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भारत एशिया का राजनीतिक-आर्थिक पावरहाउस: न्यूजीलैंड सांसद फिल ट्वायफोर्ड, मोदी के दौरे पर उत्साह

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भारत एशिया का राजनीतिक-आर्थिक पावरहाउस: न्यूजीलैंड सांसद फिल ट्वायफोर्ड, मोदी के दौरे पर उत्साह

सारांश

40 वर्षों में पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड पहुँच रहे हैं — और ऑकलैंड में स्वागत का स्वर स्पष्ट है। मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और तकनीकी साझेदारी की संभावनाओं के साथ, न्यूजीलैंड के नेता भारत को एशिया के सबसे अहम रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहे हैं।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का न्यूजीलैंड दौरा 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है।
न्यूजीलैंड सांसद फिल ट्वायफोर्ड ने 10 जुलाई को ऑकलैंड में कहा कि भारत एशिया में राजनीतिक और आर्थिक पावरहाउस बन चुका है।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर को दोनों देशों के संबंधों में ऐतिहासिक पड़ाव बताया गया।
राजस्व मंत्री साइमन वॉट्स ने खाद्य निर्यात और बुनियादी ढाँचे में तकनीकी सहयोग को बड़ा अवसर बताया।
ट्वायफोर्ड ने डिजिटल टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी की व्यापक संभावनाएँ रेखांकित कीं।

न्यूजीलैंड के सांसद फिल ट्वायफोर्ड और राजस्व मंत्री साइमन वॉट्स ने 10 जुलाई को ऑकलैंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे का स्वागत करते हुए कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता ऐसे निर्णायक समय पर हुआ है, जब दुनिया तेज़ी से बहुपक्षीय हो रही है। ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड पहुँच रहे हैं — यह 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा है।

भारत को लेकर न्यूजीलैंड सांसद का नज़रिया

सांसद ट्वायफोर्ड ने कहा, 'भारत दुनिया की सबसे ज़रूरी उभरती ताकतों में से एक है। अब हम एक बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय माहौल में रहते हैं — अब सिर्फ एक सुपरपावर नहीं है, कई हैं। और न्यूजीलैंड की विदेश नीति को इस बात के साथ तालमेल बिठाना होगा। इसलिए भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता इस मामले में बहुत सही समय पर हुआ है। हम प्रधानमंत्री के यहाँ आने का स्वागत करते हैं।' उन्होंने जोड़ा कि भारत एशिया में एक राजनीतिक और आर्थिक पावरहाउस के रूप में उभरा है और न्यूजीलैंड को इस साझेदारी से गहरा लाभ होगा।

मुक्त व्यापार समझौते का महत्व

ट्वायफोर्ड ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर को दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा, 'यह न्यूजीलैंड जैसे छोटे देश के लिए भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने का समय है। न्यूजीलैंड के लिए यह गहरा संबंध होना — सिर्फ व्यापारिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि हर तरह के स्तर पर, जिसमें लोगों के बीच जुड़ाव भी शामिल है — हमारे लिए बहुत ज़रूरी है।' गौरतलब है कि यह समझौता ऐसे वक्त में आया है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अमेरिकी नेतृत्व की एकध्रुवीयता कमज़ोर पड़ रही है।

तकनीक और डिजिटल सहयोग पर ज़ोर

ट्वायफोर्ड ने तकनीक और इनोवेशन में सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा, 'न्यूजीलैंड जैसे देश के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने का एक बड़ा फायदा यह है कि हमारे पास कई बड़ी भारतीय फर्म, टेक्नोलॉजी और एक्सपर्टीज तक पहुँच है। हमारी अर्थव्यवस्था को विकसित करने की ज़रूरत के हिसाब से डिजिटल टेक्नोलॉजी सबसे ऊपर है।' उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में दोनों देशों के बीच साझेदारी के व्यापक अवसर हैं।

राजस्व मंत्री वॉट्स और भारतीय समुदाय की प्रतिक्रिया

राजस्व मंत्री साइमन वॉट्स ने कहा, 'न्यूजीलैंड के लिए यह बहुत खास पल है कि वह यहाँ प्रधानमंत्री मोदी की मेजबानी कर पा रहा है। मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होना आपसी संबंधों के लिए एक बड़ा कदम है और यह न्यूजीलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी एक बड़ा कदम है।' वॉट्स ने व्यापार की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि न्यूजीलैंड एक खाद्य-उत्पादक देश है और भारत को खाद्य निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि अपेक्षित है। साथ ही, भारत से न्यूजीलैंड में बड़े बुनियादी ढाँचे के प्रोजेक्ट्स के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और इंजीनियरिंग क्षमता का आना एक बड़ा अवसर है।

भारतीय समुदाय के लिए ऐतिहासिक क्षण

न्यूजीलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय के एक सदस्य ने कहा, 'यह बहुत खास है। ऐसा 40 साल बाद हुआ है, जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड जा रहा है। यह भारतीय समुदाय के लिए एक शानदार मौका है।' उन्होंने टैरिफ को दोनों देशों के बीच व्यापार का सबसे बड़ा निर्धारक बताते हुए कहा कि मुक्त व्यापार समझौते से आम लोगों को दोनों देशों की सेवाओं और उत्पादों तक सुलभ पहुँच मिलेगी। यह दौरा दोनों देशों के बीच एक नए रणनीतिक अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ में भी पढ़ा जाना चाहिए — अमेरिकी व्यापार नीति की अनिश्चितता के बीच न्यूजीलैंड जैसे छोटे निर्यात-निर्भर देश के लिए भारत जैसे विशाल बाज़ार से जुड़ना रणनीतिक अनिवार्यता बन गई है। मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा प्रतीकात्मक रूप से मज़बूत है, लेकिन असली परीक्षा टैरिफ संरचना, बाज़ार पहुँच की शर्तों और कृषि उत्पादों पर भारत की संवेदनशीलता में होगी। 40 वर्षों के राजनयिक अंतराल के बाद यह दौरा संबंधों को रीसेट करने का अवसर है, पर दीर्घकालिक साझेदारी की गहराई इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष व्यापार के परे — रक्षा, शिक्षा और प्रवासी समुदाय — पर कितनी ठोस प्रगति करते हैं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री मोदी का न्यूजीलैंड दौरा क्यों ऐतिहासिक है?
यह 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा है। इस दौरे के दौरान भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होना इसे द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय बनाता है।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते से क्या फायदा होगा?
इस समझौते से न्यूजीलैंड का भारत को खाद्य निर्यात बढ़ेगा और भारत से न्यूजीलैंड में बुनियादी ढाँचे के प्रोजेक्ट्स के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और इंजीनियरिंग क्षमता का प्रवाह होगा। राजस्व मंत्री साइमन वॉट्स के अनुसार टैरिफ में कमी से दोनों देशों के नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
न्यूजीलैंड सांसद फिल ट्वायफोर्ड ने भारत के बारे में क्या कहा?
सांसद ट्वायफोर्ड ने कहा कि भारत एशिया में एक राजनीतिक और आर्थिक पावरहाउस के रूप में उभरा है और बहुपक्षीय होती दुनिया में न्यूजीलैंड की विदेश नीति के लिए भारत के साथ गहरी साझेदारी अनिवार्य है। उन्होंने डिजिटल टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में सहयोग को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया।
न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय के लिए यह दौरा क्यों अहम है?
भारतीय समुदाय के सदस्यों के अनुसार 40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड आना उनके लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। मुक्त व्यापार समझौते से दोनों देशों के बीच उत्पादों और सेवाओं की आसान पहुँच सुनिश्चित होगी, जिसका सीधा असर प्रवासी भारतीयों के जीवन पर पड़ेगा।
भारत-न्यूजीलैंड के बीच तकनीकी सहयोग की क्या संभावनाएँ हैं?
सांसद ट्वायफोर्ड के अनुसार भारत की बड़ी तकनीकी फर्मों और विशेषज्ञता तक पहुँच न्यूजीलैंड की डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में सहायक होगी। दोनों देशों के बीच डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में साझेदारी के व्यापक अवसर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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