पेट्रोल में 20% से अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग पर कोई फैसला नहीं, संसद में बोली केंद्र सरकार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 23 जुलाई 2026 को लोकसभा में स्पष्ट किया कि फिलहाल पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लिखित जवाब में कहा कि यदि भविष्य में इस पर विचार किया जाता है, तो पहले विस्तृत वैज्ञानिक एवं तकनीकी अध्ययन कराए जाएंगे और सभी संबंधित पक्षों से व्यापक परामर्श होगा।
ई85 फ्यूल और फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल्स की स्थिति
सरकार ने स्पष्ट किया कि ई85 फ्यूल — जिसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है — केवल फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल्स (एफएफवी) के लिए उपलब्ध कराया गया है, जिन्हें विशेष रूप से इस मिश्रण के लिए डिज़ाइन और प्रमाणित किया गया है। मंत्री सुरेश गोपी ने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि देश भर में पेट्रोल की सामान्य एथेनॉल ब्लेंडिंग को 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाया जाएगा।
ई20 की सुरक्षा और तकनीकी वैधता
मंत्री ने बताया कि नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) और प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की भागीदारी से किए गए व्यापक लैब परीक्षण एवं फील्ड वैलिडेशन में पुष्टि हुई है कि ई20 पेट्रोल सुरक्षित, स्वच्छ और तकनीकी रूप से बेहतर ईंधन है।
सरकार के अनुसार, देश में ई15+ ब्लेंडेड पेट्रोल का उपयोग साढ़े तीन वर्ष से अधिक और ई19-ई20 का उपयोग ढाई वर्ष से अधिक समय से हो रहा है। इस अवधि में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज़्यादा पेट्रोल कारें इन ईंधनों पर चल चुकी हैं, परंतु एथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने का कोई सत्यापित मामला सामने नहीं आया है।
वाहन निर्माताओं के सर्विस रिकॉर्ड क्या कहते हैं
एक प्रमुख पैसेंजर व्हीकल कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ पुराने वाहन भी शामिल थे जो ई20 सर्टिफाइड नहीं थे। इसके बावजूद ई20 के कारण इंजन क्षति या असामान्य घिसावट का कोई मामला सामने नहीं आया। एक प्रमुख टू-व्हीलर कंपनी के सर्विस रिकॉर्ड में भी ई20 इस्तेमाल करने वाले वाहनों में पुराने ईंधन की तुलना में नुकसान की दर अधिक नहीं पाई गई। वाहन कंपनियाँ ई20 पर चलने वाले वाहनों पर सामान्य रूप से वारंटी भी दे रही हैं।
माइलेज और पर्यावरणीय लाभ
माइलेज के सवाल पर सरकार ने स्वीकार किया कि कुछ पुराने ई10-आधारित वाहनों में ईंधन दक्षता लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकती है। हालाँकि, एसआईएएम और एआरएआई के अनुसार ई20 में उच्च ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता, साफ दहन और स्मूद इंजन परफॉर्मेंस जैसे लाभ मिलते हैं, जिससे वाहन की एक्सेलरेशन और राइड क्वालिटी बेहतर होती है तथा कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है।
एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के आर्थिक और पर्यावरणीय परिणाम
सरकार के अनुसार, एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम से अब तक ₹1.97 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इस दौरान लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का आयात कम हुआ है और 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है। साथ ही किसानों को ₹1.66 लाख करोड़ से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। यह कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा और कृषि आय दोनों मोर्चों पर भारत की दीर्घकालिक नीति का हिस्सा बना हुआ है।