ई20 एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पूरी तरह सुनियोजित, सभी पक्षकारों से वर्षों की चर्चा के बाद लागू: पूर्व बीपीसीएल निदेशक
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार का ई20 एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम एक सुनियोजित और बहु-वर्षीय परामर्श प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें तेल विपणन कंपनियाँ, एथेनॉल उत्पादक, ऑटोमोबाइल उद्योग, वैज्ञानिक और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन जैसे सभी प्रमुख पक्षकार शामिल रहे हैं। यह दावा भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के पूर्व निदेशक (रिफाइनरी) आर. रामचंद्रन ने 5 जुलाई 2026 को मुंबई में दिए एक विशेष साक्षात्कार में किया।
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और क्रियान्वयन
रामचंद्रन ने स्पष्ट किया कि ई20 कार्यक्रम को लागू करने से पहले तकनीकी, परिचालन और नीतिगत — तीनों पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा, 'ई20 एथेनॉल मिश्रण पहल एक अच्छी तरह से सोची-समझी और कई सालों तक चली प्रक्रिया रही है, जिसमें सभी पक्षकार — तेल कंपनियाँ, एथेनॉल बनाने वाली कंपनियाँ, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री, वैज्ञानिक और ऑटोमोबाइल रिसर्च एसोसिएशन — शामिल रहे हैं।'
गौरतलब है कि भारत सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
ई85 की स्थिति: अभी नीति में नहीं
रामचंद्रन ने ई85 को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि यह फिलहाल किसी सरकारी नीति या क्रियान्वयन योजना का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा, 'ई85 को भविष्य के एक संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। यह सोच ब्राजील जैसे देशों से प्रेरित है, जहाँ ई100 को फ्लेक्स-फ्यूल इंजन टेक्नोलॉजी के साथ इस्तेमाल करने के लिए विकसित किया गया है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को लेकर उद्योग जगत में बहस तेज हो रही है।
जल संरक्षण पर विशेषज्ञ की राय
एथेनॉल उत्पादन के विस्तार के साथ जल उपयोग को लेकर उठ रही चिंताओं पर रामचंद्रन ने कहा कि उद्योगों को उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जल संरक्षण को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने लगभग 100% जल पुनर्चक्रण, उपचारित अपशिष्ट जल के अधिकतम उपयोग और रिवर्स ऑस्मोसिस तथा डिमिनरलाइजेशन प्लांट जैसी तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।
इसके अलावा, उन्होंने सुझाव दिया कि उद्योग जगत जल-गहन प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम करने के लिए एयर-बेस्ड, कंप्रेस्ड-एयर और चिल्ड-एयर कूलिंग तकनीकों को अपनाए।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा: विविधता में मजबूती
रामचंद्रन ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा की स्थिति को मजबूत बताते हुए कहा कि पिछले पाँच-छह वर्षों में कच्चे तेल के आयात स्रोतों में लगातार विविधता लाई गई है। उन्होंने बताया कि भारतीय तेल उद्योग ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ मिलकर खरीद विकल्पों का विस्तार किया है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट जैसी आपूर्ति शृंखला में संभावित रुकावटों से निपटने की क्षमता बढ़ी है।
आगे चलकर ई20 कार्यक्रम की सफलता और ई85 की दिशा में संभावित प्रगति भारत के ऊर्जा मिश्रण को नया आकार दे सकती है।