एथेनॉल मिश्रण (ई20) से कच्चे तेल की निर्भरता घटेगी, किसानों और अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा: आईआईपीई निदेशक
सारांश
मुख्य बातें
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी (आईआईपीई), विशाखापत्तनम के निदेशक शालिवाहन श्रीवास्तव ने 28 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि पेट्रोल में मिलाया गया एथेनॉल का प्रत्येक लीटर, आयातित जीवाश्म ईंधन के एक लीटर की सीधी जगह लेता है। उनके अनुसार यह कदम भारत की कच्चे तेल पर आयात-निर्भरता को कम करने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर उत्पादित नवीकरणीय ईंधन को प्रोत्साहित कर देश की आर्थिक नींव को और मजबूत बनाता है।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
श्रीवास्तव ने कहा कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से किसानों के लिए नई आर्थिक संभावनाओं के द्वार खुलते हैं। एथेनॉल उत्पादन में गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की माँग बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होती है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर लीटर एथेनॉल भारतीय अर्थव्यवस्था के भीतर अधिक मूल्य बनाए रखता है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ होती है।
ई20 की तकनीकी जाँच और सुरक्षा
आईआईपीई निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया कि ई20 ईंधन को बिना पर्याप्त परीक्षण के लागू नहीं किया गया है। इसे लागू करने से पूर्व नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम) और अन्य संबंधित एजेंसियों ने व्यापक तकनीकी मूल्यांकन किया। इस मूल्यांकन में इंजन की टिकाऊ क्षमता, जंग लगने की संभावना, विभिन्न सामग्रियों की अनुकूलता, वाहन की ड्राइवेबिलिटी, उत्सर्जन, ईंधन दक्षता और समग्र प्रदर्शन जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की गहन जाँच की गई।
वैश्विक अनुभव और भारत का सफर
श्रीवास्तव ने बताया कि ई20 कोई नई अवधारणा नहीं है — ब्राजील जैसे देशों में दशकों से इससे भी अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग हो रहा है। भारत में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की नींव वर्ष 2001 में एक पायलट परियोजना के रूप में रखी गई थी। 2006 में ई5 लागू किया गया, परंतु 2013-14 तक मिश्रण का स्तर मात्र 1.5 प्रतिशत ही रहा। इसके बाद उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढाँचे और नियामकीय व्यवस्था के विकास के साथ सरकार ने चरणबद्ध और संतुलित तरीके से एथेनॉल मिश्रण का प्रतिशत बढ़ाया।
मौजूदा स्थिति: आँकड़े क्या कहते हैं
निदेशक के अनुसार, भारत में प्रतिदिन लगभग 8 करोड़ वाहन पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने पहुँचते हैं, जिनमें करीब 80 प्रतिशत पेट्रोल चालित हैं। पिछले साढ़े तीन वर्षों से ई15 या उससे अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन का व्यापक उपयोग हो रहा है, जबकि ई19 और ई20 ईंधन भी पिछले ढाई वर्षों से बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में हैं। यह व्यावहारिक अनुभव इस बात का प्रमाण है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग पूरी तरह व्यावहारिक और सुरक्षित है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे का रास्ता
श्रीवास्तव ने अंत में कहा कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम भारत के ऊर्जा आत्मनिर्भरता अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। विदेशी मुद्रा की बचत, किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती और स्वच्छ पर्यावरण — ये सभी इस कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम हैं। आने वाले वर्षों में एथेनॉल आधारित ईंधन भारत के सतत विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्यों को हासिल करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।