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40 साल बाद न्यूजीलैंड में PM मोदी: 'किया ओरा मोदी' कार्यक्रम में 10 हजार से अधिक लोग होंगे शामिल

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40 साल बाद न्यूजीलैंड में PM मोदी: 'किया ओरा मोदी' कार्यक्रम में 10 हजार से अधिक लोग होंगे शामिल

सारांश

40 साल के अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड दौरा — और यह महज़ एक राजनयिक भेंट नहीं है। एफटीए पर हस्ताक्षर के ठीक बाद हो रही इस यात्रा में ऑकलैंड के 3 लाख से अधिक प्रवासी भारतीयों का उत्साह बता रहा है कि यह दौरा कूटनीति से कहीं आगे, पहचान और गौरव का क्षण भी है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा 40 वर्षों में किसी भारतीय PM की पहली न्यूजीलैंड यात्रा होगी।
ऑकलैंड के स्पार्क अरीना में 'किया ओरा मोदी' कार्यक्रम में 10 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद।
अप्रैल 2026 में हस्ताक्षरित एफटीए के तहत 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने और 15 वर्षों में $20 अरब निवेश का लक्ष्य।
वर्तमान भारत-न्यूजीलैंड द्विपक्षीय व्यापार लगभग $2.25 अरब अमेरिकी डॉलर ।
न्यूजीलैंड में 3 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने वर्तमान विदेश दौरे के अंतिम पड़ाव पर न्यूजीलैंड पहुँचेंगे — और यह यात्रा ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि पिछले 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह न्यूजीलैंड की पहली यात्रा होगी। ऑकलैंड के भारतीय प्रवासी समुदाय में इस दौरे को लेकर उत्साह चरम पर है, और अप्रैल 2026 में हस्ताक्षरित भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के बाद यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों में नया अध्याय जोड़ने वाली मानी जा रही है।

किया ओरा मोदी: ऐतिहासिक स्वागत की तैयारी

प्रधानमंत्री के सम्मान में ऑकलैंड के स्पार्क अरीना में 'किया ओरा मोदी' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। आयोजकों को उम्मीद है कि इसमें 10 हजार से अधिक लोग शामिल होंगे। गौरतलब है कि 'किया ओरा' माओरी भाषा का अभिवादन-शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'स्वस्थ रहें' होता है और इसे 'नमस्ते' या 'धन्यवाद' के समकक्ष भी माना जाता है। इस कार्यक्रम का नाम भारतीय और न्यूजीलैंड की सांस्कृतिक विरासत के मेल का प्रतीक है।

प्रवासी भारतीयों की आवाज़

ऑकलैंड के एडेन टेरेस स्थित महात्मा गांधी सेंटर — जो न्यूजीलैंड की राजधानी का सबसे बड़ा भारतीय सांस्कृतिक एवं सामुदायिक केंद्र है — पर जुटे प्रवासी भारतीयों ने इस दौरे पर अपनी भावनाएँ साझा कीं।

केंद्र स्थित राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी ने कहा, 'जन्मभूमि और कर्मभूमि होती हैं। एक यशोदा माँ हमारा लालन-पालन कर रही हैं। देवकी भारत है। प्रधानमंत्री वहाँ से आ रहे हैं। तो हमारी सभ्यता और संस्कृति का प्रसार होगा जिससे हमारा सम्मान और बढ़ेगा।'

विहार वाघेला ने कहा, 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद पीएम मोदी का आना सकारात्मक है। इससे बिजनेस करने वालों को यकीनन फायदा हो रहा है। 4 दशक बाद भारत के प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड आगमन हो रहा है — हम लोग खासे उत्साहित हैं। भारतीय और कीवी दोनों के लिए अच्छा है।'

न्यूजीलैंड में व्यवसाय कर रहे एक प्रवासी भारतीय ने कहा, 'एफटीए हमारे लिए उम्मीद लेकर आया है। अब एफटीए पर हस्ताक्षर के बाद पीएम आ रहे हैं तो लगता है और भी कुछ अच्छा होगा। हम चाहते हैं कि भारत भी अलग-अलग देशों में जाकर अपने हुनर का प्रदर्शन करे। सच कहूँ तो पीएम मोदी ने हमारा मान पूरी दुनिया में बढ़ाया है।'

मनोज पटियाल ने कहा कि पूरा भारतीय समुदाय उत्साहित है। 'सभी लोगों की योजना है कि उन्हें पास से देखना है और उनकी बातों को सुनना है। प्रधानमंत्री ने पूरी दुनिया में हम भारतीयों को गौरव करने का मौका दिया है।'

एफटीए और आर्थिक सहयोग का नया अध्याय

अप्रैल 2026 में भारत और न्यूजीलैंड ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग $2.25 अरब अमेरिकी डॉलर का है। एफटीए के तहत दोनों देशों ने 2030 तक वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके अतिरिक्त, अगले 15 वर्षों में भारत में $20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का प्रावधान भी इस समझौते में शामिल है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक व्यापार विविधीकरण की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है और प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करना चाहता है।

भारतीय समुदाय की भूमिका और आगे की राह

न्यूजीलैंड में 3 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो वहाँ की राजनीति, अर्थव्यवस्था और व्यापार जगत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री का यह दौरा भारतीय समुदाय के योगदान को सम्मान देने के साथ-साथ दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को और प्रगाढ़ करने का अवसर बनेगा। यह यात्रा भारत की 'प्रवासी कूटनीति' के व्यापक ढाँचे का हिस्सा है, जिसमें विदेश में बसे भारतीयों को सॉफ्ट पावर के वाहक के रूप में देखा जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

रणनीति है; व्यापार समझौते को जनसमर्थन और प्रवासी कूटनीति से पुख्ता करने का प्रयास। हालाँकि, $20 अरब के निवेश लक्ष्य और व्यापार दोगुना करने के वादे की असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — और 3 लाख प्रवासी भारतीयों का उत्साह राजनीतिक पूँजी तो दे सकता है, पर संस्थागत ढाँचे की जगह नहीं ले सकता।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा ऐतिहासिक क्यों मानी जा रही है?
यह पिछले 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की पहली यात्रा है। यह दौरा अप्रैल 2026 में हस्ताक्षरित भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के तुरंत बाद हो रहा है, जो इसे कूटनीतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
'किया ओरा मोदी' कार्यक्रम क्या है और यह कहाँ होगा?
'किया ओरा मोदी' प्रधानमंत्री के स्वागत में ऑकलैंड के स्पार्क अरीना में आयोजित होने वाला सामुदायिक कार्यक्रम है, जिसमें 10 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। 'किया ओरा' माओरी भाषा का अभिवादन-शब्द है जिसका अर्थ 'नमस्ते' या 'स्वस्थ रहें' होता है।
भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से क्या फायदे होंगे?
अप्रैल 2026 में हस्ताक्षरित इस समझौते के तहत 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने और अगले 15 वर्षों में भारत में $20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का लक्ष्य है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग $2.25 अरब अमेरिकी डॉलर का है।
न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय कितना बड़ा है?
न्यूजीलैंड में 3 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो वहाँ की राजनीति, अर्थव्यवस्था और व्यापार जगत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह समुदाय प्रधानमंत्री के दौरे को अपनी पहचान और सम्मान के नज़रिए से भी देख रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा किस बड़े विदेश दौरे का हिस्सा है?
न्यूजीलैंड प्रधानमंत्री मोदी के वर्तमान विदेश दौरे का अंतिम पड़ाव है। इस दौरे का विवरण स्रोत में पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन न्यूजीलैंड यात्रा इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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