भारत की पहली बैरियर-लेस टोलिंग प्रणाली: पहले दिन 41,500 वाहन गुजरे, गुजरात के NH-48 पर शुरुआत
सारांश
Key Takeaways
भारत की पहली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोलिंग प्रणाली ने अपने संचालन के पहले ही दिन करीब 41,500 वाहनों की आवाजाही दर्ज की। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 2 मई 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह प्रणाली गुजरात में NH-48 के सूरत-भरूच मार्ग पर स्थित चोरयासी टोल प्लाजा पर शुरू की गई है। यह देश के राजमार्ग टोलिंग ढाँचे में एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है।
प्रणाली कैसे काम करती है
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा लागू इस व्यवस्था के तहत वाहन बिना रुके टोल प्लाजा से गुजर सकते हैं। इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और FASTag आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। बैरियर-लेस ढाँचे में मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम किया गया है, जिससे टोल प्लाजा पर रुकावट पूरी तरह समाप्त होती है।
यह प्रणाली यातायात को सुगम बनाने के साथ-साथ यात्रा समय घटाने, ईंधन की बचत करने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। गौरतलब है कि देश में FASTag की पहुँच 98 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है, जिसने इस तकनीकी संक्रमण को संभव बनाया है।
गडकरी की घोषणा और सरकार का नज़रिया
इस नई प्रणाली की आधिकारिक घोषणा शुक्रवार, 1 मई 2026 को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की। उन्होंने इसे भारत के टोलिंग सिस्टम के डिजिटलीकरण और वैश्विक मानकों के अनुरूप हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
गडकरी ने कहा कि यह व्यवस्था नागरिकों के जीवन को आसान बनाएगी और माल ढुलाई व लॉजिस्टिक्स की तेज एवं कुशल आवाजाही से कारोबार सुगमता को बढ़ावा देगी। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार अप्रैल 2026 से राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क प्लाजा पर पूरी तरह डिजिटल टोल संग्रह व्यवस्था लागू कर चुकी है, जहाँ भुगतान FASTag और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से किया जा रहा है।
उपयोगकर्ताओं के लिए ज़रूरी नियम
NHAI ने हाईवे उपयोगकर्ताओं को अपने FASTag खाते में पर्याप्त बैलेंस बनाए रखने की सलाह दी है। यदि खाते में पर्याप्त राशि नहीं होगी या FASTag अमान्य पाया गया, तो इलेक्ट्रॉनिक नोटिस जारी किया जाएगा और 72 घंटे के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर दोगुना टोल शुल्क लगाया जा सकता है।
यह प्रावधान उन वाहन चालकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो पहली बार इस बैरियर-लेस प्रणाली से गुजरेंगे और जिन्हें पारंपरिक टोल बूथ पर रुककर भुगतान करने की आदत रही है।
आम जनता और लॉजिस्टिक्स पर असर
MLFF प्रणाली के लागू होने से सूरत-भरूच कॉरिडोर पर माल ढुलाई वाहनों की आवाजाही अधिक कुशल होने की उम्मीद है। टोल प्लाजा पर लगने वाले लंबे जाम से ट्रकों और वाणिज्यिक वाहनों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते थे — यह प्रणाली उस समस्या का सीधा समाधान है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह मॉडल सफल रहा तो इसे देश के अन्य प्रमुख राजमार्गों पर भी लागू किया जा सकता है।
आगे की राह
MLFF प्रणाली केंद्र सरकार की आधुनिक, पारदर्शी और यात्रियों के अनुकूल राजमार्ग नेटवर्क बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है। चोरयासी टोल प्लाजा इस बदलाव का पायलट प्रोजेक्ट बन गया है और इसके प्रदर्शन के आधार पर NHAI अन्य टोल प्लाजाओं पर विस्तार की रणनीति तय करेगा। पहले दिन के 41,500 वाहनों के सफल संचालन को सरकार एक उत्साहजनक शुरुआत मान रही है।