3 सितंबर 2026
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नवीन पटनायक और वीके पांडियन के खिलाफ रिवीजन याचिका खारिज, खुर्दा सेशंस कोर्ट का फैसला

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नवीन पटनायक और वीके पांडियन के खिलाफ रिवीजन याचिका खारिज, खुर्दा सेशंस कोर्ट का फैसला

सारांश

भुवनेश्वर की खुर्दा सेशंस कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और वीके पांडियन के खिलाफ सरकारी हेलीकॉप्टर के कथित दुरुपयोग से जुड़ी आपराधिक रिवीजन याचिका खारिज कर दी। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता न तो पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत कर सके, न ही बीएनएसएस 2023 की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन हुआ।

मुख्य बातें

खुर्दा सेशंस कोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को नवीन पटनायक और वीके पांडियन के खिलाफ आपराधिक रिवीजन याचिका खारिज की।
याचिका एसडीजेएम, भुवनेश्वर के 25 मार्च 2026 के आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी।
शिकायतकर्ता सुधीर चरण मोहंती ने आरोप लगाया था कि दोनों नेताओं ने सरकारी खजाने से बिना अनुमति हेलीकॉप्टर यात्राएँ कीं।
सेशंस जज बिरंची नारायण मोहंती ने पाया कि याचिकाकर्ता ने बीएनएसएस 2023 की धारा 173(4) का अनिवार्य पालन नहीं किया और पर्याप्त साक्ष्य नहीं दिए।
याचिकाकर्ता के पास अब उच्च न्यायालय का रुख करने का विकल्प शेष है।

खुर्दा, भुवनेश्वर की सेशंस कोर्ट ने बुधवार, 2 सितंबर 2026 को ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक तथा उनके करीबी सहयोगी एवं पूर्व नौकरशाह वीके पांडियन के खिलाफ दायर आपराधिक रिवीजन याचिका खारिज कर दी। यह याचिका सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से संबंधित थी।

मामले की पृष्ठभूमि

भुवनेश्वर के वकील और समाजसेवी सुधीर चरण मोहंती ने एसडीजेएम, भुवनेश्वर के 25 मार्च 2026 के उस आदेश को चुनौती देते हुए रिवीजन याचिका दायर की थी, जिसमें पटनायक और पांडियन के खिलाफ उनकी मूल शिकायत खारिज कर दी गई थी। मोहंती ने 14 अगस्त 2024 को भुवनेश्वर के कैपिटल पुलिस स्टेशन में प्रारंभिक एफआईआर दर्ज कराई थी।

मुख्य आरोप

शिकायतकर्ता मोहंती ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि पांडियन और पटनायक दोनों ने ओडिशा के सभी जिलों का दौरा किया और सरकारी खजाने से बिना किसी अनुमति या भुगतान के अनेक हेलीकॉप्टर यात्राएँ कीं। आरटीआई से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए उन्होंने कथित तौर पर आरोप लगाया कि इन यात्राओं का खर्च खनन मालिकों, भूमि माफियाओं, रियल एस्टेट संचालकों, गैर-ओडिया ठेकेदारों और अन्य अवैध स्रोतों से उठाया गया था।

याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि कैपिटल पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज ने 19 अगस्त 2024 तक एफआईआर दर्ज नहीं की थी। इसके बाद मोहंती ने कथित तौर पर भुवनेश्वर के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) के समक्ष लिखित एफआईआर प्रस्तुत की, जिसे उनके कार्यालय में स्वीकार भी किया गया। इसके बावजूद, आरोपियों के विरुद्ध कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई।

अदालती प्रक्रिया

इसके पश्चात मोहंती ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत 1 सीसी मामला दायर किया, जिसे एसडीजेएम कोर्ट, भुवनेश्वर ने खारिज कर दिया। शिकायत खारिज होने पर उन्होंने ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाया और सेशंस कोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल की।

सेशंस कोर्ट का निर्णय

खुर्दा के सेशंस जज बिरंची नारायण मोहंती ने एसडीजेएम कोर्ट के 25 मार्च 2026 के आदेश में कोई गैर-कानूनी तत्व नहीं पाया। अपने फैसले में उन्होंने कहा, 'इस प्रकार, ऊपर की गई चर्चा को देखते हुए, यह अदालत इस नतीजे पर पहुँची है कि शिकायतकर्ता/याचिकाकर्ता ने न तो शिकायत याचिका में बताई गई किसी भी दंडात्मक धारा के तहत कोई मामला साबित करने के लिए सबूत पेश किए, न ही शिकायत पेश करने से पहले बीएनएसएस, 2023 की धारा 173(4) का अनिवार्य पालन किया, और न ही उनके पास बीएनएसएस, 2023 की धारा 33 के तहत शिकायत पेश करने का कोई कानूनी अधिकार था।'

आगे की स्थिति

गौरतलब है कि यह मामला ओडिशा की राजनीति में नवीन पटनायक के विरुद्ध दायर कई कानूनी चुनौतियों में से एक रहा है। अदालत के इस फैसले के बाद याचिकाकर्ता के पास उच्च न्यायालय का रुख करने का विकल्प शेष है। इस निर्णय से स्पष्ट होता है कि निचली अदालतें इस मामले में प्रक्रियागत और साक्ष्य संबंधी कमियों को निर्णायक मानती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सवाल भी उठता है कि क्या पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने के आरोपों की स्वतंत्र जाँच हुई — जो मूल शिकायत का एक अहम पहलू था।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खुर्दा सेशंस कोर्ट ने नवीन पटनायक और वीके पांडियन के खिलाफ याचिका क्यों खारिज की?
सेशंस जज बिरंची नारायण मोहंती ने पाया कि याचिकाकर्ता न तो किसी दंडात्मक धारा के तहत मामला साबित करने के लिए सबूत दे सके, न ही बीएनएसएस 2023 की धारा 173(4) का अनिवार्य पालन किया गया। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को बीएनएसएस 2023 की धारा 33 के तहत शिकायत दायर करने का कानूनी अधिकार नहीं था।
सुधीर चरण मोहंती ने पटनायक और पांडियन पर क्या आरोप लगाए थे?
वकील और समाजसेवी सुधीर चरण मोहंती ने आरोप लगाया था कि पटनायक और पांडियन ने ओडिशा के सभी जिलों का दौरा करते हुए सरकारी खजाने से बिना अनुमति हेलीकॉप्टर यात्राएँ कीं। उन्होंने आरटीआई के हवाले से यह भी दावा किया कि इन यात्राओं का खर्च खनन मालिकों, भूमि माफियाओं और अन्य अवैध स्रोतों से उठाया गया।
इस मामले में एफआईआर कब और कहाँ दर्ज हुई थी?
शिकायतकर्ता मोहंती ने 14 अगस्त 2024 को भुवनेश्वर के कैपिटल पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई थी। हालाँकि उनका आरोप है कि इंस्पेक्टर-इन-चार्ज ने 19 अगस्त 2024 तक एफआईआर दर्ज नहीं की, और डीसीपी कार्यालय में शिकायत स्वीकार होने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ कोई एफआईआर नहीं बनी।
एसडीजेएम कोर्ट ने पहले इस मामले में क्या फैसला दिया था?
एसडीजेएम कोर्ट, भुवनेश्वर ने 25 मार्च 2026 को मोहंती की मूल शिकायत खारिज कर दी थी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए मोहंती ने खुर्दा सेशंस कोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल की, जिसे अब सेशंस कोर्ट ने भी खारिज कर दिया है।
अब याचिकाकर्ता के पास क्या कानूनी विकल्प हैं?
सेशंस कोर्ट द्वारा रिवीजन याचिका खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता सुधीर चरण मोहंती के पास ओडिशा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विकल्प शेष है। हालाँकि अदालत ने साक्ष्य और प्रक्रियागत दोनों आधारों पर याचिका खारिज की है, जिससे उच्च न्यायालय में सफलता की संभावना सीमित मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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