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भारत की पहली बैरियर-लेस टोलिंग प्रणाली: पहले दिन 41,500 वाहन गुजरे, गुजरात के NH-48 पर शुरुआत

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भारत की पहली बैरियर-लेस टोलिंग प्रणाली: पहले दिन 41,500 वाहन गुजरे, गुजरात के NH-48 पर शुरुआत

सारांश

भारत के राजमार्ग टोलिंग में नया अध्याय — गुजरात के चोरयासी टोल प्लाजा पर शुरू हुई MLFF बैरियर-लेस प्रणाली ने पहले ही दिन 41,500 वाहनों को बिना रोके गुजारा। ANPR और FASTag तकनीक पर आधारित यह व्यवस्था जाम, ईंधन बर्बादी और उत्सर्जन घटाने का वादा करती है — और देश के बाकी हाईवे नेटवर्क के लिए एक मॉडल बन सकती है।

मुख्य बातें

भारत की पहली MLFF बैरियर-लेस टोलिंग प्रणाली ने पहले दिन 41,500 वाहनों की आवाजाही दर्ज की।
यह प्रणाली गुजरात में NH-48 के सूरत-भरूच मार्ग पर चोरयासी टोल प्लाजा पर लागू की गई है।
ANPR और FASTag तकनीक से वाहन बिना रुके टोल भुगतान कर सकते हैं; FASTag की राष्ट्रीय पहुँच 98% से अधिक।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसे हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर के डिजिटलीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
FASTag में अपर्याप्त बैलेंस या अमान्य टैग पर 72 घंटे में भुगतान न करने पर दोगुना टोल शुल्क लागू होगा।
केंद्र सरकार अप्रैल 2026 से राष्ट्रीय राजमार्गों पर पूरी तरह डिजिटल टोल संग्रह लागू कर चुकी है।

भारत की पहली मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोलिंग प्रणाली ने अपने संचालन के पहले ही दिन करीब 41,500 वाहनों की आवाजाही दर्ज की। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 2 मई 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह प्रणाली गुजरात में NH-48 के सूरत-भरूच मार्ग पर स्थित चोरयासी टोल प्लाजा पर शुरू की गई है। यह देश के राजमार्ग टोलिंग ढाँचे में एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है।

प्रणाली कैसे काम करती है

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा लागू इस व्यवस्था के तहत वाहन बिना रुके टोल प्लाजा से गुजर सकते हैं। इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और FASTag आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। बैरियर-लेस ढाँचे में मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम किया गया है, जिससे टोल प्लाजा पर रुकावट पूरी तरह समाप्त होती है।

यह प्रणाली यातायात को सुगम बनाने के साथ-साथ यात्रा समय घटाने, ईंधन की बचत करने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। गौरतलब है कि देश में FASTag की पहुँच 98 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है, जिसने इस तकनीकी संक्रमण को संभव बनाया है।

गडकरी की घोषणा और सरकार का नज़रिया

इस नई प्रणाली की आधिकारिक घोषणा शुक्रवार, 1 मई 2026 को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की। उन्होंने इसे भारत के टोलिंग सिस्टम के डिजिटलीकरण और वैश्विक मानकों के अनुरूप हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।

गडकरी ने कहा कि यह व्यवस्था नागरिकों के जीवन को आसान बनाएगी और माल ढुलाई व लॉजिस्टिक्स की तेज एवं कुशल आवाजाही से कारोबार सुगमता को बढ़ावा देगी। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार अप्रैल 2026 से राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क प्लाजा पर पूरी तरह डिजिटल टोल संग्रह व्यवस्था लागू कर चुकी है, जहाँ भुगतान FASTag और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से किया जा रहा है।

उपयोगकर्ताओं के लिए ज़रूरी नियम

NHAI ने हाईवे उपयोगकर्ताओं को अपने FASTag खाते में पर्याप्त बैलेंस बनाए रखने की सलाह दी है। यदि खाते में पर्याप्त राशि नहीं होगी या FASTag अमान्य पाया गया, तो इलेक्ट्रॉनिक नोटिस जारी किया जाएगा और 72 घंटे के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर दोगुना टोल शुल्क लगाया जा सकता है।

यह प्रावधान उन वाहन चालकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो पहली बार इस बैरियर-लेस प्रणाली से गुजरेंगे और जिन्हें पारंपरिक टोल बूथ पर रुककर भुगतान करने की आदत रही है।

आम जनता और लॉजिस्टिक्स पर असर

MLFF प्रणाली के लागू होने से सूरत-भरूच कॉरिडोर पर माल ढुलाई वाहनों की आवाजाही अधिक कुशल होने की उम्मीद है। टोल प्लाजा पर लगने वाले लंबे जाम से ट्रकों और वाणिज्यिक वाहनों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते थे — यह प्रणाली उस समस्या का सीधा समाधान है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह मॉडल सफल रहा तो इसे देश के अन्य प्रमुख राजमार्गों पर भी लागू किया जा सकता है।

आगे की राह

MLFF प्रणाली केंद्र सरकार की आधुनिक, पारदर्शी और यात्रियों के अनुकूल राजमार्ग नेटवर्क बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है। चोरयासी टोल प्लाजा इस बदलाव का पायलट प्रोजेक्ट बन गया है और इसके प्रदर्शन के आधार पर NHAI अन्य टोल प्लाजाओं पर विस्तार की रणनीति तय करेगा। पहले दिन के 41,500 वाहनों के सफल संचालन को सरकार एक उत्साहजनक शुरुआत मान रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा पैमाने पर होगी — एक पायलट टोल प्लाजा की सफलता और देशभर के सैकड़ों टोल प्लाजाओं पर क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर है। FASTag की 98% पहुँच एक मजबूत आधार देती है, परंतु ANPR प्रणाली की सटीकता, विवाद निपटान तंत्र और छोटे वाहन चालकों की डिजिटल साक्षरता जैसे सवाल अभी अनुत्तरित हैं। दोगुने शुल्क का प्रावधान उन उपयोगकर्ताओं पर असंगत बोझ डाल सकता है जो तकनीकी खामियों के शिकार हों — यह सुनिश्चित करना NHAI की जिम्मेदारी है कि शिकायत निवारण उतना ही तेज हो जितनी यह टोलिंग प्रणाली।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की MLFF बैरियर-लेस टोलिंग प्रणाली क्या है?
MLFF यानी मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें वाहन बिना रुके टोल प्लाजा से गुजरते हैं और ANPR कैमरे तथा FASTag के जरिए स्वचालित रूप से टोल कट जाता है। भारत में यह पहली बार गुजरात के NH-48 पर चोरयासी टोल प्लाजा पर 2 मई 2026 को शुरू की गई।
चोरयासी टोल प्लाजा पर यह प्रणाली कैसे काम करती है?
ANPR कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़ते हैं और FASTag से जुड़े खाते से स्वचालित रूप से टोल राशि काट ली जाती है। वाहन चालक को रुकने या नकद भुगतान करने की जरूरत नहीं होती, जिससे टोल प्लाजा पर जाम नहीं लगता।
FASTag बैलेंस कम होने पर क्या होगा?
यदि FASTag खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं है या टैग अमान्य है, तो NHAI इलेक्ट्रॉनिक नोटिस जारी करेगा और 72 घंटे के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा। समय पर भुगतान न करने पर दोगुना टोल शुल्क लगाया जा सकता है।
यह प्रणाली देश के बाकी हाईवे पर कब लागू होगी?
फिलहाल चोरयासी टोल प्लाजा एक पायलट प्रोजेक्ट है। NHAI इसके प्रदर्शन के आधार पर अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर विस्तार की रणनीति तय करेगा; हालाँकि अभी तक कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है।
क्या UPI से भी टोल भुगतान किया जा सकता है?
हाँ, केंद्र सरकार अप्रैल 2026 से राष्ट्रीय राजमार्ग टोल प्लाजाओं पर FASTag के साथ-साथ UPI के जरिए भी डिजिटल टोल भुगतान की सुविधा लागू कर चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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