मेरठ लाठीचार्ज: NHRC ने यूपी के DGP और गृह सचिव को नोटिस, 15 दिन में माँगी रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मेरठ में पुलिस लाठीचार्ज और हिरासत में मारपीट के मामले में उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) और गृह सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दोनों वरिष्ठ अधिकारियों से 15 दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई 10 जुलाई को उस शिकायत के आधार पर की गई जो डॉ. अंबेडकर जन कल्याण समिति, भोपाल की ओर से आयोग को भेजी गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड में न्याय की माँग को लेकर आयोजित शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान स्थानीय पुलिस ने कथित तौर पर बिना किसी उकसावे के प्रदर्शनकारियों पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया। शिकायतकर्ता के अनुसार इस कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों को गंभीर शारीरिक चोटें आईं।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हिरासत में लिए गए निहत्थे लोगों की पिटाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं। हालाँकि इन वीडियो की आधिकारिक सत्यता की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
NHRC का संज्ञान और कानूनी आधार
NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि शिकायत में लगाए गए आरोप पहली नज़र में मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला प्रतीत होते हैं।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पुलिस की जवाबदेही और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर बहस तेज़ हो रही है। NHRC का यह कदम संकेत देता है कि आयोग इस मामले को केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि मानवाधिकार के नज़रिए से देख रहा है।
शिकायत में उठाई गई माँगें
शिकायतकर्ता ने आयोग से कई माँगें रखी हैं। इनमें शामिल हैं — पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच; वायरल वीडियो की सत्यता की जाँच कर संबंधित पुलिस अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करना; घायल प्रदर्शनकारियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा, पुनर्वास और कानून के अनुसार आर्थिक मुआवज़ा देना; तथा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक और विभागीय कार्रवाई करना।
उत्तर प्रदेश प्रशासन पर दबाव
आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भी इस मामले की प्रति भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही निर्देश दिया गया है कि मामले से संबंधित रिपोर्ट आयोग को ई-मेल के माध्यम से भी भेजी जाए। यह तीन-स्तरीय नोटिस — DGP, गृह सचिव और मुख्य सचिव — दर्शाता है कि NHRC इस मामले में राज्य सरकार से उच्च स्तरीय जवाबदेही सुनिश्चित करना चाहता है।
आगे क्या होगा
15 दिनों की समयसीमा समाप्त होने के बाद NHRC प्राप्त ATR की समीक्षा करेगा। यदि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई या प्रस्तुत नहीं की गई, तो आयोग आगे की कार्रवाई — जिसमें मुआवज़े की सिफारिश या विशेष जाँच का आदेश शामिल हो सकता है — कर सकता है। इस मामले का परिणाम उत्तर प्रदेश में पुलिस सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत बन सकता है।