सुप्रिया सुले का स्पष्ट इनकार: NDA में शामिल नहीं होगी NCP (SP), विलय का रास्ता भी बंद
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने 10 जुलाई को मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कर दिया कि उनकी पार्टी का राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने का कोई इरादा नहीं है। महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में कई दिनों से चल रही अटकलों को सीधे खारिज करते हुए उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि NCP के दोनों गुटों के बीच विलय का अध्याय अब बंद हो चुका है।
अटकलों की पृष्ठभूमि
NCP (SP) प्रमुख शरद पवार और डिप्टी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच हाल ही में हुई मुलाकात तथा पार्टी नेता जयंत पाटिल एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े के बीच कथित बैठक की खबरों ने इन चर्चाओं को हवा दी थी। इसके अलावा, कई NCP (SP) विधायकों के पार्टी की दिशा को लेकर असहज होने की खबरों ने भी अटकलों को बल दिया।
सुले का सीधा जवाब
सुले ने दो-टूक शब्दों में कहा, "न तो कोई हमसे बात कर रहा है और न ही हम किसी से बात कर रहे हैं। BJP के साथ गठबंधन का सवाल हमारी चर्चा में आया ही नहीं है।" उन्होंने मीडिया रिपोर्टों को नकारते हुए कहा, "ये खबरें सिर्फ अखबारों और टीवी चैनलों तक ही सीमित हैं।"
लगातार मीडिया की छानबीन को हल्के-फुल्के अंदाज में लेते हुए बारामती सांसद ने अपने पिता से मिली सीख का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "शरद पवार हमेशा कहते हैं कि अगर आपके बारे में चर्चा हो रही है — चाहे अच्छे कारणों से हो या बुरे कारणों से — तो इसका मतलब है कि आपकी राजनीतिक साख अभी भी मजबूत है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिछले कई वर्षों से उनके कथित शपथ ग्रहण समारोहों की खबरें भी बार-बार सामने आती रही हैं।
विधायकों की नाराजगी के दावे खारिज
सुले ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण के उन दावों को भी नकार दिया, जिनमें कुछ NCP (SP) विधायकों के असंतुष्ट होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा, "हमारे सभी सांसद लगातार संपर्क में हैं। हम अक्सर मिलते हैं, रणनीति पर चर्चा करते हैं और पार्टी के भीतर किसी भी तरह की नाराजगी या असंतोष नहीं है।"
NCP विलय का रास्ता बंद
NCP के दोनों गुटों के बीच संभावित पुनर्मिलन पर सुले ने स्पष्ट रुख अपनाया। गौरतलब है कि अजित पवार ने पहले दोनों गुटों के फिर से साथ आने की इच्छा जताई थी। हालाँकि, सुले ने कहा, "वह अध्याय अब बंद हो चुका है। हम अपने रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं और वे अपने रास्ते पर। फिलहाल, NCP के दोनों गुटों के बीच विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं चल रही है।"
संसदीय बैठकें राजनीतिक नहीं
इससे पहले 7 जुलाई को भी सुले ने जयंत पाटिल और विनोद तावड़े की कथित बैठक को अधिक राजनीतिक महत्व देने से इनकार किया था। उन्होंने बताया कि संसदीय समितियों के कामकाज के कारण उनकी भी BJP नेताओं से नियमित मुलाकात होती रहती है। सुले के अनुसार, पिछले एक महीने में उनकी BJP अध्यक्ष समेत विभिन्न समिति सदस्यों से 21 से अधिक बार मुलाकात हुई, और ये सभी बैठकें नियमित प्रशासनिक एवं संसदीय कामकाज का हिस्सा थीं।
सत्ता में वापसी के सवाल पर सुले ने कहा कि उनकी प्राथमिकता जनसेवा है, लेकिन साथ ही आगे कड़े राजनीतिक संघर्ष के संकेत भी दिए। उन्होंने कहा, "अगर मौजूदा सरकार इसी तरह काम करती रही, तो NCP (SP) और उसके सहयोगियों के पास सत्ता में वापसी के लिए कड़ा संघर्ष करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।"