10 अगस्त 2026
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भारत-न्यूजीलैंड एफटीए पर हस्ताक्षर: PM मोदी बोले — 'ऐतिहासिक पल, विकास के खुलेंगे नए रास्ते'

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भारत-न्यूजीलैंड एफटीए पर हस्ताक्षर: PM मोदी बोले — 'ऐतिहासिक पल, विकास के खुलेंगे नए रास्ते'

सारांश

दशकों की बातचीत के बाद भारत और न्यूजीलैंड ने ऐतिहासिक एफटीए पर हस्ताक्षर किए। PM मोदी ने इसे किसानों, युवाओं और एमएसएमई के लिए बड़ा अवसर बताया। न्यूजीलैंड की 20 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता और 1.4 अरब की भारतीय बाज़ार तक पहुँच — यह दोनों देशों के लिए 'पीढ़ी में एक बार' का मौका है।

मुख्य बातें

भारत और न्यूजीलैंड के बीच 27 अप्रैल 2026 को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर हुए।
PM नरेंद्र मोदी ने इसे दोनों देशों की साझेदारी में ऐतिहासिक पल बताया।
न्यूजीलैंड ने 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई — कृषि, विनिर्माण, नवाचार और प्रौद्योगिकी में।
समझौते से भारत के किसानों, युवाओं, महिलाओं, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और कारीगरों को लाभ मिलने की उम्मीद।
न्यूजीलैंड PM क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे 'पीढ़ी में एक बार होने वाला समझौता' करार दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अप्रैल 2026 को भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि यह दोनों देशों की विकास साझेदारी को अभूतपूर्व गति देगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए मोदी ने इस समझौते को दोनों देशों के साझा भरोसे और महत्वाकांक्षा का प्रतीक बताया।

समझौते में क्या है खास

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस एफटीए से भारत के किसानों, युवाओं, महिलाओं, एमएसएमई, कारीगरों, स्टार्टअप्स, छात्रों और इनोवेटर्स को सीधा लाभ मिलेगा। उनके अनुसार यह समझौता नए अवसर पैदा करेगा और विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के तालमेल को और गहरा करेगा। उल्लेखनीय है कि न्यूजीलैंड ने 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जो कृषि, विनिर्माण, नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत करेगी।

न्यूजीलैंड के PM का बयान

न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने 'एक्स' पर लिखा,

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या 20 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता ज़मीन पर उतरती है या केवल घोषणापत्र बनकर रह जाती है। भारत के पिछले एफटीए — विशेषकर आसियान और दक्षिण कोरिया के साथ — व्यापार घाटे को लेकर आलोचना झेल चुके हैं। न्यूजीलैंड जैसी कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था के साथ समझौते में घरेलू डेयरी और कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले असर का विस्तृत मूल्यांकन सार्वजनिक नहीं किया गया है, जो पारदर्शिता की कमी दर्शाता है। सुर्खियाँ उत्साहजनक हैं — परंतु क्रियान्वयन की बारीकियाँ तय करेंगी कि यह ऐतिहासिक समझौता वास्तव में किसके लिए और कितना फायदेमंद साबित होता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए क्या है?
भारत और न्यूजीलैंड के बीच 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) एक द्विपक्षीय व्यापार करार है, जो दोनों देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेश की आवाजाही को सुगम बनाएगा। इसमें न्यूजीलैंड द्वारा 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता भी शामिल है।
इस समझौते से भारत को क्या फायदा होगा?
PM मोदी के अनुसार, इस एफटीए से भारत के किसानों, युवाओं, महिलाओं, एमएसएमई, कारीगरों, स्टार्टअप्स, छात्रों और इनोवेटर्स को सीधा लाभ मिलेगा। कृषि, विनिर्माण, नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।
न्यूजीलैंड ने कितने निवेश की प्रतिबद्धता जताई है?
न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जो कृषि, विनिर्माण, नवाचार और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में किया जाएगा।
न्यूजीलैंड के PM क्रिस्टोफर लक्सन ने इस डील को क्या बताया?
क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे 'पीढ़ी में एक बार होने वाला समझौता' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह न्यूजीलैंड के निर्यातकों को 1.4 अरब लोगों तक पहले कभी नहीं हुई पहुँच देता है और खेतों, बगीचों व स्थानीय समुदायों में रोज़गार व समृद्धि लाएगा।
भारत-न्यूजीलैंड एफटीए की बातचीत कब शुरू हुई थी?
लक्सन के अनुसार, एक साल से थोड़ा अधिक समय पहले उनकी PM मोदी से भारत में मुलाकात हुई थी, जिसके बाद दोनों देश एफटीए पर बातचीत शुरू करने पर सहमत हुए। दशकों तक इसे असंभव माना जाता रहा, लेकिन 27 अप्रैल 2026 को इस पर हस्ताक्षर हो गए।
राष्ट्र प्रेस
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