बांकुड़ा में मिट्टी के मकान ढहे, बुजुर्ग दंपति समेत तीन की मौत; बंगाल में बारिश का कहर जारी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में मंगलवार रात से बुधवार, 2 सितंबर के बीच लगातार बारिश के कारण मिट्टी के दो मकान ढह गए, जिनमें एक बुजुर्ग दंपति समेत तीन लोगों की मौत हो गई। दोनों हादसे अलग-अलग स्थानों पर हुए और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने इनकी पुष्टि की है।
मुख्य घटनाक्रम
पहली घटना सोनामुखी थाना क्षेत्र के कुंडापुष्करिणी गांव में हुई। 76 वर्षीया बेली रुइदास मंगलवार रात अपने मिट्टी के मकान में थीं, जब लगातार बारिश से कमजोर हो चुकी दीवार अचानक ढह गई। जिला प्रशासन के अनुसार, खतरे का अंदेशा होने पर उनका बेटा और बहू घर से बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन बुजुर्ग महिला को समय पर नहीं बचाया जा सका और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
दूसरी घटना सिमलापाल ब्लॉक के कुश्तोरा गांव में बुधवार तड़के हुई। पालकू बास्के और सोमा बास्के नामक बुजुर्ग दंपति अपने घर में सो रहे थे, जब बारिश से कमजोर हुई मिट्टी की दीवार उनके मकान पर गिर पड़ी। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से दोनों को मलबे से निकालकर सिमलापाल ब्लॉक अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
तीनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए बांकुड़ा सम्मिलानी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेजे गए हैं।
आवास योजना पर परिजनों का आरोप
सोनामुखी की घटना में मृत बेली रुइदास के परिजनों का आरोप है कि उन्हें हाल ही में राज्य सरकार की आवास योजना के तहत नया घर बनाने के लिए ₹1.20 लाख मिले थे। परिजनों के अनुसार यह राशि निर्माण कार्य पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी, इसीलिए परिवार को पुराने और जर्जर मिट्टी के मकान में रहना पड़ रहा था। यह आरोप कथित तौर पर लगाया गया है और प्रशासन की ओर से इस पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मौसम की स्थिति और चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के कारण पिछले दो दिनों से कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल के कई जिलों में भारी बारिश हो रही है। विभाग ने बुधवार के लिए पुरुलिया, पश्चिम बर्दवान और बीरभूम जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
गुरुवार से मौसम में कुछ सुधार की संभावना जताई गई है, लेकिन 8 सितंबर तक दक्षिण बंगाल के विभिन्न इलाकों में रुक-रुक कर बारिश जारी रहने की आशंका बनी हुई है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में परिवार अभी भी पुराने और कमजोर मिट्टी के मकानों में रहने को मजबूर हैं। बांकुड़ा जैसे जिलों में मानसून के दौरान ऐसी दुर्घटनाएँ हर साल सामने आती हैं, जो पक्के आवास की पहुँच और सरकारी योजनाओं की पर्याप्तता पर सवाल खड़े करती हैं।
क्या होगा आगे
जिला प्रशासन के अधिकारी प्रभावित परिवारों से संपर्क में हैं। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए आने वाले दिनों में बांकुड़ा और आसपास के जिलों में सतर्कता बरतने की आवश्यकता बनी रहेगी।