भारत का ई20 अभियान वैश्विक लहर का हिस्सा, ब्राज़ील ई100 तक पहुँचा; जापान 2040 तक ई20 का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
भारत में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (ई20) को लेकर जहाँ घरेलू स्तर पर बहस जारी है, वहीं वैश्विक आँकड़े एक अलग ही तस्वीर पेश करते हैं। 'ग्लोबल बायोएथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसीज़ मैप' की रिपोर्टों के अनुसार, दुनिया के दर्जनों देश पहले से ही पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को अपना चुके हैं और कई देश ई30, ई85 तथा ई100 जैसे उच्च स्तरीय मिश्रण की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। इस परिप्रेक्ष्य में भारत का ई20 अभियान एक वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन की कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
भारत की स्थिति और आगे का लक्ष्य
रिपोर्टों के मुताबिक, भारत फिलहाल ई20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण) तक पहुँच चुका है और 2030 तक ई30 लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने की माँग बढ़ रही है। गौरतलब है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर घरेलू विरोध के बावजूद, यह नीति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्थापित और स्वीकृत ऊर्जा रणनीति है।
ब्राज़ील और लैटिन अमेरिका: सबसे आगे
बायोएथेनॉल ब्लेंडिंग के मामले में ब्राज़ील दुनिया में सबसे अग्रणी देशों में शुमार है। वहाँ ई30 के साथ-साथ ई100 (100 प्रतिशत एथेनॉल) का भी उपयोग किया जाता है। पैराग्वे ने ई30 नीति अपनाई है, जबकि बोलीविया ने ई25 का लक्ष्य तय किया है। लैटिन अमेरिका के अन्य देशों में अर्जेंटीना ई12, उरुग्वे ई10, कोलंबिया ई10, इक्वाडोर ई10 (इकोपैस गैसोलीन) और पेरू ई7.8 पर काम कर रहे हैं। कोस्टा रिका और पनामा ने 2027 तक ई10 लागू करने का लक्ष्य रखा है, जबकि ग्वाटेमाला 2026 तक ई10 लागू करेगा।
अमेरिका, यूरोप और कनाडा की नीतियाँ
संयुक्त राज्य अमेरिका में ई10 और ई15 का व्यापक उपयोग हो रहा है। यूरोपीय संघ के 19 सदस्य देशों में ई10 उपलब्ध है और ब्रिटेन ने भी ई10 लागू किया है। फिनलैंड ने 2027 तक ई22.5 का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। कनाडा में प्रांत-दर-प्रांत अलग-अलग नीतियाँ हैं — संघीय स्तर पर ई5, ओंटेरियो ई11, क्यूबेक ई12, सस्केचेवान ई7.5 और मैनिटोबा ई10 पर काम कर रहे हैं।
एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्र
एशिया में भारत के अलावा नेपाल ई10, थाईलैंड में ई10 अनिवार्य और वैकल्पिक रूप से ई20 व ई85, वियतनाम ई10 और फिलीपींस ई10 अनिवार्य (ई20 पर विचार जारी) लागू हैं। इंडोनेशिया में आयातित पेट्रोल में ई3 की अनुमति है। जापान ने 2030 तक ई10 और 2040 तक ई20 लागू करने का लक्ष्य रखा है। अफ्रीका में ज़िम्बाब्वे ई20, नाइजीरिया ई10, अंगोला ई10, मलावी ई10, मोज़ाम्बिक ई10 और दक्षिण अफ्रीका ई2 नीति पर काम कर रहे हैं। युगांडा ने 2030 तक ई5 और ई20 का लक्ष्य रखा है, जबकि मिस्र ने 2030 तक ई5 लागू करने की योजना बनाई है। ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में ई6 और क्वींसलैंड में ई4 लागू है। इराक ने ई10 और तुर्किए ने ई3 ब्लेंडिंग नीति अपनाई है।
वैश्विक रुझान का संदेश
रिपोर्टों के अनुसार, दुनिया के अधिकांश देश जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए एथेनॉल मिश्रण को एक प्रमुख नीतिगत साधन के रूप में अपना रहे हैं। आँकड़ों के अनुसार, यह वैश्विक रुझान बताता है कि स्वच्छ ईंधन की दिशा में दुनिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है। भारत ई20 हासिल करने के बाद अब 2030 तक ई30 के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, जो उसे इस वैश्विक बदलाव का एक सक्रिय भागीदार बनाता है।