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PM मोदी का न्यूजीलैंड दौरा: 40 साल बाद ऐतिहासिक यात्रा, पूर्व सांसद महेश बिंद्रा बोले — 'प्रवासी भारतीयों के लिए गर्व का क्षण'

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PM मोदी का न्यूजीलैंड दौरा: 40 साल बाद ऐतिहासिक यात्रा, पूर्व सांसद महेश बिंद्रा बोले — 'प्रवासी भारतीयों के लिए गर्व का क्षण'

सारांश

40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड दौरा — और ऑकलैंड में प्रवासी भारतीय समुदाय इसे महज़ एक राजनयिक यात्रा नहीं मान रहा। पूर्व सांसद महेश बिंद्रा के लिए यह FTA, व्यापार और 'भारत' नाम की आधिकारिक पहचान का संगम है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया के बाद न्यूजीलैंड जाएंगे — यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 40 वर्षों में पहली न्यूजीलैंड यात्रा होगी।
न्यूजीलैंड के पूर्व सांसद एवं न्यूजीलैंड-भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष महेश बिंद्रा ने यात्रा को 'सम्मान और गर्व का क्षण' बताया।
बिंद्रा ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर प्रगति की उम्मीद जताई और भारत में 'इज ऑफ डुइंग बिजनेस' सुधारों की सराहना की।
बिंद्रा के अनुसार, आधिकारिक स्तर पर 'भारत' नाम का प्रयोग पहली बार विदेश में हुआ — जिसे वे विशेष उपलब्धि मानते हैं।
ऑकलैंड में प्रवासी भारतीय समुदाय मोदी के स्वागत के लिए उत्साहित है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद न्यूजीलैंड पहुँचने वाले हैं — और यह यात्रा किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 40 वर्षों में पहली न्यूजीलैंड यात्रा होगी। ऑकलैंड में बसे प्रवासी भारतीय समुदाय में इस अवसर को लेकर उत्साह का माहौल है। न्यूजीलैंड के पूर्व सांसद एवं न्यूजीलैंड-भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष महेश बिंद्रा ने इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों के लिए निर्णायक मोड़ बताया है।

40 साल बाद ऐतिहासिक अवसर

बिंद्रा ने कहा, 'हमारे लिए सम्मान का विषय है कि 40 साल बाद हमारे देश के कोई पीएम न्यूजीलैंड पधार रहे हैं। प्रवासी भारतीयों का यहाँ बड़ा परिवार है और सभी में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।' उन्होंने इस यात्रा को महज एक राजनयिक भेंट नहीं, बल्कि दशकों की प्रतीक्षा का परिणाम बताया। गौरतलब है कि न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के लोगों की संख्या लगातार बढ़ी है और वे वहाँ की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

भारत-न्यूजीलैंड व्यापार और FTA पर उम्मीदें

बिंद्रा ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर विशेष ज़ोर दिया। उनके अनुसार, 'एफटीए का लंबे समय से इंतजार था, और मुझे उम्मीद है कि इस दिशा में अब और प्रगति होगी।' उन्होंने कहा कि एफटीए की दिशा में हुई प्रगति ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को और मजबूत किया है। पिछले 10 से 15 वर्षों में भारत में 'इज ऑफ डुइंग बिजनेस' में हुए सुधारों का श्रेय देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में कारोबार करना अब पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है, जिससे व्यापार और निवेश के नए अवसर उभरे हैं।

'भारत' नाम का आधिकारिक प्रयोग — गर्व का क्षण

बिंद्रा ने एक और पहलू की ओर ध्यान दिलाया जिसे वे विशेष महत्व देते हैं। उन्होंने दावा किया कि 'पहली बार भारत के बाहर आधिकारिक स्तर पर किसी दूसरे देश में भारत को 'भारत' कहकर संबोधित किया गया है।' उन्होंने इसे भारतीय पहचान की स्वीकृति के रूप में रेखांकित किया और बताया कि उनके संगठन का नाम भी न्यूजीलैंड-भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज रखा गया है।

प्रवासी समुदाय की भूमिका और द्विपक्षीय संबंध

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और न्यूजीलैंड के बीच शिक्षा, प्रौद्योगिकी और कृषि क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने की कोशिशें चल रही हैं। बिंद्रा के अनुसार, 'पिछले कई सालों से संबंध सुधरते चले जा रहे हैं; मैं समझता हूँ मैत्री और भी गाढ़ी हो जाएगी।' प्रवासी भारतीय समुदाय इस दौरे को केवल एक सरकारी भेंट के रूप में नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक और आर्थिक उपस्थिति की स्वीकृति के रूप में देख रहा है।

आगे क्या

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से भारत-न्यूजीलैंड के बीच FTA वार्ता को नई गति मिलने की उम्मीद है। व्यापार, निवेश और शिक्षा के क्षेत्र में ठोस समझौतों की संभावना पर दोनों पक्षों की नज़रें टिकी हैं। बिंद्रा जैसे प्रवासी नेताओं की सक्रियता यह संकेत देती है कि इस यात्रा के दीर्घकालिक कूटनीतिक और आर्थिक परिणाम हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी FTA वार्ता में ठोस प्रगति होगी — जो वर्षों से अधर में लटकी है। प्रवासी समुदाय का उत्साह स्वाभाविक है, पर यह देखना होगा कि यह यात्रा व्यापार और निवेश के मोर्चे पर कोई बाध्यकारी प्रतिबद्धता लाती है या केवल भावनात्मक कूटनीति तक सीमित रहती है। 'भारत' नाम के आधिकारिक प्रयोग का दावा सांकेतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे सत्यापित करने की ज़रूरत है। दोनों देशों के बीच संबंध वास्तव में तभी 'गाढ़े' होंगे जब FTA, शिक्षा और प्रौद्योगिकी में ठोस समझौते सामने आएं।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी न्यूजीलैंड कब जा रहे हैं और यह यात्रा क्यों खास है?
PM मोदी ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद न्यूजीलैंड जाएंगे। यह यात्रा इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि किसी भारतीय प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड दौरा 40 वर्षों में पहली बार हो रहा है।
महेश बिंद्रा कौन हैं और उन्होंने मोदी की यात्रा पर क्या कहा?
महेश बिंद्रा न्यूजीलैंड के पूर्व सांसद और न्यूजीलैंड-भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष हैं। उन्होंने इस यात्रा को प्रवासी भारतीयों के लिए 'सम्मान और गर्व का क्षण' बताया और FTA में प्रगति की उम्मीद जताई।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की क्या स्थिति है?
भारत-न्यूजीलैंड FTA पर वार्ता लंबे समय से जारी है। बिंद्रा के अनुसार, इस दिशा में हुई प्रगति ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास को मजबूत किया है और मोदी की यात्रा से इसे नई गति मिलने की उम्मीद है।
न्यूजीलैंड में प्रवासी भारतीय समुदाय की क्या भूमिका है?
न्यूजीलैंड में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं जो वहाँ की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और राजनीति में सक्रिय हैं। ये समुदाय भारत-न्यूजीलैंड द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में सेतु की भूमिका निभाता है।
बिंद्रा ने 'भारत' नाम के आधिकारिक प्रयोग को लेकर क्या दावा किया?
बिंद्रा ने दावा किया कि पहली बार भारत के बाहर आधिकारिक स्तर पर किसी दूसरे देश में भारत को 'भारत' कहकर संबोधित किया गया है। उन्होंने इसे भारतीय पहचान की स्वीकृति के रूप में रेखांकित किया, हालाँकि इस दावे का स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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