6 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ई20 पेट्रोल से ₹1.90 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बची, एथेनॉल ब्लेंडिंग अब वैश्विक मानक: सरकारी फैक्टशीट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ई20 पेट्रोल से ₹1.90 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बची, एथेनॉल ब्लेंडिंग अब वैश्विक मानक: सरकारी फैक्टशीट

सारांश

2014-15 से मई 2026 तक एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने ₹1.90 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई, किसानों को ₹1.6 लाख करोड़ की अतिरिक्त आमदनी दी और 930 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन घटाया। भारत जो 88.5% कच्चा तेल आयात करता है, उसके लिए यह कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

2014-15 से मई 2026 तक एथेनॉल ब्लेंडिंग से ₹1.90 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा बची।
310 लाख मीट्रिक टन आयातित कच्चे तेल की जगह घरेलू एथेनॉल का उपयोग किया गया।
किसानों को ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आमदनी हुई।
930 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई।
भारत अपनी जरूरत का 88.5% कच्चा तेल आयात करता है — एथेनॉल ब्लेंडिंग इस निर्भरता को कम करने की नीति है।
अमेरिका, ब्राज़ील, जापान, कनाडा और यूरोपीय देश भी एथेनॉल ब्लेंडिंग अपना चुके हैं।

केंद्र सरकार द्वारा 5 जुलाई 2026 को जारी फैक्टशीट के अनुसार, एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम ने 2014-15 से मई 2026 तक देश की विदेशी मुद्रा में ₹1.90 लाख करोड़ से अधिक की बचत की है। इस अवधि में 310 लाख मीट्रिक टन आयातित कच्चे तेल की जगह घरेलू एथेनॉल का उपयोग किया गया, जिससे किसानों को ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आमदनी भी हुई।

कार्यक्रम की मुख्य उपलब्धियाँ

फैक्टशीट के आँकड़ों के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने 930 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी लाई है। यह तीन स्तंभों पर टिका है — ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और कृषि आय। भारतीय गन्ने, मक्के और चावल से तैयार एथेनॉल को देशी संसाधनों पर आधारित विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

आयात निर्भरता और ऊर्जा जोखिम

फैक्टशीट में रेखांकित किया गया है कि भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88.5 प्रतिशत आयात करता है। इसका अर्थ है कि वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला में अचानक आने वाली रुकावटें सीधे देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं। एथेनॉल ब्लेंडिंग को इसी जोखिम को कम करने की दीर्घकालिक नीति के रूप में पेश किया गया है।

वैश्विक परिदृश्य: भारत अकेला नहीं

सरकारी फैक्टशीट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग अब एक स्थापित वैश्विक प्रथा है। अमेरिका में ई10 राष्ट्रीय मानक है और सरकारी समर्थन से ई15 का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है; लाखों वाहन ई85 तक के ब्लेंड पर चलने में सक्षम हैं। ब्राज़ील में ई27 अनिवार्य मानक है, जिसे बढ़ाकर लगभग 35 प्रतिशत करने की योजना है और वहाँ बिकने वाली 80 प्रतिशत से अधिक नई कारें फ्लेक्स-फ्यूल वाहन हैं। जापान ने चरणबद्ध तरीके से ई10 लागू किया है, जबकि कनाडा, थाईलैंड और कई यूरोपीय देश भी अपनी स्वच्छ ईंधन रणनीतियों के अंतर्गत एथेनॉल ब्लेंडिंग अपना चुके हैं।

किसानों और अर्थव्यवस्था पर असर

फैक्टशीट के अनुसार, एथेनॉल की माँग ने गन्ना, मक्का और चावल उत्पादक किसानों के लिए एक नया बाज़ार तैयार किया है। ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त किसान आमदनी इस कार्यक्रम की सामाजिक-आर्थिक सफलता का प्रमुख संकेतक बताई गई है। यह ऐसे समय में आया है जब कृषि आय बढ़ाने के लिए नीतिगत दबाव लगातार बना हुआ है।

आगे की राह

फैक्टशीट में एथेनॉल ब्लेंडिंग को भारत की दीर्घकालिक एनर्जी ट्रांजिशन और बायोफ्यूल रणनीति का अभिन्न अंग बताया गया है। आने वाले वर्षों में ब्लेंडिंग प्रतिशत और विस्तार के संदर्भ में सरकार की नीतिगत दिशा इस कार्यक्रम की अगली परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या एथेनॉल उत्पादन की दौड़ में खाद्य सुरक्षा की कीमत तो नहीं चुकाई जा रही — गन्ना, मक्का और चावल जैसी फसलें जब ईंधन के लिए मोड़ी जाती हैं, तो खाद्यान्न की कीमतों पर दबाव बनता है। फैक्टशीट किसान आमदनी को सफलता के रूप में पेश करती है, लेकिन यह नहीं बताती कि किन राज्यों के किन किसानों को यह लाभ मिला और क्या छोटे काश्तकार इसमें शामिल हैं। ब्राज़ील और अमेरिका की तुलना भी अधूरी है — उनके पास दशकों पुरानी फ्लेक्स-फ्यूल इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जो भारत में अभी निर्माणाधीन है। कार्यक्रम की दिशा सही है, पर पारदर्शी क्रियान्वयन डेटा के बिना यह फैक्टशीट उपलब्धि से ज़्यादा दावा लगती है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम से भारत को कितनी विदेशी मुद्रा बची?
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, 2014-15 से मई 2026 तक एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से ₹1.90 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा बची। इस दौरान 310 लाख मीट्रिक टन आयातित कच्चे तेल की जगह घरेलू एथेनॉल का उपयोग किया गया।
एथेनॉल ब्लेंडिंग से किसानों को क्या फायदा हुआ?
फैक्टशीट के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने किसानों को ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आमदनी दी है। गन्ना, मक्का और चावल उत्पादक किसानों के लिए एथेनॉल की माँग ने एक नया बाज़ार तैयार किया है।
भारत एथेनॉल ब्लेंडिंग पर इतना जोर क्यों दे रहा है?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 88.5 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक कीमतों और आपूर्ति में उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है। एथेनॉल ब्लेंडिंग इस आयात निर्भरता को कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और किसानों की आमदनी बढ़ाने की एकीकृत नीति है।
क्या एथेनॉल ब्लेंडिंग केवल भारत में होती है या यह वैश्विक प्रथा है?
एथेनॉल ब्लेंडिंग एक स्थापित वैश्विक प्रथा है। अमेरिका में ई10 राष्ट्रीय मानक है, ब्राज़ील में ई27 अनिवार्य है और जापान ने चरणबद्ध तरीके से ई10 लागू किया है। कनाडा, थाईलैंड और यूरोपीय देश भी इसे अपना चुके हैं।
एथेनॉल ब्लेंडिंग से पर्यावरण को क्या फायदा हुआ?
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, 2014-15 से मई 2026 तक एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से 930 लाख मीट्रिक टन से अधिक कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है। यह भारत की ग्रीनहाउस गैस कटौती प्रतिबद्धताओं की दिशा में एक उल्लेखनीय योगदान माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. कल
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 1 साल पहले