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बेंगलुरु में लावारिस वाहनों पर सख्ती: लॉक, टोइंग और फिर नीलामी — जानें पूरी कार्रवाई

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बेंगलुरु में लावारिस वाहनों पर सख्ती: लॉक, टोइंग और फिर नीलामी — जानें पूरी कार्रवाई

सारांश

बेंगलुरु में लावारिस वाहनों पर अब सीधी कार्रवाई — लॉक, टोइंग और नीलामी तक। मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने क्वीन्स रोड से अभियान की शुरुआत की; 1,571 वाहन चिन्हित। एक हफ्ते में न हटाए तो ₹1,000 टोइंग शुल्क और 15 दिन बाद नीलामी।

मुख्य बातें

बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने 10 जुलाई 2026 को क्वीन्स रोड से लावारिस वाहन हटाओ अभियान की शुरुआत की।
यातायात पुलिस ने शहर में 1,571 लावारिस वाहन चिन्हित किए हैं; वास्तविक संख्या अधिक हो सकती है।
वाहन मालिकों को नोटिस के बाद 1 सप्ताह का समय; इस दौरान ₹500 जुर्माने पर वाहन वापस लिया जा सकता है।
समय सीमा बीतने पर टोइंग (शुल्क करीब ₹1,000 ); उसके बाद अखबार में नोटिस और 15 दिन में नीलामी ।
अभियान GBA , बेंगलुरु नगर निगम और यातायात पुलिस संयुक्त रूप से चला रहे हैं।
नागरिक 'अस्त्रम' ऐप के जरिए लावारिस वाहनों की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

कर्नाटक के बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने 10 जुलाई 2026 को बेंगलुरु की सड़कों और फुटपाथों पर लंबे समय से लावारिस खड़े वाहनों के खिलाफ एक विशेष अभियान की शुरुआत की। अभियान का आगाज़ क्वीन्स रोड से हुआ, जहाँ मंत्री ने स्वयं एक लावारिस वाहन पर नोटिस चिपकाया और उसके टायर पर लॉक लगाया। यातायात पुलिस ने अब तक शहर में 1,571 लावारिस वाहनों की पहचान की है, और यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।

अभियान की पृष्ठभूमि और वजह

मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने स्पष्ट किया कि सरकार ने इस अभियान से 15 दिन पहले ही सार्वजनिक सूचना जारी कर वाहन मालिकों को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा, 'लोग अपने पुराने वाहनों को महीनों तक सार्वजनिक सड़कों पर लावारिस छोड़ देते हैं। कई मामलों में हमें यह भी पता नहीं होता कि इन वाहनों के मालिक कौन हैं। जहाँ-तहाँ वाहन छोड़ देना अपराध है।' चेतावनी के बावजूद वाहन न हटाए जाने पर यह अभियान शुरू किया गया। गौरतलब है कि लावारिस वाहनों के कारण पैदल यात्रियों को फुटपाथ का उपयोग करने में भारी कठिनाई हो रही थी और शहर की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही थी।

कार्रवाई की चरणबद्ध प्रक्रिया

अभियान के तहत चिन्हित वाहनों पर नोटिस चिपकाए जाएंगे और मालिकों को वाहन हटाने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। इस अवधि में मालिक ₹500 का जुर्माना भरकर अपना वाहन वापस ले सकते हैं। एक सप्ताह बाद भी वाहन न हटाए जाने पर उन्हें टो किया जाएगा, जिसके लिए टोइंग शुल्क करीब ₹1,000 अतिरिक्त देना होगा। इसके बाद भी यदि वाहन नहीं लिया गया, तो अखबारों में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित किया जाएगा और नोटिस के 15 दिन बाद वाहन की नीलामी कर दी जाएगी — जिसमें कोई भी नागरिक भाग ले सकता है।

लॉक और टोइंग: सख्ती का संदेश

नोटिस चिपकाए गए वाहनों के टायरों पर लॉक भी लगाए गए हैं ताकि मालिक बिना अनुमति के उन्हें वहाँ से न हटा सकें। मंत्री ने चेतावनी दी कि जो लोग कार्रवाई से बचने के लिए लावारिस वाहन को एक सड़क से दूसरी सड़क पर ले जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, 'मैंने पुलिस को निर्देश दिया है कि जो लोग बार-बार ऐसा करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।' फिलहाल दोपहिया, कार और अन्य सभी वाहनों के लिए जुर्माने की राशि समान रखी गई है।

संयुक्त अभियान और नागरिक भागीदारी

यह अभियान ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA), बेंगलुरु नगर निगम और शहर की यातायात पुलिस मिलकर चला रहे हैं। बेंगलुरु दक्षिण नगर निगम ने नो-पार्किंग जोन में टोइंग पहले ही शुरू कर दी है। अब इसे चरणबद्ध तरीके से शहर के अन्य इलाकों में भी लागू किया जाएगा, जिसकी शुरुआत प्रमुख सड़कों से होगी। नागरिकों से अपील की गई है कि वे यातायात पुलिस के 'अस्त्रम' ऐप के जरिए लावारिस वाहनों की जानकारी दें।

आगे क्या होगा

मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल लंबे समय से लावारिस पड़े वाहनों के खिलाफ है — एक-दो दिन के लिए सड़क किनारे खड़े वाहन इसके दायरे में नहीं आते। उन्होंने माना कि शहर में लंबे समय से अनिवार्य ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग नियमों का प्रभावी पालन नहीं कराया गया, इसलिए ऑन-स्ट्रीट पार्किंग पर पूर्ण प्रतिबंध व्यावहारिक नहीं है। यह अभियान बेंगलुरु को अतिक्रमण-मुक्त और पैदल-अनुकूल बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रशासनिक इच्छाशक्ति का अभाव रहा। इस बार चरणबद्ध प्रक्रिया — नोटिस, लॉक, टोइंग, नीलामी — कागज़ पर ठोस दिखती है, पर असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। शहर में अनिवार्य ऑफ-स्ट्रीट पार्किंग नियमों की वर्षों से अनदेखी हुई है, जिसे खुद मंत्री ने स्वीकार किया — यह ईमानदारी सराहनीय है, लेकिन यह भी बताती है कि समस्या की जड़ें नियम-प्रवर्तन की विफलता में हैं। बिना दीर्घकालिक पार्किंग नीति के यह अभियान राहत तो देगा, स्थायी समाधान नहीं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बेंगलुरु में लावारिस वाहन अभियान क्या है?
यह बेंगलुरु सरकार का वह विशेष अभियान है जिसमें सड़कों और फुटपाथों पर लंबे समय से खड़े लावारिस वाहनों को नोटिस, लॉक, टोइंग और अंततः नीलामी के जरिए हटाया जाएगा। अभियान की शुरुआत 10 जुलाई 2026 को क्वीन्स रोड से हुई।
लावारिस वाहन मालिकों को कितना जुर्माना देना होगा?
नोटिस के बाद एक सप्ताह के भीतर वाहन वापस लेने पर ₹500 जुर्माना देना होगा। यदि वाहन टो किया गया तो टोइंग शुल्क करीब ₹1,000 अतिरिक्त देना होगा। फिलहाल दोपहिया, कार और अन्य सभी वाहनों के लिए जुर्माने की राशि समान है।
अगर वाहन मालिक समय पर वाहन नहीं हटाए तो क्या होगा?
एक सप्ताह बाद वाहन टो किया जाएगा। टोइंग के बाद भी न लेने पर अखबारों में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित होगा और 15 दिन बाद वाहन की नीलामी कर दी जाएगी, जिसमें कोई भी नागरिक भाग ले सकता है।
यह अभियान कौन चला रहा है और इसमें नागरिक कैसे भाग लें?
यह अभियान ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA), बेंगलुरु नगर निगम और शहर की यातायात पुलिस मिलकर चला रहे हैं। नागरिक यातायात पुलिस के 'अस्त्रम' ऐप के जरिए लावारिस वाहनों की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
क्या रोज़ाना सड़क किनारे खड़े वाहनों पर भी कार्रवाई होगी?
नहीं। मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान केवल लंबे समय से लावारिस पड़े वाहनों के खिलाफ है — एक-दो दिन के लिए सड़क किनारे खड़े वाहन इसके दायरे में नहीं आते।
राष्ट्र प्रेस
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