NHRC सख्त: इंस्टाग्राम पर CSAM विज्ञापनों पर मेटा की 'पब्लिशर' भूमिका पर उठे सवाल, दो हफ्ते में ATR तलब
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 3 सितंबर 2026 को इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों के ज़रिए बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM/CSEAM) तक पहुँच सुलभ कराने के गंभीर आरोपों का स्वतः संज्ञान लिया। सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) तथा दिल्ली पुलिस से दो सप्ताह के भीतर बिंदुवार एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला BBC वर्ल्ड सर्विस की मीडिया रिपोर्टों से उजागर हुआ, जिनमें आरोप लगाया गया कि इंस्टाग्राम पर 'रेप वीडियो' और 'चाइल्ड वीडियो' जैसे शब्दों का उपयोग कर पेड विज्ञापन प्रकाशित किए गए। ये विज्ञापन उपयोगकर्ताओं को टेलीग्राम चैनलों पर ले जाते थे, जहाँ ऐसी आपत्तिजनक सामग्री बिक्री के लिए उपलब्ध थी। रिपोर्टों के अनुसार, ये विज्ञापन मेटा की समीक्षा प्रणाली से पास हो गए और शिकायत तंत्र के ज़रिए रिपोर्ट किए जाने के बावजूद तब तक सुलभ रहे, जब तक BBC ने इस मामले को विशेष रूप से मेटा के संज्ञान में नहीं लाया।
बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह केवल आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री का मामला नहीं होगा — इसमें बच्चों का यौन शोषण, ऐसी सामग्री की रिकॉर्डिंग, प्रसार, प्रचार, मुद्रीकरण और संभावित संगठित आपराधिक गतिविधि भी शामिल हो सकती है।
मेटा की 'पब्लिशर' बनाम 'इंटरमीडियरी' भूमिका पर केंद्रीय सवाल
NHRC के समक्ष प्रस्तुत सामग्री में मेटा के सिस्टम के स्क्रीनशॉट शामिल हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, ये स्क्रीनशॉट दर्शाते हैं कि मेटा के अपने सिस्टम कंटेंट आइडियाज़, फॉर्मेट, स्लाइड सीक्वेंसिंग, कैप्शन, कॉल-टू-एक्शन, पोस्टिंग शेड्यूल, ऑडियंस एंगेजमेंट रणनीतियाँ और मुद्रीकरण के तरीकों से जुड़े सुझाव सक्रिय रूप से प्रदान करते हैं।
इस पृष्ठभूमि में बेंच ने महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाया है: जब किसी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के अपने सिस्टम सक्रिय रूप से कंटेंट को जेनरेट, मॉडिफाई, क्यूरेट, रिकमेंड, पब्लिश, एम्प्लीफाई या मोनेटाइज़ करते हैं, तो क्या उसकी कानूनी स्थिति को केवल एक निष्क्रिय इंटरमीडियरी के रूप में माना जा सकता है? आयोग ने कहा कि यह निर्धारण प्लेटफ़ॉर्म के नाम पर नहीं, बल्कि उसके वास्तविक संपादकीय और प्रकाशन कार्यों तथा कंटेंट पर उसकी भागीदारी और नियंत्रण की डिग्री पर आधारित होना चाहिए।
कानूनी ढाँचा और जाँच की माँग
NHRC ने पॉक्सो अधिनियम 2012, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और लागू इंटरमीडियरी फ्रेमवर्क के तहत जाँच पर बल दिया है। बेंच ने विशेष रूप से पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा 19 के अंतर्गत अनिवार्य रिपोर्टिंग के अनुपालन पर MeitY से जवाब माँगा है — यह धारा अपराधों की अनिवार्य सूचना देने का प्रावधान करती है। आयोग ने पूछा है कि क्या कथित अपराधों की जानकारी मिलने के बाद मामले को स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) या स्थानीय पुलिस को रिपोर्ट किया गया था।
आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि IT अधिनियम की धारा 79 — जो इंटरमीडियरी को सशर्त सुरक्षा देती है — अपने आप में किसी संस्था को पॉक्सो अधिनियम के तहत उसके दायित्वों से मुक्त नहीं करती। इसके साथ ही बेंच ने सर्वोच्च न्यायालय के 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस बनाम एस. हरीश' मामले में दिए गए फैसले का संज्ञान लिया, जिसमें तत्काल रिपोर्टिंग, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संरक्षण, समन्वित जाँच और बाल पीड़ितों की पहचान, बचाव एवं सुरक्षा पर बल दिया गया था।
मंत्रालयों और पुलिस को निर्देश
MIB से विशेष रूप से यह जाँचने के लिए कहा गया है कि जहाँ मेटा के सिस्टम कंटेंट को जेनरेट, मॉडिफाई, क्यूरेट, रिकमेंड, पब्लिश या एम्प्लीफाई करते हैं, वहाँ क्या मेटा IT नियम 2021 के तहत 'पब्लिशर' या 'ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट के पब्लिशर' के रूप में MIB के नियामक दायरे में आता है। मंत्रालय से यह भी बताने को कहा गया है कि मौजूदा नियामक ढाँचे के तहत मेटा के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जा सकती है।
दिल्ली पुलिस — जिसकी पूर्व में प्रस्तुत रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया गया है — को दो सप्ताह का अतिरिक्त समय देते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त से मामले में की गई कार्रवाई, टेलीग्राम से माँगी या प्राप्त की गई जानकारी और उस जानकारी के आधार पर की गई परिणामी कार्रवाई का विस्तृत विवरण माँगा गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी जवाब बिंदुवार, सामान्य या घुमावदार नहीं, और समकालीन अभिलेखों द्वारा समर्थित होने चाहिए।
आगे क्या होगा
तीनों एजेंसियों — MeitY, MIB और दिल्ली पुलिस — को दो सप्ताह के भीतर विशिष्ट ATR प्रस्तुत करनी है। यह मामला भारत में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की कानूनी जवाबदेही की परिभाषा को नए सिरे से तय कर सकता है — विशेषकर बाल सुरक्षा के संदर्भ में। NHRC की इस सक्रियता से आने वाले हफ्तों में नियामक और संभवतः आपराधिक जाँच दोनों मोर्चों पर ठोस कार्रवाई की अपेक्षा है।