भारत-न्यूजीलैंड FTA पर हस्ताक्षर: PM मोदी बोले — 'ऐतिहासिक पल', न्यूजीलैंड की $20 अरब निवेश प्रतिबद्धता
सारांश
Key Takeaways
- 27 अप्रैल 2026 को भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आधिकारिक हस्ताक्षर हुए।
- PM नरेंद्र मोदी ने इसे "ऐतिहासिक पल" बताया; कहा — किसानों, युवाओं, MSME, स्टार्टअप्स और महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा।
- न्यूजीलैंड ने $20 अरब के निवेश की प्रतिबद्धता जताई — कृषि, विनिर्माण, नवाचार और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में।
- न्यूजीलैंड के PM क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे "एक पीढ़ी में एक बार होने वाला समझौता" करार दिया।
- यह समझौता न्यूजीलैंड के निर्यातकों को 1.4 अरब की भारतीय आबादी तक पहुँच देता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 अप्रैल 2026 को भारत और न्यूजीलैंड के बीच हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को "ऐतिहासिक पल" करार दिया और कहा कि यह समझौता दोनों देशों की विकास साझेदारी को अभूतपूर्व गति देगा। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे "एक पीढ़ी में एक बार होने वाला समझौता" बताया, जो न्यूजीलैंड के निर्यातकों को 1.4 अरब की भारतीय आबादी तक पहले कभी नहीं हुई पहुँच देगा।
समझौते की मुख्य बातें
मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लक्सन की पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए कहा कि यह FTA दोनों देशों के बीच "गहरे भरोसे, साझा मूल्यों और महत्वाकांक्षा" को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से किसानों, युवाओं, महिलाओं, MSME, कारीगरों, स्टार्टअप्स, छात्रों और इनोवेटर्स को सीधा लाभ मिलेगा। यह समझौता विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के तालमेल को और गहरा करेगा।
न्यूजीलैंड की $20 अरब निवेश प्रतिबद्धता
मोदी ने विशेष रूप से न्यूजीलैंड की $20 अरब (लगभग ₹1.67 लाख करोड़) के निवेश की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया, जो कृषि, विनिर्माण, नवाचार और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत करेगी। उनके अनुसार, इससे दोनों देशों के लिए "एक अधिक समृद्ध और गतिशील भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा।"
दशकों की कोशिशों के बाद सफलता
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने एक्स पर लिखा, "एक साल से थोड़ा ज़्यादा समय पहले मैं भारत में प्रधानमंत्री मोदी से मिला था। तब हम इस बात पर सहमत हुए थे कि हम एक मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करेंगे। दशकों तक, कई लोगों ने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता, लेकिन आज उस डील पर साइन हुए।" गौरतलब है कि भारत-न्यूजीलैंड के बीच FTA की कोशिशें कई दशकों से चल रही थीं, जो बार-बार अटकती रहीं।
आम जनता और उद्योग पर असर
लक्सन ने कहा कि इस समझौते का अर्थ है "खेतों और बगीचों में ज़्यादा नौकरियाँ, स्थानीय समुदाय में ज़्यादा पैसा आना और परिवारों के लिए आगे बढ़ने के ज़्यादा मौके।" यह ऐसे समय में आया है जब भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय MSME और कृषि निर्यातकों के लिए न्यूजीलैंड के बाज़ार तक नई पहुँच व्यापार संतुलन में सुधार ला सकती है।
आगे क्या
दोनों देशों के बीच इस FTA के क्रियान्वयन की समय-सीमा और क्षेत्रीय विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। उद्योग जगत और व्यापार संगठनों की नज़र अब इस पर होगी कि टैरिफ रियायतें और बाज़ार पहुँच की शर्तें किस रूप में लागू होती हैं।