स्थानीय लोगों ने राहत कार्य शुरू किया और डबरा सिटी पुलिस को सूचित किया। पुलिस की टीम ने मौके पर पहुँचकर स्थानीय लोगों के साथ मिलकर मलबा हटाया और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।
अस्पताल पहुँचने से पहले ही रास्ते में आदित्य ने दम तोड़ दिया, जबकि माँ सीमा का इलाज के दौरान निधन हो गया। घायलों में जागेंद्र रजक (38) और उनकी बेटियाँ वैशाली (5) व रागिनी (8) शामिल हैं, जिनका फिलहाल ग्वालियर में उपचार जारी है।
परिजनों का आरोप — इलाज में लापरवाही
परिजनों ने अस्पताल में इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। पड़ोसी वीरू रजक ने आरोप लगाया कि जब सीमा को अस्पताल लाया गया था, तब उनकी साँसें चल रही थीं। उनके अनुसार, समय पर उचित उपचार मिलता तो सीमा की जान बचाई जा सकती थी।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
हंगामे की सूचना मिलते ही एसडीएम नवकिरण कौर, एसडीओपी सौरभ कुमार और तहसीलदार नवीन भारद्वाज अस्पताल पहुँचे। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी। एसडीएम ने मामले की जाँच कराने, दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया।
परिवार की पृष्ठभूमि
जानकारी के अनुसार जागेंद्र रजक ग्वालियर की एक जूता फैक्ट्री में काम करते हैं और प्रतिदिन ट्रेन से आवागमन करते हैं। उनकी पत्नी सीमा घरों में झाड़ू-पोंछे का काम करती थीं। आर्थिक रूप से कमज़ोर यह परिवार करीब 15 वर्षों से इसी जर्जर मकान में किराये पर रह रहा था।
जागेंद्र के भाई राघवेंद्र रजक ने बताया कि जागेंद्र की दो अन्य बेटियाँ — नैंसी और गौरी — हादसे के समय चाचा के घर पर थीं, जिससे वे सुरक्षित बच गईं। यह हादसा इस बात की याद दिलाता है कि मानसून के दौरान जर्जर कच्चे मकान किस कदर जानलेवा साबित हो सकते हैं।