इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर सोशल मीडिया अफवाहें बेबुनियाद — पेट्रोलियम मंत्रालय का खंडन
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 23 जून 2026 को स्पष्ट किया कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर संचालित है और सोशल मीडिया पर फैल रहे दावे भ्रामक एवं निराधार हैं। मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार इस कार्यक्रम की निरंतर निगरानी कर रही है और जनता को गुमराह करने वाले कंटेंट से सावधान रहने की अपील की।
सोशल मीडिया पर क्या फैल रहा है
मंत्रालय के बयान के अनुसार, सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीरें और वीडियो दोबारा शेयर किए जा रहे हैं जिनमें कथित तौर पर दिखाया गया है कि गन्ने का रस सीधे पेट्रोल में मिलाया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसे वीडियो का मकसद मामले को सनसनीखेज बनाना और व्यूज़ बढ़ाना है, न कि तथ्य सामने रखना।
एक अन्य दावा इथेनॉल की हाइग्रोस्कोपिक प्रकृति — यानी नमी सोखने की क्षमता — को लेकर फैलाया जा रहा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि फ्यूल टैंक में पानी का प्रवेश किसी भी ईंधन के लिए हानिकारक है, चाहे वह इथेनॉल-ब्लेंडेड हो या नहीं, और आधुनिक वाहनों में ऐसे डिज़ाइन फीचर्स मौजूद हैं जो इसे रोकते हैं।
इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम की पृष्ठभूमि
भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) 2003 में शुरू किया गया था। इसके तीन प्रमुख उद्देश्य हैं — कच्चे तेल के आयात में कमी, ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करना और पर्यावरण अनुकूल टिकाऊपन को बढ़ावा देना। कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया और 2023 से 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) की शुरुआत की गई।
गौरतलब है कि E20 की शुरुआत ऑटोमोबाइल निर्माताओं और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक तकनीकी मूल्यांकन एवं परामर्श के बाद ही की गई। मंत्रालय के अनुसार, E20 पेट्रोल लागू होने के बाद से इंजन खराब होने या वाहन बंद होने की कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई है।
इथेनॉल कैसे बनता है — तथ्य क्या कहते हैं
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ईंधन ब्लेंडिंग के लिए उपयोग होने वाला इथेनॉल स्थापित औद्योगिक प्रक्रियाओं से तैयार होता है। इसके कच्चे माल (फीडस्टॉक) में गन्ने का रस, शीरा (मोलासेस), टूटे हुए चावल और मक्का शामिल हैं। हालाँकि, फर्मेंटेशन (किण्वन) सहित कई प्रक्रियाओं से गुज़रने के बाद इथेनॉल के गुण कच्चे माल से बिल्कुल अलग हो जाते हैं।
मंत्रालय ने कहा, 'भारत में इथेनॉल-ब्लेंडिंग ईंधन की सख्त क्वालिटी शर्तों को पूरा करती है और इस्तेमाल से पहले इसकी कड़ी टेस्टिंग की जाती है।' पेट्रोल के साथ मिलाने से पहले यह कड़े गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है।
निगरानी तंत्र और हितधारक
केंद्र सरकार तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs), ऑटोमोबाइल निर्माताओं, फ्यूल टेस्टिंग एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर EBP कार्यक्रम के क्रियान्वयन की लगातार समीक्षा करती है। यह बहु-स्तरीय निगरानी तंत्र सुनिश्चित करता है कि ब्लेंडिंग मानक, ईंधन गुणवत्ता और वाहन प्रदर्शन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
आगे क्या
मंत्रालय ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर भ्रामक दावों पर ध्यान न दें और सरकारी स्रोतों से जानकारी प्राप्त करें। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने E20 लक्ष्य को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नीतिगत प्राथमिकता बनाए हुए है।