PM मोदी का ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड दौरा: हिंद-प्रशांत रणनीति, FTA और ₹1.66 लाख करोड़ निवेश पर फोकस
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की विदेश यात्रा के तहत इंडोनेशिया के बाद ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर जा रहे हैं। 6 जुलाई 2026 को नई दिल्ली से शुरू हुई यह यात्रा भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति, द्विपक्षीय व्यापार विस्तार और प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ संबंध मजबूत करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में क्वाड साझेदारी और हिंद-प्रशांत विजन केंद्र में रहेंगे, जबकि न्यूजीलैंड में हाल ही में हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को धरातल पर उतारने की प्राथमिकता होगी।
ऑस्ट्रेलिया दौरा: क्वाड, शिक्षा और समुदाय
यह प्रधानमंत्री मोदी का ऑस्ट्रेलिया का तीसरा दौरा है। वे 12 साल के अंतराल के बाद मेलबर्न जा रहे हैं — उनका पिछला मेलबर्न दौरा नवंबर 2014 में हुआ था, जबकि ऑस्ट्रेलिया का अंतिम दौरा मई 2023 में था। इस यात्रा की एक उल्लेखनीय बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल सैम मोस्टिन एसी तय प्रोटोकॉल से हटकर स्वयं मेलबर्न आकर प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करेंगी, जिसे दोनों देशों के परिपक्व और घनिष्ठ संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी 2026 भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम को संबोधित करेंगे, जो दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति देने का मंच बनेगा। शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ी प्रगति हुई है — फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी भारत में कैंपस खोलने की अनुमति पाने वाली सबसे नई ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय बनी है, जिसके साथ अब कुल 8 ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस स्थापित करने की मंजूरी मिल चुकी है।
ऑस्ट्रेलिया में लगभग 10 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो वहाँ का सबसे तेज़ी से बढ़ता बड़ा प्रवासी समुदाय है। प्रधानमंत्री मोदी एक बड़े सामुदायिक कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगे, जो इस समुदाय की द्विपक्षीय संबंधों में भूमिका को रेखांकित करेगा।
न्यूजीलैंड दौरा: 40 साल बाद ऐतिहासिक यात्रा
प्रधानमंत्री मोदी का न्यूजीलैंड दौरा 40 वर्षों के अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा होगी। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हाल ही में हस्ताक्षर हो चुके हैं।
वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2.25 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹18,700 करोड़) का है। FTA और लगभग शुल्क-मुक्त व्यावसायिक माहौल के साथ इसमें तेज़ वृद्धि की संभावना है। दोनों देश 2030 तक वस्तु और सेवा व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य बना रहे हैं। उल्लेखनीय है कि FTA प्रावधान के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹1.66 लाख करोड़) के निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।
कृषि, नवाचार और खेल सहयोग
न्यूजीलैंड अपनी जीडीपी का लगभग 1.5 प्रतिशत अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर खर्च करता है और डेयरी, कृषि तथा हाई परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स में उसकी विशेषज्ञता विश्वस्तरीय मानी जाती है। न्यूजीलैंड भारत में कीवी फ्रूट एक्शन प्लान, एप्पल और नाशपाती एक्शन प्लान तथा हनी एक्शन प्लान लॉन्च करने की प्रक्रिया में है। इसके साथ ही नगालैंड और उत्तराखंड में कीवी फ्रूट के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जा रहे हैं। खेल के क्षेत्र में भी जॉइंट एक्शन प्लान के ज़रिए सहयोग पर चर्चा जारी है।
प्रवासी भारतीय और आर्थिक विविधीकरण
न्यूजीलैंड में 3 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो वहाँ की राजनीति, अर्थव्यवस्था और व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह दौरा उनके योगदान को सम्मानित करने का अवसर भी होगा। गौरतलब है कि एकल बाज़ार पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए न्यूजीलैंड अपनी आर्थिक साझेदारियों में विविधता लाने का इच्छुक है, और भारत इस दृष्टि से एक स्वाभाविक और आकर्षक भागीदार के रूप में उभरा है।
भू-राजनीतिक महत्व
यह यात्रा भारत की व्यापक इंडो-पैसिफिक रणनीति का हिस्सा है। ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड साझेदारी को और मज़बूत करने के साथ-साथ यह दौरा छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (Small Island Developing States) के लिए नए अवसर और समृद्धि लाने की प्रतिबद्धता को भी दोहराएगा। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं और भारत की भूमिका एक अहम संतुलनकारी शक्ति के रूप में स्थापित हो रही है।