क्या बिहार सरकार ने स्कूली वाहनों के लिए सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए?
सारांश
Key Takeaways
- सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन न करने पर सख्त दंड होगा।
- सभी स्कूली वाहनों में GPS और CCTV अनिवार्य हैं।
- ड्राइवर्स के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं।
- स्कूल प्रबंधन को CCTV फुटेज सुरक्षित रखना होगा।
- तेज गति से वाहन चलाने पर जुर्माना होगा।
पटना, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने राज्यभर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े दिशानिर्देश जारी किए हैं।
मंत्री ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और चेतावनी दी कि निर्धारित सुरक्षा मानदंडों का पालन न करने वाले स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिकों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इन उपायों को लागू करने के लिए परिवहन विभाग जनवरी में एक राज्यव्यापी निरीक्षण अभियान शुरू करेगा।
सभी जिला परिवहन अधिकारियों (डीटीओ) को स्कूलों द्वारा संचालित वाहनों की गहन जांच करने का निर्देश दिया गया है।
नए दिशानिर्देशों के अंतर्गत, प्रत्येक स्कूली वाहन में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी), पैनिक बटन, जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए।
स्कूल प्रबंधन को कम से कम 60 दिनों की सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रूप से संग्रहित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
तेज गति से वाहन चलाने से रोकने के लिए, सभी स्कूल बसों में स्पीड कंट्रोलर लगाना अनिवार्य किया गया है, जिससे अधिकतम गति 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित हो जाती है।
कुमार ने बताया कि ड्राइवर्स के लिए भी सख्त नियम बनाए गए हैं। तेज गति से वाहन चलाने, खतरनाक तरीके से वाहन चलाने, या शराब पीकर वाहन चलाने पर एक बार भी जुर्माना लगाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि लाल बत्ती
कुमार ने कहा कि आईपीसी, सीआरपीसी या पीओसीएसओ अधिनियम के तहत दोषी पाए गए किसी भी व्यक्ति को स्कूल वाहन चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। नियुक्ति से पहले ड्राइवर के स्थायी पते और दो करीबी रिश्तेदारों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य है।
परिवहन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, चालकों के पास वैध भारी वाहन (एचएमवी) लाइसेंस होना चाहिए और कम से कम एक वर्ष का ड्राइविंग अनुभव होना चाहिए। सभी स्कूल बसों में प्राथमिक चिकित्सा किट, अग्निशामक यंत्र और परावर्तक टेप लगे होने चाहिए।
इसके अतिरिक्त, सभी दस्तावेज, पंजीकरण प्रमाण पत्र, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र, फिटनेस प्रमाण पत्र और परमिट वैध और अपडेट होने चाहिए।
परिवहन विभाग ने बताया कि इन उपायों का उद्देश्य बिहार भर में स्कूली बच्चों के परिवहन में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।