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बीदर में आरटीओ की स्कूल वाहनों पर सख्त कार्रवाई: 20 गाड़ियाँ जब्त, ₹8 लाख से अधिक जुर्माना

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बीदर में आरटीओ की स्कूल वाहनों पर सख्त कार्रवाई: 20 गाड़ियाँ जब्त, ₹8 लाख से अधिक जुर्माना

सारांश

बीदर में आरटीओ का स्कूल वाहनों पर शिकंजा — एक सप्ताह में 20 गाड़ियाँ जब्त, ₹8 लाख से अधिक जुर्माना और 117 मामले दर्ज। स्कूल सत्र शुरू होते ही विभाग की यह सख्ती अभिभावकों को राहत दे रही है, लेकिन संचालकों के लिए चुनौती बन गई है।

मुख्य बातें

बीदर आरटीओ ने विशेष अभियान में 20 स्कूल वाहन जब्त किए।
मात्र एक सप्ताह में ₹8,04,728 का जुर्माना वसूला गया।
पूरे बीदर जिले में 117 स्कूल वाहनों के खिलाफ मामले दर्ज।
बिना बीमा, फिटनेस सर्टिफिकेट और रोड टैक्स वाले वाहनों पर सर्वाधिक कार्रवाई।
आरटीओ ने चेतावनी दी — ओवरलोडिंग और अधूरे दस्तावेज़ों पर कोई ढील नहीं।
अभियान आगे कर्नाटक के अन्य जिलों में भी विस्तारित होने की संभावना।

कर्नाटक के बीदर जिले में रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (आरटीओ) ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 15 जून 2026 को एक विशेष अभियान के तहत 20 स्कूल वाहनों को जब्त किया और मात्र एक सप्ताह में ₹8,04,728 का जुर्माना वसूला। अनिवार्य दस्तावेज़ों — बीमा, फिटनेस प्रमाणपत्र और रोड टैक्स — के बिना सड़कों पर उतरने वाले वाहनों के विरुद्ध यह अभियान स्कूल सत्र शुरू होते ही तेज़ कर दिया गया।

अभियान का दायरा और कार्रवाई

आरटीओ अधिकारियों के अनुसार, पूरे बीदर जिले में 117 स्कूल वाहनों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। इस अभियान का नेतृत्व वरिष्ठ मोटर व्हीकल इंस्पेक्टरों ने किया और कई स्थानों पर छापेमारी कर वाहनों की विस्तृत जाँच की गई। बिना वैध बीमा, फिटनेस सर्टिफिकेट और रोड टैक्स वाले वाहनों पर सबसे अधिक कार्रवाई की गई।

आरटीओ की सख्त चेतावनी

आरटीओ ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि बिना वैध परमिट, बीमा और फिटनेस प्रमाणपत्र वाला कोई भी स्कूल वाहन सड़क पर नहीं उतरेगा। ओवरलोडिंग — यानी क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने — पर भी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। विभाग ने सभी स्कूल संचालकों और वाहन ऑपरेटरों को निर्देश दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर वाहन जब्त करने के साथ भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।

अभिभावकों और स्कूल संचालकों की प्रतिक्रिया

इस अभियान से बीदर के अभिभावकों में राहत की लहर देखी जा रही है। कई अभिभावकों ने कहा कि अब बच्चों को स्कूल भेजने में पहले से अधिक भरोसा हो रहा है। हालाँकि कुछ स्कूल संचालकों ने दस्तावेज़ पूरे करने के लिए अतिरिक्त समय माँगा है, जिस पर आरटीओ ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी।

आगे की योजना

आरटीओ विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। आने वाले दिनों में कर्नाटक के अन्य जिलों में भी इसी तरह की जाँच चलाई जा सकती है। विभाग का दीर्घकालिक लक्ष्य पूरे राज्य में स्कूल परिवहन को पूरी तरह नियम-अनुपालक बनाना है, ताकि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि स्कूल सत्र शुरू होने तक ये वाहन बिना दस्तावेज़ों के सड़कों पर क्यों चलते रहे। देशभर में स्कूल वाहन दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण अनफिट और ओवरलोडेड वाहन रहे हैं — फिर भी नवीनीकरण की चूक नियमित रूप से होती है। एक सप्ताह का अभियान तात्कालिक राहत देता है, पर जब तक वार्षिक निरीक्षण को डिजिटल ट्रैकिंग और स्वतः अलर्ट से नहीं जोड़ा जाता, यह चक्र टूटेगा नहीं। कर्नाटक को इस मॉडल को राज्यव्यापी स्थायी तंत्र में बदलने की ज़रूरत है, न कि मौसमी अभियान में।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीदर में आरटीओ ने स्कूल वाहनों पर क्या कार्रवाई की?
आरटीओ ने बीदर जिले में विशेष अभियान चलाकर 20 स्कूल वाहन जब्त किए और एक सप्ताह में ₹8,04,728 का जुर्माना वसूला। 117 वाहनों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं।
किन कारणों से स्कूल वाहनों पर कार्रवाई हुई?
बिना बीमा, फिटनेस सर्टिफिकेट और रोड टैक्स के वाहन चलाना मुख्य कारण रहे। इसके अलावा ओवरलोडिंग और वैध परमिट न होना भी कार्रवाई के आधार बने।
क्या यह अभियान आगे भी जारी रहेगा?
हाँ, आरटीओ ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान निरंतर चलेगा। आने वाले दिनों में कर्नाटक के अन्य जिलों में भी ऐसी ही जाँच चलाई जा सकती है।
स्कूल संचालकों और वाहन ऑपरेटरों को क्या निर्देश दिए गए हैं?
आरटीओ ने सभी स्कूल संचालकों और वाहन ऑपरेटरों को निर्देश दिए हैं कि केवल वैध परमिट, बीमा और फिटनेस प्रमाणपत्र वाले वाहनों का ही उपयोग किया जाए। नियम उल्लंघन पर वाहन जब्ती और भारी जुर्माने की चेतावनी दी गई है।
अभिभावकों पर इस अभियान का क्या असर पड़ा है?
बीदर के अभिभावकों ने इस अभियान का स्वागत किया है और कहा है कि बच्चों को स्कूल भेजने में अब अधिक भरोसा हो रहा है। हालाँकि कुछ स्कूल संचालकों ने दस्तावेज़ पूरे करने के लिए अतिरिक्त समय माँगा है।
राष्ट्र प्रेस
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