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ई20 से आगे एथेनॉल मिश्रण पर अभी कोई फैसला नहीं, सुरेश गोपी ने राज्यसभा में दी जानकारी

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ई20 से आगे एथेनॉल मिश्रण पर अभी कोई फैसला नहीं, सुरेश गोपी ने राज्यसभा में दी जानकारी

सारांश

पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिलाने पर सरकार ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं। राज्यसभा में मंत्री सुरेश गोपी ने साफ कहा — आगे का कोई भी फैसला वैज्ञानिक अध्ययन और उद्योग परामर्श के बाद होगा। इस बीच ई20 लक्ष्य पाँच साल पहले हासिल कर देश ने ₹1.97 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचाई है।

मुख्य बातें

केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 20 जुलाई 2026 को राज्यसभा में बताया कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
कोई भी भावी फैसला ऑटोमोबाइल निर्माताओं , तेल विपणन कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों से परामर्श के बाद होगा।
भारत ने ई20 लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच वर्ष पहले हासिल किया; मिश्रण स्तर 2013-14 के 1.53% से बढ़कर 2025-26 में 20% पहुँचा।
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से ₹1.97 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचत, 316 लाख टन कच्चे तेल के आयात में कमी और 952 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कटौती हुई।
किसानों को इस कार्यक्रम के ज़रिये ₹1.66 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आय मिली।
एक प्रमुख वाहन निर्माता के 2.84 करोड़ वाहनों के सर्विस रिकॉर्ड के विश्लेषण में ई20 ईंधन से किसी नुकसान का प्रमाण नहीं मिला।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 20 जुलाई 2026 को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि पेट्रोल में मौजूदा 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ई20) की सीमा को आगे बढ़ाने पर सरकार ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने उच्च सदन में लिखित उत्तर में कहा कि इस दिशा में कोई भी कदम व्यापक वैज्ञानिक एवं तकनीकी अध्ययन और सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद ही उठाया जाएगा।

मंत्री का स्पष्ट बयान

गोपी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में कहा, 'फिलहाल एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को ई20 से आगे बढ़ाने का अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी प्रस्ताव पर निर्णय ऑटोमोबाइल निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों के साथ विचार-विमर्श के बाद ही होगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उद्योग जगत और उपभोक्ता वर्ग में उच्च एथेनॉल मिश्रण के संभावित प्रभावों को लेकर अटकलें चल रही थीं।

ई20 लक्ष्य: पाँच साल पहले हासिल की उपलब्धि

मंत्री ने सदन को बताया कि भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच वर्ष पूर्व ही प्राप्त कर लिया। 2013-14 में जहाँ एथेनॉल मिश्रण का औसत स्तर मात्र 1.53 प्रतिशत था, वहीं 2025-26 एथेनॉल आपूर्ति वर्ष में यह बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुँच गया। गौरतलब है कि यह उपलब्धि दो दशकों से अधिक की चरणबद्ध कार्यान्वयन प्रक्रिया का परिणाम है।

आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ

2014-15 से लागू एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के तहत देश को कई महत्वपूर्ण लाभ हुए हैं। गोपी के अनुसार, इस कार्यक्रम के चलते अब तक ₹1.97 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और लगभग 316 लाख टन कच्चे तेल के आयात में कमी आई है। इसके अलावा, करीब 952 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी दर्ज की गई है। किसानों को भी इस कार्यक्रम से ₹1.66 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है।

वाहन प्रदर्शन पर चिंताओं का जवाब

ई20 ईंधन से वाहनों के इंजन, फ्यूल पंप और जंग संबंधी समस्याओं की मीडिया रिपोर्टों पर मंत्री ने कहा कि सरकार को वाहन निर्माताओं, ऑटोमोबाइल संघों या उपभोक्ता संगठनों की ओर से ऐसी कोई व्यापक या प्रमाणित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने स्वीकार किया कि मीडिया और सोशल मीडिया पर चिंताएँ उठाई गई हैं, लेकिन इनका वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण किया जा चुका है।

गोपी ने बताया कि 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज़्यादा पेट्रोल कारें — जिनमें ई20 प्रमाणन से पहले निर्मित कई वाहन भी शामिल हैं — पिछले ढाई से साढ़े तीन वर्षों से E15-प्लस और ई19-ई20 ईंधन का उपयोग कर रहे हैं, और बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने का कोई सत्यापित प्रमाण सामने नहीं आया है।

उद्योग के आँकड़े क्या कहते हैं

उद्योग के आँकड़ों का हवाला देते हुए मंत्री ने बताया कि एक प्रमुख यात्री वाहन निर्माता ने 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों के सर्विस रिकॉर्ड का विश्लेषण किया, जिनमें करीब 1.5 करोड़ ऐसे वाहन भी थे जो ई20 के लिए प्रमाणित नहीं थे। जाँच में ईंधन के कारण किसी भी प्रकार के नुकसान का प्रमाण नहीं मिला। एक प्रमुख दोपहिया वाहन निर्माता ने भी इसी तरह के निष्कर्ष प्रस्तुत किए हैं। आने वाले समय में सरकार की नीति दिशा उन वैज्ञानिक अध्ययनों और उद्योग परामर्शों पर निर्भर करेगी जो अभी प्रक्रियाधीन हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी खड़ा करता है कि ई20 के बाद की राह के लिए वैज्ञानिक अध्ययन की समयसीमा क्या होगी। एथेनॉल कार्यक्रम की उपलब्धियाँ — ₹1.97 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचत और किसानों को ₹1.66 लाख करोड़ की अतिरिक्त आय — प्रभावशाली हैं, परंतु इनका लाभ मुख्यतः गन्ना-प्रधान राज्यों तक सीमित रहा है। वाहन प्रदर्शन पर उद्योग के आँकड़े आश्वस्त करने वाले हैं, लेकिन ये आँकड़े स्वयं निर्माताओं के हैं — स्वतंत्र तृतीय-पक्ष सत्यापन की अनुपस्थिति एक कमज़ोर कड़ी बनी हुई है। जब तक परामर्श प्रक्रिया की स्पष्ट समयसीमा और पारदर्शी मापन ढाँचा सामने नहीं आता, नीतिगत अनिश्चितता उद्योग निवेश को प्रभावित करती रहेगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण पर सरकार का क्या रुख है?
सरकार ने अभी तक ई20 से अधिक एथेनॉल मिश्रण पर कोई निर्णय नहीं लिया है। केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 20 जुलाई 2026 को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि कोई भी भावी फैसला वैज्ञानिक अध्ययन और उद्योग परामर्श के बाद ही होगा।
भारत ने ई20 एथेनॉल मिश्रण लक्ष्य कब हासिल किया?
भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया। 2013-14 में यह स्तर मात्र 1.53 प्रतिशत था, जो 2025-26 एथेनॉल आपूर्ति वर्ष में 20 प्रतिशत तक पहुँच गया।
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से देश को क्या फायदे हुए हैं?
एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से अब तक ₹1.97 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा बचत हुई है, 316 लाख टन कच्चे तेल का आयात घटा है और 952 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आई है। इसके अलावा किसानों को ₹1.66 लाख करोड़ से अधिक की अतिरिक्त आय मिली है।
क्या ई20 ईंधन से वाहनों के इंजन को नुकसान होता है?
सरकार के अनुसार, वाहन निर्माताओं या उपभोक्ता संगठनों से ई20 ईंधन के कारण इंजन खराब होने की कोई व्यापक या प्रमाणित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। एक प्रमुख यात्री वाहन निर्माता ने 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों के सर्विस रिकॉर्ड की जाँच में ईंधन से किसी नुकसान का प्रमाण नहीं पाया।
ई20 से आगे एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का फैसला किन आधारों पर होगा?
मंत्री सुरेश गोपी के अनुसार, किसी भी प्रस्ताव पर निर्णय ऑटोमोबाइल निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों के साथ व्यापक वैज्ञानिक और तकनीकी विचार-विमर्श के आधार पर लिया जाएगा। परामर्श प्रक्रिया की कोई निश्चित समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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