ई-25 पेट्रोल जल्द लागू होने की खबरें गलत, केंद्र सरकार ने किया खंडन; ई-20 ही रहेगा मानक
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 7 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि ई-25 पेट्रोल को निकट भविष्य में लागू किए जाने की खबरें निराधार हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, फिलहाल ई-20 से अधिक एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है, और यदि भविष्य में ऐसा कोई कदम उठाया जाता है तो वह पूरी तरह वैज्ञानिक परीक्षण और तकनीकी सत्यापन पर आधारित होगा। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया पर उच्च एथेनॉल मिश्रण से वाहनों के माइलेज और प्रदर्शन पर असर पड़ने की चर्चाएँ तेज हो गई थीं।
ई-20 की स्थिति और व्यापक उपयोग
सरकारी सूत्रों ने कहा कि ई-20 पेट्रोल को लेकर आम उपभोक्ताओं को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। यह ईंधन पिछले ढाई वर्षों से अधिक समय से व्यापक परीक्षण और मूल्यांकन के बाद देशभर में उपयोग में है। रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान में देश में करीब 20 करोड़ पेट्रोल-चालित दोपहिया वाहन और लगभग 20 लाख पेट्रोल-आधारित चारपहिया वाहन एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को देश में चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है।
सरकार का 10-सूत्रीय स्पष्टीकरण
जुलाई 2026 की शुरुआत में केंद्र सरकार ने एथेनॉल मिश्रण को लेकर 10 बिंदुओं का विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया था। इसमें कहा गया कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) पूरी तरह वैज्ञानिक अध्ययनों, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और नियामकीय सुरक्षा मानकों पर आधारित है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ई-20 कोई नया या अप्रयुक्त ईंधन नहीं है — दुनिया के कई देशों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन दशकों से सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो रहा है।
पानी की खपत पर भ्रामक दावों का खंडन
सरकार ने उस दावे को भी गलत करार दिया जिसमें कहा गया था कि एक लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होता है। सरकार के अनुसार, आधुनिक एथेनॉल डिस्टिलरी में एक लीटर एथेनॉल तैयार करने के लिए केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त, अधिकांश इकाइयों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक अपनाई जा रही है, जिससे पानी का पुनर्चक्रण सुनिश्चित होता है।
मक्के की बढ़ती भूमिका और किसानों को लाभ
सरकार के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन में मक्के की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है और वर्तमान में एथेनॉल आपूर्ति का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मक्के से तैयार किया जा रहा है। धान की तुलना में मक्के की खेती में कम सिंचाई की आवश्यकता होती है, और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भी बढ़ाया गया है। साथ ही, एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल वही अतिरिक्त अनाज इस्तेमाल किया जाता है जो देश की खाद्य सुरक्षा जरूरतें पूरी होने के बाद उपलब्ध होता है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि ई-25 की दिशा में कोई भी कदम तभी उठाया जाएगा जब वाहन निर्माताओं की तकनीकी तैयारी और ईंधन आपूर्ति श्रृंखला दोनों पुख्ता हों। फिलहाल सरकार की प्राथमिकता ई-20 के सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाना है।