10 जुलाई 2026
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न्यूजीलैंड सांसद परमजीत परमार ने पीएम मोदी के ऑकलैंड दौरे को बताया ऐतिहासिक, भारत-न्यूजीलैंड FTA को सराहा

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न्यूजीलैंड सांसद परमजीत परमार ने पीएम मोदी के ऑकलैंड दौरे को बताया ऐतिहासिक, भारत-न्यूजीलैंड FTA को सराहा

सारांश

न्यूजीलैंड की एसीटी पार्टी सांसद परमजीत परमार ने पीएम मोदी के ऑकलैंड दौरे को दोनों देशों की दोस्ती की नई शुरुआत बताया। भारत-न्यूजीलैंड FTA को बड़ी उपलब्धि और भारत को वैश्विक तकनीकी व आर्थिक नेता करार देते हुए उन्होंने हिंद-प्रशांत में साझा भूमिका पर जोर दिया।

मुख्य बातें

न्यूजीलैंड सांसद परमजीत परमार ने 10 जुलाई 2026 को ऑकलैंड में पीएम मोदी के दौरे को दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
परमार ने भारत-न्यूजीलैंड FTA को एक बड़ी उपलब्धि करार दिया, जो रोजगार और जीवन स्तर बेहतर बनाएगा।
भारतीय समुदाय 100 से अधिक वर्षों से न्यूजीलैंड में योगदान दे रहा है; प्रवासी भारतीय दौरे को लेकर उत्साहित हैं।
परमार ने पिछले 10-15 वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति और वैश्विक नेतृत्व की सराहना की।
भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और UPI को न्यूजीलैंड के साथ तकनीकी सहयोग के लिए महत्वपूर्ण बताया।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता के लिए भारत-न्यूजीलैंड सहयोग को अहम करार दिया।

न्यूजीलैंड की संसद सदस्य परमजीत परमार ने 10 जुलाई 2026 को ऑकलैंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण करार दिया और कहा कि यह यात्रा भारत-न्यूजीलैंड मैत्री को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी। उन्होंने हाल ही में हस्ताक्षरित भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को दोनों देशों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया।

दौरे का महत्व

एसीटी पार्टी की सांसद परमार ने कहा कि भारतीय समुदाय 100 वर्षों से अधिक समय से न्यूजीलैंड में योगदान दे रहा है और प्रवासी भारतीय इस दौरे को लेकर विशेष रूप से उत्साहित हैं। उनके अनुसार, यह दौरा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच एक स्वाभाविक और पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी की शुरुआत है।

परमार ने कहा, 'यह उन महान संबंधों की बस शुरुआत है, जो न्यूजीलैंड और भारत दोनों पक्षों के लिए स्वाभाविक रूप से फायदेमंद होगा।' उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी के लिए यादगार रहेगा।

भारत-न्यूजीलैंड FTA पर प्रतिक्रिया

परमार ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को एक बड़ी कामयाबी बताया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से इस समझौते की पुरजोर समर्थक रही है, क्योंकि FTA प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देकर, रोजगार के अवसर पैदा करके और लागत कम करके दोनों देशों के नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाता है।

गौरतलब है कि यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक व्यापार तनाव चरम पर है और बहुपक्षीय व्यापार ढाँचे कमजोर पड़ रहे हैं। ऐसे में द्विपक्षीय FTA दोनों देशों को आर्थिक स्थिरता प्रदान कर सकता है।

भारत की आर्थिक प्रगति पर नज़रिया

भारतीय मूल की सांसद परमार ने वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल के बावजूद भारत के विकास की सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले 10 से 15 वर्षों में भारत ने जो तरक्की की है, वह अनेक क्षेत्रों में उसे वैश्विक नेता के रूप में स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के व्यक्ति के रूप में यह देखकर उन्हें गर्व होता है।

परमार ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, विशेष रूप से UPI जैसी प्रणालियों की भी प्रशंसा की और कहा कि प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत और न्यूजीलैंड के बीच सहयोग के व्यापक अवसर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक वैश्विक तकनीकी नेता के रूप में उभर रहा है।

भू-राजनीतिक सहयोग की संभावनाएँ

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनावों के संदर्भ में परमार ने कहा कि जैसे-जैसे भारत-न्यूजीलैंड संबंध औपचारिक रूप लेंगे, दोनों सरकारें भू-राजनीतिक मुद्दों पर भी मिलकर काम कर सकती हैं। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने में भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत अपनी विदेश नीति में प्रशांत देशों के साथ संबंध मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक सहयोग के नए आयाम खुलने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि भारत-न्यूजीलैंड FTA कागज़ पर उतरने के बाद व्यवहार में कितना कारगर साबित होता है — खासकर डेयरी, कृषि और श्रम गतिशीलता जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जहाँ दोनों देशों के हित टकरा सकते हैं। भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्विवाद रूप से प्रभावशाली है, पर UPI को न्यूजीलैंड में लागू करना नियामकीय और वित्तीय ढाँचे की जटिलताओं से जुड़ा सवाल है जिसका जवाब अभी नहीं मिला। हिंद-प्रशांत सहयोग की बात तो होती है, पर न्यूजीलैंड की AUKUS से दूरी और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता के बीच तालमेल बिठाना आसान नहीं होगा।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परमजीत परमार कौन हैं और वे किस पार्टी से हैं?
परमजीत परमार न्यूजीलैंड की संसद सदस्य हैं और एसीटी पार्टी से संबद्ध हैं। वे भारतीय मूल की हैं और भारत-न्यूजीलैंड संबंधों को मजबूत करने की पक्षधर रही हैं।
पीएम मोदी का न्यूजीलैंड दौरा क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दौरा भारत-न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित FTA के बाद हो रहा है, जो दोनों देशों के व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को नई दिशा देगा। 100 से अधिक वर्षों से न्यूजीलैंड में बसे भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए भी यह दौरा विशेष महत्व रखता है।
भारत-न्यूजीलैंड FTA से क्या फायदे होंगे?
सांसद परमार के अनुसार, यह FTA प्रतिस्पर्धा बढ़ाकर, रोजगार के अवसर पैदा करके और लागत कम करके दोनों देशों के नागरिकों का जीवन स्तर सुधारेगा। एसीटी पार्टी इस समझौते की शुरू से समर्थक रही है।
भारत और न्यूजीलैंड हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कैसे सहयोग कर सकते हैं?
परमार के अनुसार, जैसे-जैसे द्विपक्षीय संबंध औपचारिक होंगे, दोनों सरकारें हिंद-प्रशांत में स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर सकती हैं। पश्चिम एशिया के बढ़ते तनावों के बीच भारत की भूमिका को वे विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानती हैं।
क्या न्यूजीलैंड में UPI लागू हो सकता है?
परमार ने कहा कि भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर न्यूजीलैंड के लिए आकर्षक है और दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी सहयोग के व्यापक अवसर हैं। हालाँकि, UPI को न्यूजीलैंड में औपचारिक रूप से लागू करने पर कोई ठोस घोषणा अभी तक नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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